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ISRO: इसरो के रिसैट-2 ने पृथ्वी के वायुमंडल में संभावित प्रभाव बिंदु पर साढ़े 13 साल बाद फिर से प्रवेश किया

Fri, 04 Nov 2022 01:51 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, बेंगलुरु।
पीटीआई, बेंगलुरु। Published by: देव कश्यप Updated Fri, 04 Nov 2022 01:51 AM IST
सार

राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी मुख्यालय ने यहां बताया कि इसरो में अंतरिक्ष यान संचालन दल द्वारा कक्षा के उचित रख-रखाव और मिशन योजना के साथ ईंधन के किफायती उपयोग से रिसैट-2 ने 13 वर्षों के लिए बहुत उपयोगी पेलोड डाटा प्रदान किया। 

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ISRO RISAT-2 makes uncontrolled reentry into earth atmosphere at predicted impact point
RISAT-2 का अंतिम कक्षा स्थलीय अनुरेखण। - फोटो : ISRO

विस्तार

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा 2009 में लॉन्च किया गया रिसैट-2 (RISAT-2) उपग्रह ने संभावित प्रभाव बिंदु पर पृथ्वी के वायुमंडल में अनियंत्रित रूप से साढ़े 13 साल बाद फिर से प्रवेश किया। इसरो ने कहा कि केवल 300 किलोग्राम वजन के उपग्रह ने 30 अक्तूबर को जकार्ता के पास हिंद महासागर में संभावित प्रभाव बिंदु पर पृथ्वी के वायुमंडल में अनियंत्रित होने के बाद फिर से प्रवेश किया।

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रिसैट- 2 (रडार इमेजिंग सैटेलाइट-2) उपग्रह को शुरुआती स्तर पर चार साल के लिए डिजाइन किया गया था और इसके लिए सिर्फ 30 किलोग्राम ईंधन भरा गया था। राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी मुख्यालय ने यहां बताया कि इसरो में अंतरिक्ष यान संचालन दल द्वारा कक्षा के उचित रख-रखाव और मिशन योजना के साथ ईंधन के किफायती उपयोग से रिसैट-2 ने 13 वर्षों के लिए बहुत उपयोगी पेलोड डाटा प्रदान किया। इसके वायुमंडल में प्रवेश के बाद से, विभिन्न अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए रिसैट-2 की रडार पेलोड सेवाएं प्रदान की गईं।
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इसरो ने कहा कि वायुमंडल में फिर से प्रवेश करने के बाद उपग्रह में ईंधन नहीं बचा था। इसलिए ईंधन से कोई संदूषण या विस्फोट होने की उम्मीद नहीं है। वैज्ञानिकों के अध्ययनों ने पुष्टि की है कि एयरो-थर्मल विखंडन के कारण उत्पन्न टुकड़े वायुमंडल में फिर से प्रवेश करने पर जल जाएंगे और इसका कोई भी टुकड़ा पृथ्वी पर किसी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा।

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इसरो ने कहा कि "रिसैट-2 एक कुशल और श्रेष्ठ तरीके से अंतरिक्ष यान कक्षीय संचालन करने की इसरो की क्षमता का एक स्पष्ट उदाहरण है। जैसा कि रिसैट-2 ने साढ़े 13 वर्षों के भीतर पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश किया, इसने अंतरिक्ष मलबे के लिए सभी आवश्यक अंतरराष्ट्रीय शमन दिशानिर्देशों का अनुपालन किया है, जो बाहरी अंतरिक्ष की दीर्घकालिक स्थिरता की दिशा में भी इसरो की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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