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अंतरिक्ष मिशनों की क्या है योजना?: इसरो चीफ ने बताया रोडमैप, बनेंगे एसएसएलवी कॉम्प्लेक्स से लॉन्च पैड्स तक
Sun, 25 Oct 2026 12:53 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, चेन्नई
पीटीआई, चेन्नई
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sun, 25 Oct 2026 12:53 PM IST
सार
इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के विस्तार की रूपरेखा पेश की है। उनके मुताबिक, 2029 तक देश में चार सक्रिय लॉन्च पैड होंगे और तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम में छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए 2000 एकड़ में विशेष परिसर बनाया जाएगा।
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भारत में 2029 तक होंगे चार सक्रिय लॉन्च पैड
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा कि भारत वर्ष 2029 तक अपनी अंतरिक्ष गतिविधियों का बड़े स्तर पर विस्तार करेगा। इसके तहत देश में चार सक्रिय लॉन्च पैड उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि बढ़ती घरेलू और वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों के साथ साझेदारी भी बढ़ाई जाएगी।
नारायणन ने शनिवार को चेन्नई के एक निजी विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह के दौरान इसरो की भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एजेंसी का लक्ष्य हजारों उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करने की बढ़ती जरूरत को पूरा करना है।
तमिलनाडु में 2000 एकड़ में बनेगा SSLV कॉम्प्लेक्स
इसरो प्रमुख ने बताया कि तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के कुलसेकरपट्टिनम में छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) के लिए 2000 एकड़ में एक विशेष परिसर विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर उपग्रह प्रक्षेपण की बढ़ती मांग को पूरा करना है।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि इसरो का निजीकरण नहीं किया जाएगा। हालांकि, अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए निजी कंपनियों के साथ सहयोग जरूरी है।
नारायणन ने कहा, "इस बढ़ते तंत्र को संभालने के लिए इसरो स्टार्टअप और निजी कंपनियों को सहयोग देगा। उन्हें तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि आर्थिक विकास को बढ़ावा मिले और उच्च तकनीक वाले हजारों रोजगार पैदा हों।" उन्होंने कहा कि 2029 तक चार सक्रिय लॉन्च पैड के साथ भारत अपनी अंतरिक्ष गतिविधियों का विस्तार करेगा। वाणिज्यिक अभियानों को संभालने के लिए निजी उद्योगों के साथ साझेदारी पर भी अधिक निर्भरता होगी।
कुलसेकरपट्टिनम केंद्र में होंगी आधुनिक सुविधाएं
नारायणन के अनुसार, कुलसेकरपट्टिनम में बनने वाले अंतरिक्ष केंद्र में रॉकेट और उपग्रहों को एकीकृत करने वाली इमारतें, लॉन्च पैड, रेल ट्रैक प्रणाली और टेलीमेट्री, ट्रैकिंग तथा कमांड से जुड़ी सुविधाएं होंगी। हालांकि, उन्होंने प्रस्तावित चार लॉन्च पैड में से बाकी तीन के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी।
अगले दो महीने में गगनयान का पहला मानवरहित परीक्षण
इसरो प्रमुख ने कहा कि एजेंसी अगले दो महीनों में गगनयान मिशन का पहला मानवरहित परीक्षण करने की योजना बना रही है। इसके बाद मानवयुक्त मिशन से पहले दो और मानवरहित परीक्षण किए जाएंगे। उन्होंने कहा, "इन परीक्षणों के दौरान अलग-अलग दबाव, तापमान और आर्द्रता की परिस्थितियों में पर्यावरण नियंत्रण, सुरक्षा प्रणालियों, चालक दल के बचाव तंत्र और मॉड्यूल के अंदरूनी हिस्सों का आकलन किया जाएगा।"
नारायणन ने बताया कि गगनयान मिशन के लिए इसरो लगभग 8000 जमीनी प्रयोग सफलतापूर्वक कर चुका है। वहीं, चार नामित अंतरिक्ष यात्री फिलहाल विशेष प्रशिक्षण ले रहे हैं।
चंद्रयान-5 में जापान के साथ सहयोग
इसरो प्रमुख ने भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए चंद्रयान-5 मिशन के बारे में भी जानकारी दी। यह भारत और जापान की अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच सहयोग से संचालित होने वाला चंद्र मिशन होगा। उन्होंने बताया कि इस मिशन में 350 किलोग्राम का रोवर शामिल करने की योजना है। यह रोवर चंद्रमा की सतह पर 100 दिनों तक प्रयोग करेगा।
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नारायणन ने शनिवार को चेन्नई के एक निजी विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह के दौरान इसरो की भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एजेंसी का लक्ष्य हजारों उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करने की बढ़ती जरूरत को पूरा करना है।
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तमिलनाडु में 2000 एकड़ में बनेगा SSLV कॉम्प्लेक्स
इसरो प्रमुख ने बताया कि तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के कुलसेकरपट्टिनम में छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) के लिए 2000 एकड़ में एक विशेष परिसर विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर उपग्रह प्रक्षेपण की बढ़ती मांग को पूरा करना है।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि इसरो का निजीकरण नहीं किया जाएगा। हालांकि, अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए निजी कंपनियों के साथ सहयोग जरूरी है।
नारायणन ने कहा, "इस बढ़ते तंत्र को संभालने के लिए इसरो स्टार्टअप और निजी कंपनियों को सहयोग देगा। उन्हें तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि आर्थिक विकास को बढ़ावा मिले और उच्च तकनीक वाले हजारों रोजगार पैदा हों।" उन्होंने कहा कि 2029 तक चार सक्रिय लॉन्च पैड के साथ भारत अपनी अंतरिक्ष गतिविधियों का विस्तार करेगा। वाणिज्यिक अभियानों को संभालने के लिए निजी उद्योगों के साथ साझेदारी पर भी अधिक निर्भरता होगी।
कुलसेकरपट्टिनम केंद्र में होंगी आधुनिक सुविधाएं
नारायणन के अनुसार, कुलसेकरपट्टिनम में बनने वाले अंतरिक्ष केंद्र में रॉकेट और उपग्रहों को एकीकृत करने वाली इमारतें, लॉन्च पैड, रेल ट्रैक प्रणाली और टेलीमेट्री, ट्रैकिंग तथा कमांड से जुड़ी सुविधाएं होंगी। हालांकि, उन्होंने प्रस्तावित चार लॉन्च पैड में से बाकी तीन के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी।
अगले दो महीने में गगनयान का पहला मानवरहित परीक्षण
इसरो प्रमुख ने कहा कि एजेंसी अगले दो महीनों में गगनयान मिशन का पहला मानवरहित परीक्षण करने की योजना बना रही है। इसके बाद मानवयुक्त मिशन से पहले दो और मानवरहित परीक्षण किए जाएंगे। उन्होंने कहा, "इन परीक्षणों के दौरान अलग-अलग दबाव, तापमान और आर्द्रता की परिस्थितियों में पर्यावरण नियंत्रण, सुरक्षा प्रणालियों, चालक दल के बचाव तंत्र और मॉड्यूल के अंदरूनी हिस्सों का आकलन किया जाएगा।"
नारायणन ने बताया कि गगनयान मिशन के लिए इसरो लगभग 8000 जमीनी प्रयोग सफलतापूर्वक कर चुका है। वहीं, चार नामित अंतरिक्ष यात्री फिलहाल विशेष प्रशिक्षण ले रहे हैं।
चंद्रयान-5 में जापान के साथ सहयोग
इसरो प्रमुख ने भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए चंद्रयान-5 मिशन के बारे में भी जानकारी दी। यह भारत और जापान की अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच सहयोग से संचालित होने वाला चंद्र मिशन होगा। उन्होंने बताया कि इस मिशन में 350 किलोग्राम का रोवर शामिल करने की योजना है। यह रोवर चंद्रमा की सतह पर 100 दिनों तक प्रयोग करेगा।