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Israel Hamas war: गाजा में मदद और इस्राइल में हथियार! इसी अमेरिकी नीति पर भड़के मुस्लिम देश, बनाया यह प्लान

Thu, 19 Oct 2023 05:26 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Thu, 19 Oct 2023 05:26 PM IST
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सार
Israel Hamas War: विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि अमेरिका जिस तरीके की नीति इस्राइल और हमास के युद्ध में अपना रहा है, उससे ही मुस्लिम देश अमेरिका से नाराज हो रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका इस पूरे मामले में इस्राइल के साथ मजबूती के साथ खड़ा तो है, लेकिन वह अरब देश और अन्य मुस्लिम देशों की खुलकर नाराजगी भी नहीं लेना चाहता है...
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Israel Hamas war: Help in Gaza strip and weapons in Israel! Muslim countries angry on this Joe biden policy
Israel Hamas War - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

अमेरिका की ओर से इस्राइल को किए जाने वाले खुले समर्थन पर मुस्लिम देश पहले से ही नाराज चल रहे थे। रही सही कसर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के इस्राइली दौरे और गाजा के अस्पताल में हुए हमले में तेल अवीव को क्लीन चिट दिए जाने के साथ पूरी हो गई। इस्लामिक सहयोग संगठन की ओर से बुलाई गई आपातकालीन बैठक में तय किया गया कि अगर अमेरिका मुस्लिम देशों पर पाबंदी लगाने की योजना बना रहा है, तो न सिर्फ इस्राइल बल्कि उसके सभी सहयोगी देशों के ऊपर प्रतिबंध लगाते हुए तेल की आपूर्ति ठप देनी चाहिए। हालांकि इन सब के बीच अमेरिका ने फलिस्तीन के नागरिकों की मदद के लिए गाजा में राहत सामग्री भेजने का फैसला लिया है। फिलहाल विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि अमेरिका ने इस्राइल को गोला बारूद और गाजा को राहत सामग्री भेजने के साथ भविष्य की वैश्विक राजनीति को भी साधने की बड़ी योजना पर काम करना शुरू कर दिया है। इसमें फलीस्तीन को मदद के बहाने मुस्लिम देशों की ओर से पैदा हुई नाराजगी को कम करने का बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

बीते 13 दिनों से चल रहे हमास और इस्राइल के युद्ध में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट तब आया, जब गाजा के अस्पताल में सैकड़ों लोगों की जान जाने पर मुस्लिम देश आग बबूला हो गए। इस पूरे मामले में फलिस्तीन के समर्थन में दुनिया के अलग-अलग देश में दूतावासों के बाहर प्रदर्शन होने शुरू हो गए, जिसमें जॉर्डन, तुर्की और लेबनान समेत ईरान, मोरक्को, ट्यूनीशिया, इराक और यमन शामिल हैं। विदेशी मामलों के जानकार और पूर्व राजनयिक टीवी राजशेखर कहते हैं कि अस्पताल पर हुआ हमला और अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडन का तेल अवीव को क्लीन चिट दिया जाना मुस्लिम देशों को सबसे ज्यादा अखर गया है। वह कहते हैं कि यही वजह है कि फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ किया जाने वाला शिखर सम्मेलन रद्द कर दिया। इस शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन फलस्तीन के साथ-साथ अरब देशों के कई प्रमुख राष्ट्रीय अध्यक्षों के साथ बैठक कर इस्राइल और हमास के बीच चल रहे युद्ध पर चर्चा करने वाले थे।

विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि अमेरिका जिस तरीके की नीति इस्राइल और हमास के युद्ध में अपना रहा है, उससे ही मुस्लिम देश अमेरिका से नाराज हो रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका इस पूरे मामले में इस्राइल के साथ मजबूती के साथ खड़ा तो है, लेकिन वह अरब देश और अन्य मुस्लिम देशों की खुलकर नाराजगी भी नहीं लेना चाहता है। पूर्व भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी रहे टीवी राजशेखर कहते हैं कि यह बात अलग है कि इस पूरे मामले में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जरूर अपना सख्त रूप अपनाया है और उस पर प्रतिबंध भी लगाए हैं। लेकिन इसी के साथ अमेरिका ने गाजा में रह रहे फलिस्तीन के लोगों की मदद को भी बड़ा हाथ बढ़ाया है। विदेशी मामलों के जानकार मानते हैं कि अमेरिका ने ऐसा करके मुस्लिम देशों से खासकर अरब देशों के बीच में बेहतर हुए रिश्तों को मजबूत रखते हुए और उनको आगे बढ़ाने की पहल की है।

विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि इस्राइल और हमास के बीच चल रहे युद्ध में ईरान ने जरूर इस पूरे मामले में एक तरह से मुस्लिम देशों की गोलबंदी पेश करने की कोशिश शुरू की है। यही वजह है कि अमेरिका और इस्राइल लगातार ईरान पर न सिर्फ हमलावर हैं, बल्कि हमास की ओर से किए जाने वाले युद्ध में खुलकर उनका सहयोग और साथ देने का आरोप भी लगा रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अभिजीत चंद्र कहते हैं कि इस्राइल और अमेरिका की ओर से घेरे जा रहे ईरान ने इस्लामिक सहयोग संगठन की बैठक में इन दोनों देशों के खिलाफ कड़े फैसले लिए जाने की मांग की थी। ईरान के विदेश मंत्री होशेन ने तो इन देशों को दिए जाने वाले तेल की आपूर्ति को ही ठप करने की मांग उठाई थी। इसके अलावा अमेरिका की ओर से मुस्लिम देशों पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों के खिलाफ भी संगठन के माध्यम से आवाज बुलंद कर करें कड़े प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी।

वहीं जेद्दा में हुई बैठक के बाद मुस्लिम देशों की ओर से राजनयिक संबंध खत्म करने के साथ-साथ तेल की आपूर्ति ठप किए जाने की धमकी दी गई। इसके बाद अमेरिका की ओर से फलस्तीन के लोगों की गाजा में की जाने वाली मदद को लेकर भी विदेशी मामलों के जानकारों की अपनी एक अलग राय है। विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि अमेरिका ने भले ही मानवीय पहलुओं के आधार पर यह मदद दी हो, लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है कि मुस्लिम देशों के साथ अपने रिश्ते को बेहतर बनाने की पहल के लिहाज से गाजा में इस्राइली हमले में पीड़ितों की मदद को हाथ आगे बढ़ाया गया है। लेकिन मुस्लिम देश अमेरिका की इस नीति का भी खुलकर विरोध कर रहे हैं। मुस्लिम सहयोग संगठन के देशों ने एक साथ इस्राइल में युद्ध के सामान की आपूर्ति के साथ-साथ गाजा में घायलों को मदद पेश करने की इस नीति पर अमेरिका को घेरा है।

अमेरिकी मदद को गाजा तक पहुंचाने के लिए मिस्र ने राफा क्रॉसिंग के गेट खोलने के लिए सहमति दी है। जानकारी के मुताबिक इन ट्रकों को बॉर्डर से गाजा तक पहुंचने में आठ घंटे लगेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बयान के दौरान कहा कि यह काफी स्पष्ट समझौता रहा। हम चाहते थे कि जितने ज्यादा से ज्यादा ट्रक पहुंचाए जा सकें। उन्होंने कहा कि हमारे बीच प्रतिबद्धता है कि जैसे ही यह ट्रक सीमा पार करेंगे, गाजा की तरफ मौजूद संयुक्त राष्ट्र के लोग इन्हें लोगों को बांट देंगे, जिसमें कुछ समय लगेगा। लेकिन अगर हमास के लोगों ने इसे जब्त करने की कोशिश की या आगे नहीं बढ़ने दिया तो यह राहत सामग्री मिलना तुरंत ही बंद हो जाएगी, क्योंकि हम ऐसी कोई मदद भेजेंगे ही नहीं।

अमेरिकी राष्ट्रपति बुधवार को इस्राइल दौरे पर पहुंचे थे। उन्होंने यहां प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की और अमेरिका के इस्राइल के साथ खड़े रहने की प्रतिबद्धता जताई। इस दौरे के बाद उन्हें इस्राइल के पड़ोसी देशों के राष्ट्राध्यक्षों से भी मिलना था और गाजा के लिए मानवीय मदद मुहैया कराने पर बात करनी थी। हालांकि, गाजा के अस्पताल में मंगलवार देर रात हुए हमले के बाद बाइडन की ये मुलाकातें एक-एक कर रद्द हो गईं। इसके बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस्राइल से लौटने के दौरान मिस्र के राष्ट्रपति से बातचीत की।

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