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पाकिस्तानी उच्चायोग के बिल में छिपे बैठे हैं जासूस, अब उतरेगा कई चेहरों से नकाब!

Thu, 25 Jun 2020 05:45 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 25 Jun 2020 05:45 PM IST
सार

मामले की जांच कर रही एक एजेंसी के सूत्र बताते हैं कि दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास में केवल जासूसी प्रकरण ही नहीं चल रहा था, बल्कि यहां से पाकिस्तान में बने आईएसआई के कॉल सेंटर भी संचालित किए जा रहे थे...

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ISI agents are hiding in the Pakistan High Commission, very soon india will take strict action
Pakistan High Commission - फोटो : PTI (for Reference)

विस्तार

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पाकिस्तानी उच्चायोग में जासूसी के गहरे बिल बने हैं। वहां बैठे जासूस केवल सैन्य प्रतिष्ठानों से जुड़ी सूचनाएं ही नहीं जुटाते, बल्कि बॉर्डर एरिया, बटालियनों का मूवमेंट, ट्रेनिंग सेंटर, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में होने वाले नए कोर्स, कोस्ट गार्ड और एनएसजी की जानकारी हासिल कर रहे हैं।


अब ऐसे कई जासूसों उर्फ आईएसआई एजेंट के चेहरों से नकाब उतरने जा रहा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, आईबी और रॉ जैसी एजेंसियां इस ऑपरेशन में लगी हैं। इस बाबत जुलाई में एक बड़ा खुलासा हो सकता है।

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मामले की जांच कर रही एक एजेंसी के सूत्र बताते हैं कि दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास में केवल जासूसी प्रकरण ही नहीं चल रहा था, बल्कि यहां से पाकिस्तान में बने आईएसआई के कॉल सेंटर भी संचालित किए जा रहे थे।

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ये वही सेंटर हैं, जहां से भारतीय नागरिकों के पास कई तरह की जानकारी लेने के लिए फोन किए जाते हैं।

इस सेंटर को उच्चायोग में बैठे जासूसों की तरफ से सुरक्षा बलों के ग्राउंड स्टाफ और दूसरे कर्मियों की जानकारी मुहैया कराई जाती है। जासूसों ने बाकायदा इसका रेट भी तय कर रखा है।

दो से पांच हजार रुपये में ये जासूस किसी भी फोर्स के मुख्य गेट पर खड़े होने वाले गार्ड व ऑपरेशन में लगी गाड़ियों के ड्राइवरों की निजी जानकारी एकत्रित करते हैं।


खासतौर से, महिला गार्ड की जानकारी पर ज्यादा फोकस किया जाता है। यह डिटेल मिलने के बाद फोर्स कर्मियों या उनके परिचितों को पाकिस्तान से फोन कर सूचना जुटाने का प्रयास होता है।

पाकिस्तानी उच्चायोग के दो कर्मियों आबिद हुसैन और मोहम्मद ताहिर को पिछले दिनों जासूसी करते हुए पकड़ा गया था, उनके साथ करीब दर्जनभर दूसरे कर्मी भी शामिल हैं। इन कर्मियों को अलग अलग जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इनमें कई कर्मचारी ऐसे भी हैं जो केवल 'जम्मू-कश्मीर डेस्क' पर काम करते हैं। पाकिस्तानी आईएसआई से इन्हें दिशा-निर्देश मिलते हैं। एनआईए के सूत्रों के मुताबिक, उच्चायोग के यही कथित जासूस 'जम्मू-कश्मीर' में आतंकवादियों को धन मुहैया कराते हैं।

इसके लिए एक लंबी चेन बनी हुई है। पाकिस्तान सहित खाड़ी के कई देशों से जो धन आता है, उसे उच्चायोग के जरिए ही घाटी में पहुंचाया जाता है। जांच एजेंसी ने तीन साल पहले टेरर फंडिंग केस में यह बात स्पष्ट तौर पर बताई थी कि पाकिस्तानी उच्चायोग से कश्मीर में बैठे आतंकियों के मददगार यानी अलगाववादी नेताओं तक धन पहुंचाया जाता है।

वहां से वह राशि आतंकियों को भेज देते हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी देवेंद्र सिंह, जो कि आतंकियों के साथ पकड़े गए थे, उनके मामले की कड़ियां भी अब उच्चायोग के जासूसों से जुड़ रही हैं।

इस केस में उच्चायोग कर्मी शफाकत ही नहीं, अपितु ऐसे कई लोग शामिल हैं। जांच एजेंसी जब इस केस की चार्जशीट दाखिल करेगी तो उन सभी के नाम भी सार्वजनिक होंगे।

हवाला में फंस सकते हैं पाकिस्तानी उच्चायोग के कई जासूस 

सूत्र बताते हैं कि इस जासूसी प्रकरण के बाद जांच एजेंसियों ने जब गहराई से मामले की पड़ताल की, तो कई दूसरे केस भी सामने आ गए। इन्हीं में से एक हवाला ट्रांजेक्शन का मामला भी है। उच्चायोग में बैठे कर्मचारी हवाला कारोबार में भी लगे हैं।

जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग केस के आरोपी जहूर अहमद शाह वाटाली ने पूछताछ में कई खुलासे किए थे। आईएसआई अधिकारी और पाकिस्तानी उच्चायोग, दोनों मिलकर हवाला ट्रांजेक्शन को मुकाम तक पहुंचाते थे।

इसके लिए कई फर्जी कंपनी और एनजीओ की मदद ली गई। विदेशों से पैसे ट्रांसफर करने वाली प्राइवेट एजेंसियां भी उच्चायोग के इस नापाक धंधे में शामिल बताई जाती हैं। इस बाबत जांच की जा रही है।

यह पता लगाया जा रहा है कि मुदस्सर इकबाल चीमा जैसे कितने लोग उच्चायोग के संपर्क में हैं। आरोप है कि चीमा कश्मीर में हुर्रियत के नेताओं को जहूर अहमद शाह वटाली की मदद से रुपये पहुंचाता था।



इस काम के बदले उसे कमीशन मिलता था। सूत्रों का कहना है कि उच्चायोग में आईएसआई के कर्मियों का बड़ा दल काम कर रहा है। यही वजह है कि जांच एजेंसियों की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद सरकार ने पाकिस्तान उच्चायोग में पचास फीसदी स्टाफ कम करने का आदेश दे दिया है।

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