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मद्रास हाईकोर्ट में सवाल: क्या लिव-इन में रहने वाली महिला पेंशन पाने की अधिकारी है?
Wed, 09 Jun 2021 09:59 PM IST
गौरव पाण्डेय
पीटीआई, चेन्नई
पीटीआई, चेन्नई
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 09 Jun 2021 09:59 PM IST
सार
क्या किसी व्यक्ति के साथ लिव-इन संबंध में रहने वाली महिला को उस व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके सेवानिवृत्ति और पेंशन संबंधी फायदों का अधिकार है जो उसकी दिवंगत पत्नी की ही बहन है? मद्रास उच्च न्यायालय में यह प्रश्न उठाया गया है और एकल पीठ ने इस मामले को फैसले के लिए वृहद पीठ के पास भेजने का फैसला किया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
कुंभकोणम में तमिलनाडु विद्युत उत्पादन और वितरण निगम (तैनजेडको) में कार्यरत रहे एस कलियापेरुमल का विवाह सुशीला से हुआ था और उन्होंने अपनी पत्नी को आधिकारिक दस्तावेजों में अपना नामित (नॉमिनी) घोषित किया था। सुशीला कैंसर से पीड़ित थीं तो उन्होंने अपनी बहन मलारकोडि को अपने पति से शादी करने की अनुमति दे दी थी।
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इसके बाद तीनों एक ही घर में दंपती के तीन बेटों और तीन बेटियों के साथ रह रहे थे। बाद में सुशीला का निधन हो गया और कलियापेरुमल ने मलारकोडि को 2015 में अपना कानूनी उत्तराधिकारी बनाने के लिए आवेदन किया। इसके लिए उनके बेटे और बेटियां सहमत थे।
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वहीं, विद्युत निगम की ओर से इस संबंध में संशोधन किए जाने से पहले ही उसी साल कलियापेरुमल की भी मृत्यु हो गई। लेकिन तैनजेडको ने कोई फैसला नहीं किया। इसलिए मलारकोडि की ओर से यह रिट याचिका दाखिल की गई है।
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न्यायमूर्ति एस वैद्यनाथन के समक्ष याचिका हाल ही में सुनवाई के लिए आई थी। उन्होंने इस पर अंतिम निर्णय के लिए मामले को वृहद पीठ के पास भेजने का फैसला किया। इसे लेकर एकल पीठ की ओर से रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि मुख्य न्यायाधीश के समक्ष इस मामले को रखा जाए ताकि फैसले के लिए पीठ का गठन किया जा सके।