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Hindi News ›   India News ›   Is there a Hindu-Muslim population imbalance in Jammu and Kashmir behind the revoke of Article 370

क्या जम्मू-कश्मीर में 370 खत्म करने का कारण हिंदू और मुस्लिम जनसंख्या असंतुलन है?

Mon, 05 Aug 2019 08:58 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली  Published by: जितेंद्र भारद्वाज Updated Mon, 05 Aug 2019 08:58 PM IST
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Is there a Hindu-Muslim population imbalance in Jammu and Kashmir behind the revoke of Article 370
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : ANI

मोदी सरकार ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 को खत्म कर दिया। इसके तुरंत बाद राजनीतिक, सैन्य एवं कूटनीतिक विशेषज्ञों के बयान आने लगे। किसी ने इस फैसले के पीछे आतंकवाद को सबसे बड़ा कारण बताया तो कोई इसे राजनीतिक मुद्दा कहा।

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कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अनुच्छेद 370 को खत्म करने के पीछे मुख्य मंशा जम्मू-कश्मीर में जनसंख्या असंतुलन को सुधारना है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में हिंदू आबादी करीब 36 लाख है, जबकि मुस्लिमों की संख्या 86 लाख।
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पिछले सप्ताह दिल्ली में हुई भाजपा कोर समिति की बैठक में शामिल जम्मू-कश्मीर राज्य इकाई के नेता का कहना है कि राज्य का संपूर्ण विकास 370 के चलते नहीं हो सका है। यह किसी से छिपा नहीं है कि घाटी में आतंकवाद को कौन समर्थन दे रहा है।
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अलगाववादी नेता क्या करते हैं, यह भी किसी भी छिपा नहीं है। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से पता चलता है कि सीमा पार के आतंकी संगठनों की मदद कौन करता है। पत्थरबाजों को भड़काने का काम कौन कर रहा है। एक ही धर्म के लोगों को नौकरियों में वरीयता मिलती है। यह सब हिंदू-मुस्लिमों के जनसंख्या असंतुलन का नतीजा है। 

जनगणना 2011 के अनुसार जम्मू-कश्मीर में विभिन्न समुदायों की आबादी                                                                       

क्षेत्र हिंदू मुस्लिम सिख इसाई बौद्ध
जम्मू 3364618 1799232 176635 22512 3093
कश्मीर घाटी 168833 6640957 55950 11857 730
लद्दाख 33223 127396 2263 1262 108761

इनके अलावा जम्मू-कश्मीर में जैन समुदाय के करीब चार हजार लोग रहते हैं। साथ ही 25 हजार से ज्यादा कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिनके धर्म का उल्लेख नहीं है।

11 लाख लोगों को अभी तक नहीं मिली है नागरिकता

रक्षा विशेषज्ञ कमर आगा कहते हैं, धारा-370 खत्म होने से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर नकेल कसने में मदद मिलेगी। साथ ही घाटी का विकास पहले से कहीं ज्यादा तेजी के साथ होगा। नए लोगों को वहां जाने का मौका मिलेगा। ऐसा नहीं है कि कश्मीर में रहने वाले सभी लोगों का एक समान विकास हुआ है।

गुर्जर और पहाड़ी जैसे कई समुदाय, जो विकास रेखा से अभी तक दूर रहे हैं, वे आज खुश हैं। करीब 11 लाख लोग वहां पर ऐसे हैं, जिन्हें राज्य की नागरिकता नहीं मिल सकी है। यह अलग बात है कि वे लोग कई दशकों से वहां पर रह रहे हैं।
धारा 370 खत्म होने के बाद अब इन लोगों को वहां की नागरिकता मिल जाएगी। सीमा के आसपास सुरक्षा बलों के रिटायर लोगों को बसाया जा सकता है। पंडितों की वापसी का रास्ता भी अब प्रशस्त हो जाएगा। कमर आगा ने कहा, जम्मू-कश्मीर के चार-पांच जिलों को छोड़ दें तो बाकी जगह के लोगों का अनुच्छेद-370 खत्म करने के लिए केंद्र सरकार को समर्थन रहा है।

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