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बड़ी उम्मीद से दिल्ली आए हैं ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ, भारत कर सकता है मदद

Wed, 15 Jan 2020 08:02 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 15 Jan 2020 08:02 PM IST
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Iran Foreign Minister Javad zarif said India can play a role in de-escalating tensions in Gulf
javad zarif with PM Modi - फोटो : Social Media
इसे भारत की बढ़ रही कूटनीतिक ताकत कहा जा सकता है कि ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ रायसीना डायलॉग में हिस्सा लेने दिल्ली आए हैं। मंगलवार को दिल्ली पहुंचे जावाद जरीफ का एक मकसद और भी है। वह चाहते हैं कि ईरान के साथ तनाव कम करने में भारत अपनी भूमिका निभाए।
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समझा जा रहा है कि ईरान के विदेश मंत्री अपने भारतीय समकक्ष सुब्रमण्यम जयशंकर से मुलाकात कर उनसे भी सहयोग की उम्मीद करेंगे। जवाद जरीफ ने इसी क्रम में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी बुधवार को चर्चा की।

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जवाद जरीफ से पहले भारत से कोशिश करने की अपील ईरान के भारत में राजदूत भी कर चुके हैं। बुधवार को जवाद जरीफ ने कहा कि भारत पहले से ही शांति का पक्षधर रहा है। जवाद का कहना है कि भारत खाड़ी देशों के साथ शांतिपूर्ण रिश्ते में अहम भूमिका निभा सकता है, क्योंकि एक महत्वपूर्ण पक्ष है।

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ईरान के लिए भारत की अहमियत?

ईरान के सैन्य कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी के अमेरिकी हमले में मारे जाने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच में हाई वोल्टेज तनाव है। लेकिन अभी खतरा टला नहीं है। खाड़ी के तमाम देशों से भी ईरान का तालमेल बहुत अच्छा नहीं है। वहीं भारत के खाड़ी देशों से अच्छे संबंध हैं।


ओमान, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, जार्डन समेत तमाम देशों से भारत का रिश्ता अच्छा है। भारत एक उदार, सबसे सौहार्दपूर्ण रिश्ते के लिए जाना जाता है। ईरान चाहता है कि भारत को शांति पहल में आगे आना चाहिए। खाड़ी देशों से ईरान के बेहतर संबंध की दिशा में प्रयास करना चाहिए।

गौरतलब है कि जार्डन के दिवंगत सुल्तान तटस्थ रहकर ईरान और अमेरिका के बीच में अच्छे संबंध की दिशा में मददगार थे। वह अन्य देशों से भी शांति स्थापित करके सहयोग से विकास की राह पर चलने की अपील करते थे। अब वह नहीं रहे।

दूसरे, पिछले दो दशक में भारत-अमेरिका संबंध ने नई ऊंचाई को छुआ है। दोनों देश रणनीतिक साझीदार के तौर पर आगे बढ़ चुके हैं। ईरान के रणनीतिकार भी मानकर चल रहे हैं कि अमेरिका के साथ युद्ध का रास्ता इतना आसान नहीं है। ऐसे में ईरान को भारत भी एक उपयुक्त सहयोगी देश लग रहा है।

भारत और ईरान

भारत और ईरान के बीच में कभी कटुतापूर्ण संबंध नहीं रहे हैं। कुछ समय पहले तक भारत, ईरान से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता था। भारतीय डीजल की रिफाइनरी ईरान के कच्चे तेल के लिए काफी उपयुक्त है। हम ईरान से कच्चा तेल आयात करके उसे डीजल के रूप में ईरान को भी देते थे।

हालांकि पिछले कुछ साल से अमेरिकी दबाव में भारत ने कच्चे तेल के आयात को बिल्कुल सीमित करके न के बराबर कर दिया है। फिर भी दोनों देशों के संबंध सौहार्दपूर्ण है। नई दिल्ली ने सेंट्रल एशिया तक सीधी पहुंच बनाने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मुहाने पर ईरान के चाबहार बंदरगाह को विकसित करने की मंशा दिखाई। ईरान ने भी इसका स्वागत किया और दोनों देश इस परियोजना पर आगे बढ़ गए हैं।

अयातुल्लाह खामेनेई  का यूपी कनेक्शन

ईरान एक शिया बाहुल देश है और भारत में शियाओं की तादाद भी अच्छी खासी है। यहां तक कहा जाता है कि ईरान के सर्वोच्च अयातुल्लाह खामेनेई के कुछ पूर्वजों का ताल्लुक भारत के उत्तर प्रदेश से भी है जो ईरान में जाकर खामेनेई में बस गए थे।



एक रिपोर्ट के मुताबिक अयातुल्लाह खामेनेई के दादा सैय्यद अहमद मसूवी उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले थे। 1830 के दशक में वह अवध के नवाब के साथ धार्मिक यात्रा पर इराक और फिर ईरान पहुंचे थे। जिसके बाद वे ईरानन के खामेनेई गांव में बस गए। उनके इंतकाल के बाद बाद की पीढ़ी ने खामेनेई को सरनेम के तौर पर प्रयोग करना शुरू कर दिया। 

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