IPS Rajeev Kumar: पश्चिम बंगाल के नए पुलिस मुखिया बने आईपीएस राजीव कुमार, विवादों और प्रशंसाओं से भरा है जीवन
कुमार 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। आईआईटी रूड़की से इन्होंने इंजीनियरिंग की है। उत्तरप्रदेश के मूल निवासी 2009 में पश्चिम बंगाल एसटीएफ के प्रमुख थे। वे कोलकाता पुलिस के आयुक्त, संयुक्त आयुक्त (विशेष कार्य बल) और महानिदेशक (सीआईडी) के रूप में भी काम कर चुके हैं।
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पश्चिम बंगाल को अपना नया पुलिस प्रमुख मिल गया है। आईपीएस राजीव कुमार पश्चिम बंगाल पुलिस के नए महानिदेशक बन गए हैं। आईपीएस कुमार का नाता विवादों और प्रशंसाओं से भरा हुआ है। कुमार को टीएमसी सरकार ने पश्चिम बंगाल पुलिस के नए महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक (डीजी और आईजीपी) के रूप में नियुक्त किया है। वर्तमान में कुमार राज्य आईटी विभाग के प्रधान सचिव के रूप में पदस्थ हैं। अधिकारी पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के पसंदीदा अधिकारी भी रह चुके हैं। बता दें, वे अपनी जांच और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी कौशल के लिए प्रसिद्ध हैं। चलिए अब जानते हैं आईपीएम कुमार के जीवन से जुड़ी बातों को…
कुमार 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। आईआईटी रूड़की से इन्होंने इंजीनियरिंग की है। उत्तरप्रदेश के मूल निवासी 2009 में पश्चिम बंगाल एसटीएफ के प्रमुख थे। वे कोलकाता पुलिस के आयुक्त, संयुक्त आयुक्त (विशेष कार्य बल) और महानिदेशक (सीआईडी) के रूप में भी काम कर चुके हैं। कोलकाता पुलिस की एसटीएफ ने माओवादी नेताओं-अपराधियों के खिलाफ अपने अभियानों के लिए कुख्याति प्राप्त की। 2009 से 2011 तक माओवादी आंदोलन को कमजोर करने में एसटीएफ की अहम भूमिका रही थी।
पहला विवाद- साल 2009
देश में आम चुनाव का माहौल था। इस दौरान तृणमूल कांग्रेस ने कोलकाता पुलिस के एसटीएफ प्रमुख पर आरोप लगाया कि वे तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी के फोन की निगरानी कर रहे हैं। वाम सरकार के साथ सांठ-गांठ के भी आरोप लगाए गए थे।
दूसरा विवाद- 2019
सारदा चिटफंड मामले की जांच आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार को सौंपा गया। इस दौरान ममता बनर्जी ने ही सीबीआई जांच में इनकी भूमिका का विरोध किया था।