फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   IPS officers close to the central government only get the benefit of post retirement jobs

वफादारी का इनाम: सरकार के चहेते 'आईपीएस' अफसरों में मची पोस्ट रिटायरमेंट पद लेने की होड़, पढ़ें- कैसे मिलता है ये खास ओहदा

Thu, 27 May 2021 06:39 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 27 May 2021 06:39 PM IST
सार

बीएसएफ के पूर्व एडीजी संजीव कृष्ण सूद कहते हैं, केवल कुछ ही अफसर 'आंखों का तारा' कैसे बन जाते हैं। दूसरे अधिकारी भी तो अच्छा काम करते हैं। क्या 'एनएसए' से 'सीवीसी' तक पहुंचने की सीढ़ी का राज केवल 'आईपीएस' के पास होता है। देश में अच्छे कैडर अफसर भी रहे हैं। उनके पास भी योग्यता है, लेकिन उन्हें तो कभी मौका नहीं मिलता...

विज्ञापन
IPS officers close to the central government only get the benefit of post retirement jobs
गृह मंत्रालय - फोटो : ANI (File)

विस्तार

केंद्र सरकार के चहेते आईपीएस अफसरों का रिटायरमेंट जब नजदीक आता है तो ये कयास लगाए जाने लगते हैं कि अब इन्हें सरकार में कौन सा ओहदा मिलेगा। कई अफसर ऐसे होते हैं, जिन्हें कुछ माह या दो-तीन सप्ताह पहले ही यह इशारा कर दिया जाता है कि एलजी, एडवाइजर या किसी आयोग का चेयरमैन/सदस्य बनने के लिए तैयार रहें। कुछ आईपीएस को सेवा विस्तार देकर इनाम दे दिया जाता है।

विज्ञापन


अगले दो-तीन माह के दौरान केंद्र सरकार में कई आईपीएस रिटायर होने जा रहे हैं। इन्हें भरोसा है कि इनकी मेहनत एवं वफादारी का इनाम अवश्य मिलेगा। मौजूदा सरकार में एनएसए से लेकर सीवीसी तक में आईपीएस लगाए गए हैं। यूपीएससी और दूसरे आयोगों में भी रिटायर्ड आईपीएस को समायोजित किया जाता रहा है। बीएसएफ के पूर्व एडीजी संजीव कृष्ण सूद कहते हैं, केवल कुछ ही अफसर 'आंखों का तारा' कैसे बन जाते हैं। दूसरे अधिकारी भी तो अच्छा काम करते हैं। क्या 'एनएसए' से 'सीवीसी' तक पहुंचने की सीढ़ी का राज केवल 'आईपीएस' के पास होता है। देश में अच्छे कैडर अफसर भी रहे हैं। उनके पास भी योग्यता है, लेकिन उन्हें तो कभी मौका नहीं मिलता। वजह, सारी नौकरी तो फील्ड में ड्यूटी देकर गुजारते हैं, ऐसे में उन्हें 'आंखों का तारा' बनने की फुर्सत ही नहीं मिलती। केंद्र सरकार ने गुरुवार को रॉ चीफ सामंत गोयल और आईबी चीफ अरविंद कुमार को एक साल का सेवा विस्तार दे दिया है। इन्हें अगले माह रिटायरमेंट होना था।

विज्ञापन

प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खास रहे हैं वाईसी मोदी

एनआईए के डायरेक्टर जनरल वाईसी मोदी 31 मई को रिटायर हो रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि वे कहीं तो अवश्य समायोजित होंगे। सीबीआई प्रमुख बनने की दौड़ में शामिल वाईसी मोदी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की गुड बुक में रहे हैं। वजह, वाईसी मोदी सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी के सदस्य थे, जिसे 2002 के गुजरात दंगों की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस टीम ने नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दे दी थी। अब उन्हें उम्मीद है कि वे एडवाइजर के पद पर नियुक्ति पा सकते हैं।

आईटीबीपी के महानिदेशक एसएस देसवाल भी 31 अगस्त को रिटायर होंगे। वे भी यह आशा लगाए बैठे हैं कि उन्हें रिटायरमेंट के बाद कोई तो सरकारी ओहदा मिलेगा। उन्हें गृह मंत्री अमित शाह का विश्वास पात्र माना जाता है। आईटीबीपी के महानिदेशक रहते हुए उन्हें एक साथ तीन-चार बलों का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था। इनका नाम भी सीबीआई निदेशक के चयन के लिए भेजी गई दर्जनों आईपीएस अधिकारियों की सूची में शामिल रहा है।

आईबी और रॉ चीफ के समायोजन पर था खास जोर

बीएसएफ के डीजी राकेश अस्थाना भी 31 अगस्त को रिटायर हो रहे हैं। वे भी सीबीआई प्रमुख में दौड़ में आगे रहे हैं। चूंकि उनकी सेवानिवृत्ति में छह माह से कम समय बचा है, इसलिए उनका नाम सीबीआई प्रमुख की फाइनल सूची से बाहर हो गया। कहा जा रहा था कि वे रॉ सेक्रेटरी के पद के लिए ट्राई कर सकते हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने गुरुवार को रॉ सेक्रेटरी सामंत गोयल का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया है। उनके साथ ही अगले माह रिटायर हो रहे आईबी प्रमुख अरविंद कुमार, जिन्हें अहम पद पर समायोजित करने की बात हो रही थी, उन्हें भी अब एक साल का सेवा विस्तार दे दिया गया है। अगर इन दोनों आईपीएस को सेवा विस्तार नहीं मिलता तो उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय में एडवाइजर पद पर लगाया जाना तय था।

खास बात है कि ऐसा पहली बार हुआ है, जब इन दोनों एजेंसियों के प्रमुखों को एक-एक साल का सेवा विस्तार दे दिया गया था। इनसे पहले आईबी चीफ राजीव जैन और रॉ चीफ अनिल धस्माना को भी छह माह का सेवा विस्तार मिला था। दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव भी अगले माह रिटायर हो रहे हैं। उनकी नजर एनआईए प्रमुख के पद पर है। इन्हें सीआरपीएफ से दिल्ली दंगों के दौरान दिल्ली पुलिस में लाया गया था। यह अलग बात है कि पिछले दिनों ही इन्हें पुलिस आयुक्त का पत्र सौंपा गया है। हालांकि वे दिल्ली दंगों के दौरान से लेकर अभी तक आयुक्त पद पर अस्थायी तौर से कार्य कर रहे थे।

पहले भी केंद्र में पावरफुल पोस्ट पर रहे हैं आईपीएस

पूर्व आईपीएस अजीत डोभाल मौजूदा एनएसए हैं। उनके कार्यकाल को दूसरी बार बढ़ाया गया है। के विजय कुमार पिछले दस वर्षों से केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ बतौर एडवाइजर काम कर रहे हैं। उन्हें जम्मू कश्मीर में भी राज्यपाल/एलजी का एडवाइजर लगाया गया था। एनआईए के पूर्व डीजी शरद कुमार को सीवीसी बनाया गया है। दिल्ली पुलिस के पूर्व सीपी बीएस बस्सी यूपीएससी मेंबर हैं। हाल ही में रिटायर हुए सीआरपीएफ के पूर्व डीजी डॉ. एपी महेश्वरी, पुडुचेरी एलजी के सलाहकार हैं। सीआरपीएफ के पूर्व डीजी आरआर भटनागर व बीएसएफ के पूर्व डीजी केके शर्मा को भी समायोजित किया गया है। पूर्व रॉ चीफ अनिल धस्माना को एनटीआरओ निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सीबीआई के पूर्व निदेशक रहे आरके राघवन, जिन्होंने बोफोर्स घोटाला, मैच फिक्सिंग मामला और 2002 के गुजरात दंगे की जांच की निगरानी की है, उन्हें साइप्रस में राजदूत लगा दिया गया।

मोदी को क्लीन चिट देने वाले अफसरों को मिल चुका है ओहदा

  • पूर्व आईपीएस के वेंक्टेशम भी आरके राघवन की अध्यक्षता में गठित एसआईटी के सदस्य रहे हैं। उन्होंने बीच में ही सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दिया कि वे पुलिस के लिए कुछ करना चाहते हैं, इसलिए उन्हें जांच से बाहर कर दिया जाए। बाद में उन्हें नागपुर का पुलिस आयुक्त लगाया गया था।
  • गीता जौहरी भी इसी टीम का हिस्सा रही हैं। उन पर कई तरह की अनियमितता बरतने के आरोप लगे थे। उन्होंने शोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले की जांच की थी। सुप्रीम कोर्ट ने ये केस सीबीआई को सौंप दिया था। सीबीआई ने कहा कि जौहरी ने इस मामले की जांच सही दिशा में नहीं की है। इन आरोपों के बावजूद उन्हें गुजरात का डीजीपी और जीपीएचसी का प्रभारी बनाया गया था।
  • पूर्व आईपीएस पीसी पांडे 2008 में गुजरात के डीजीपी बनाए गए थे। उनको तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का बेहद भरोसा हासिल था। जब वे 2009 में रिटायर हुए तो उन्हें एसीबी का प्रमुख लगा दिया। उसके बाद जीपीएचसी का प्रभारी बना दिया।

एसके सूद कहते हैं, जो अफसर नियम से बाहर जाकर सरकार को कुछ फायदा पहुंचाने का प्रयास करते हैं, उन्हें पोस्ट रिटायरमेंट पद मिल जाता है। आखिर सेवा विस्तार किस लिए दिया जाता है। ये भी एक तरह से इनाम ही तो है। जब दूसरे अफसर मौजूद हैं तो उन्हें मौका दिया जाए। चहेतों को सेवा विस्तार देकर बाकी अफसरों के अवसर खत्म कर दिए जाते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed