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कठुआ गैंगरेप: आरोपी सांजी राम का बड़ा खुलासा, बताया- क्यों रची थी बच्ची की रेप और हत्या की साजिश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कठुआ
Updated Fri, 27 Apr 2018 09:38 PM IST
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जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ साल की बच्ची से हुए गैंगरेप और हत्या के मामले में कई नई जानकारियां सामने आईं हैं। बच्ची के साथ हुए गैंगरेप और हत्या के प्रमुख आरोपियों में से एक सांजी राम ने पुलिस से हुई पूछताछ में बताया है कि उसे खुद भी बच्ची के अपहरण के चार दिन बाद उससे बलात्कार होने की बात पता चली थी। पुलिसिया पूछताछ में सांजी राम ने कबूला है कि बलात्कार में अपने बेटे के भी शामिल होने का पता चलने के बाद ही उसने बच्ची की हत्या करने की योजना बनाई थी।
जांचकर्ताओं ने बताया कि 10 जनवरी को अपह्रत बच्ची से उसी दिन सबसे पहले सांजी राम के नाबालिग भतीजे ने बलात्कार किया था। बच्ची का शव 17 जनवरी को जंगल से बरामद हुआ। इस पूरे मामले में सांजीराम के नाबालिग भतीजे के अलावा सांजी राम, उसके बेटे विशाल और पांच अन्य को इस मामले में आरोपी बनाया गया है। पूरे मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने बताया कि बच्ची को एक छोटे से मंदिर ‘देवीस्थान’ में रखा गया था, जिसका सेवादार भी सांजी राम ही है।
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जांचकर्ताओं ने बताया कि 10 जनवरी को अपह्रत बच्ची से उसी दिन सबसे पहले सांजी राम के नाबालिग भतीजे ने बलात्कार किया था। बच्ची का शव 17 जनवरी को जंगल से बरामद हुआ। इस पूरे मामले में सांजीराम के नाबालिग भतीजे के अलावा सांजी राम, उसके बेटे विशाल और पांच अन्य को इस मामले में आरोपी बनाया गया है। पूरे मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने बताया कि बच्ची को एक छोटे से मंदिर ‘देवीस्थान’ में रखा गया था, जिसका सेवादार भी सांजी राम ही है।
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मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने बताया कि हिंदू बाहुल्य वाले इस इलाके से घुमंतू समुदाय के लोगों को डराने और हटाने के लिए यह पूरी साजिश रची गई थी। वहीं सांजी राम की तरफ से वकील अंकुर शर्मा ने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। उसने कहा कि वह अपने बचाव के लिए कौन सी रणनीति अपना रहे हैं वह बता नहीं सकते है।
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ऐसे खुली हत्या की परत दर परत
जांच कर रहे अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान सांजी राम ने बताया कि उसे इस घटना की जानकारी 13 जनवरी को मिली थी जब उसके भतीजे ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था। उसने जांच अधिकारियों को यह भी बताया कि उसने 'देवीमंदिर' में पूजा की और भतीजे को प्रसाद घर ले जाने को कहा, लेकिन उसके देरी करने पर उसने गुस्से में उसे पीट दिया।
पूछताछ में यह भी पता चला कि नाबालिग ने उसे मारे जाने की वजह के बारे में उसने सोचा कि उसके चाचा को लड़की से बलात्कार किए जाने की बात पता चल गई है और उसने खुद ही सारी बात सांजी राम को बता दी। उन्होंने बताया कि उसने अपने चचेरे भाई विशाल (सांजी राम का बेटा) को इस मामले में फंसाया और कहा कि दोनों ने मंदिर के अंदर उससे बलात्कार किया।
इन सभी खुलासे के बाद सांजी राम ने तय किया कि बच्ची को अब मार दिया जाना चाहिए, ताकि घुमंतू समुदाय को भगाने के अपने मकसद को हासिल किया जा सके लेकिन तब तक बच्ची की बात समाज में फैल चुकी थी। वह बच्ची को हीरानगर नहर में फेंकना चाहते थे, लेकिन गाड़ी का इंतजाम नहीं हो पाया और वह बच्ची को वापस मंदिर ले आए।
फिर सांजी राम ने 14 जनवरी को बच्ची की हत्या कर दी क्योंकि वह अपने बेटे पर किसी तरह आरोप नहीं चाहता था। फिर उसने बेटे को इस मामले में बेटे को बचाने के लिए भतीजे ने जुर्म स्वीकार कराया। उसने भतीजे को यह विश्वास दिलाया कि वह उसे जल्द ही जेल से निकाल लेगा लेकिन तब तक बात मीडिया में आ चुकी थी और मामला तूल पकड़ चुका था।
पूछताछ में यह भी पता चला कि नाबालिग ने उसे मारे जाने की वजह के बारे में उसने सोचा कि उसके चाचा को लड़की से बलात्कार किए जाने की बात पता चल गई है और उसने खुद ही सारी बात सांजी राम को बता दी। उन्होंने बताया कि उसने अपने चचेरे भाई विशाल (सांजी राम का बेटा) को इस मामले में फंसाया और कहा कि दोनों ने मंदिर के अंदर उससे बलात्कार किया।
इन सभी खुलासे के बाद सांजी राम ने तय किया कि बच्ची को अब मार दिया जाना चाहिए, ताकि घुमंतू समुदाय को भगाने के अपने मकसद को हासिल किया जा सके लेकिन तब तक बच्ची की बात समाज में फैल चुकी थी। वह बच्ची को हीरानगर नहर में फेंकना चाहते थे, लेकिन गाड़ी का इंतजाम नहीं हो पाया और वह बच्ची को वापस मंदिर ले आए।
फिर सांजी राम ने 14 जनवरी को बच्ची की हत्या कर दी क्योंकि वह अपने बेटे पर किसी तरह आरोप नहीं चाहता था। फिर उसने बेटे को इस मामले में बेटे को बचाने के लिए भतीजे ने जुर्म स्वीकार कराया। उसने भतीजे को यह विश्वास दिलाया कि वह उसे जल्द ही जेल से निकाल लेगा लेकिन तब तक बात मीडिया में आ चुकी थी और मामला तूल पकड़ चुका था।