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RBI गर्वनर का खास इंटरव्यू , वित्तीय लेन-देन और अर्थव्यवस्था पर दिए बेबाकी से जवाब

Mon, 18 Jul 2016 06:36 AM IST
शिशिर चौरसिया/ अमर उजाला, संवाददाता
शिशिर चौरसिया/ अमर उजाला, संवाददाता Updated Mon, 18 Jul 2016 06:36 AM IST
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Interview of RBI Governor, Raghuram Rajan
- फोटो : getty

प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत 22 करोड़ से भी ज्यादा लोगों का बैंक खाता खुलने के बाद भी अभी गांवों में बैंकों की पर्याप्त उपस्थिति नहीं हो पाई है। लेकिन रिजर्व बैंक का कहना है कि शीघ्र ही स्थिति में बदलाव होगा, क्योंकि कुछ बैंक मोबाइल शाखा ला रहे हैं। इसके अलावा रिजर्व बैंक माइक्रो और मिनी ब्रांच की परिभाषा को तय करने की दिशा में काम कर रहा है। वित्तीय लेन-देन और अर्थव्यवस्था से जुड़े सवालों के साथ अमर उजाला के संवाददाता शिशिर चौरसिया ने रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन से विस्तृत बातचीत की। पेश है इस बातचीत के अंश-

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हम हर गांव में बैंक की शाखा नहीं खोल सकते हैं

Interview of RBI Governor, Raghuram Rajan
रघुराम राजन - फोटो : ANI

जन धन योजना में करोड़ों बैंक खाते खोले गए, लेकिन आज भी ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को बैंक शाखा या एटीएम की सेवा लेने के लिए मीलों पैदल चलना पड़ता है। उनके घर के आस-पास बैंक या एटीएम कब खुलेंगे?

हम हर गांव में बैंक की शाखा नहीं खोल सकते हैं। यह बेहद खर्चीला है। लेकिन मोबाइल बैंकिंग के जरिए इसका हल ढूंढा जा सकता है। कुछ बैंक मोबाइल शाखा ला रहे हैं, जो गांव-गांव जाएगा। इसका समय बंधा रहेगा कि अमुक गांव में इतने बजे से इतने बजे और अमुक गांव में इतने बजे से इतने बजे तक इसकी सेवा मिलेगी। इसके साथ ही हम माइक्रो और मिनी बैंक शाखा की परिभाषा तय करने में लगे हैं। लेकिन हमें लगता है कि हमें तकनीक के साथ आगे बढ़ना चाहिए। हमने पोस्टल पेमेंट बैंक के लिए लाइसेंस दिया है। 

डाकघरों का विस्तार गांव-गांव में है और इसके जरिए ढेर सारे गांवाें में बैंकिंग सेवा मिलने लगेगी। वहां पैसे जमा करें, पैसे निकालें। इसके अलावा ढेर सारी मोबाइल फोन कंपनियां इस क्षेत्र में आ रही हैं। लोग मोबाइल कियोस्क के जरिए पैसे का लेन-देन कर सकते हैं। औसतन मोबाइल कंपनी के डेढ़ लाख मोबाइल कियोस्क हैं, जिसमें वे मोबाइल कार्ड बेचते हैं। 

मुझे लगता है कि ये डेढ़ लाख मोबाइल कियोस्क गेम चेंजर होंगे। इसी महीने यूनिवर्सल पेमेंट इंटरफेस आ रहा है। इससे किसी भी बैंक की शाखा से किसी व्यक्ति की दूसरे बैंक के खाते में धन का हस्तांतरण हो सकता है। यदि मैं गांव में हूं तो बिना किसी शाखा में गए पैसे निकाल सकता हूं, किसी को भेज सकता हूं, भुगतान कर सकता हूं। बस इंटरफेस का सहारा लेना होगा। शेष काम नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) कर देगा। हम इस दिशा में काम कर रहे हैं कि नकद धन राशि की आवश्यकता घटे। यदि कोई व्यक्ति इलेक्ट्रॉनिक तरीके से धन हस्तांतरण या भुगतान करना चाहे तो यूनिवर्सल पेमेंट इंटरफेस मदद कर सकता है।

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हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमने लगातार दो साल तक सूखा झेला है

Interview of RBI Governor, Raghuram Rajan

वैश्विक अर्थव्यवस्था की चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की बड़ी चुनौतियां क्या हैं। रिजर्व बैंक के लिए आप क्या चुनौती देखते हैं? 

पिछले कुछ समय से चुनौतियां लगभग समान हैं। हमलोग इस समय चुनौतियों से उबर रहे हैं, लेकिन इसी दौरान हमारे पास ढेर सारे अवसाद भी हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमने लगातार दो साल तक सूखा झेला है। ऊपर से अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था भी कमजोर ही है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था से भी हमें कई झटके मिल रहे हैं, जैसे कि ब्रेग्जिट। इसलिए मैं कहता हूं कि भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन भरोसेमंद है। इस साल बेहतर मानसून की भविष्यवाणी की गई है। मानसून का असर दिखने भी लगा है, इसलिए आशा है कि इस साल बेहतर मानसून रहेगा।

इससे बेहतर धारणा बन सकती है, खास कर ग्रामीण क्षेत्र में। ऐसा होने पर ग्रामीण क्षेत्र में मांग तेजी से बढ़ेगी, ग्रामीण अंचल के उद्योग को बल मिलेगा। इन सबके समन्वित असर से मांग तेजी से बढ़ेगी और हमारी आकांक्षा पूरी होगी।

हमारी यही आशा है। हालांकि चुनौतियों से सुधार की आवश्यकता भी बढ़ रही है और यह जरूरी भी है। काफी चर्चा हो रही है कि संसद के इसी सत्र में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक पारित हो जाएगा। यह एक बेहतर कदम है। जहां तक रिजर्व बैंक की बात है तो कई मसलों पर हम भी काम कर रहे हैं, ताकि ढांचागत सुधार के कदमों को तेज कर सकें। देखिए, हम कितना कर पाते हैं।

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यह सब जो भी चर्चा चल रही है, उसका आर्थिक आधार नहीं है

Interview of RBI Governor, Raghuram Rajan

वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमजोरी और भारतीय अर्थव्यवस्था में विकास को बरकरार रखने की चुनौती के बीच ब्याज दर कुछ कम रखने की राह में रिजर्व बैंक को रोड़ा बताया जाता है। आप क्या कहेंगे?
यह सब जो भी चर्चा चल रही है, उसका आर्थिक आधार नहीं है। हमने देखा कि पिछले सप्ताह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई की दर 5.8 फीसदी रही थी। हमारी नीतिगत दर 6.5 फीसदी है। मुझे नहीं लगता है कि हम इस मामले में रोड़ा हैं। मैं ऐसी बातों को ज्यादा तवज्जो नहीं देता।

पिछले साल जिस मौद्रिक नीति फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर समझौता हुआ, उसके लक्ष्य की कोई समीक्षा हो रही है?
मेरे हिसाब से देखें तो सरकार ने इस क्षेत्र में अपना लक्ष्य घोषित कर दिया है और यह सभी के सामने है।

समीक्षा होगी?
इस पर सरकार को मंशा जतानी है और उसे ही अधिसूचित करना है। लेकिन जो घोषित है, वह तो सबके सामने है।

जैसे-जैसे मानसून आगे बढ़ रहा है, वैश्विक अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है

Interview of RBI Governor, Raghuram Rajan

इस साल बेहतर मानसून की भविष्यवाणी है। कई केन्द्रीय मंत्रियों ने 8 फीसदी विकास दर का लक्ष्य हासिल होने की बात कही है। आपकी क्या राय है?
कोई दावे के साथ यह नहीं कह सकता है कि अर्थव्यवस्था की विकास दर यह है और यह रहेगी। हमने पिछली बार 7.6 फीसदी की विकास दर का अनुमान लगाया था। जैसे-जैसे मानसून आगे बढ़ रहा है, वैश्विक अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है, स्पष्ट तौर पर अंतर पता चलेगा। मुझे लगता है कि कभी-कभी हम किसी खास ग्रोथ नंबर पर अति उत्साही हो जाते हैं। हमारा ध्यान काम पर होना चाहिए ताकि विकास दर तेज और टिकाऊ हो सके। इसके लिए माइक्रो स्टेबिलिटी जरूरी है। इसी के लिए हम ढांचागत सुधार (स्ट्रक्चरल रिफॉर्म) पर जोर दे रहे हैं, ताकि विकास दर बढ़े। मेरे हिसाब से किसी खास नंबर पर जोर देने के बजाय रिफॉर्म पर टिके रहना जरूरी है।

एक बार फिर से महंगाई दर बढ़ रही है। आपके उत्तराधिकारी के लिए क्या संदेश है?
इसके लिए अगली मौद्रिक नीति का इंतजार कीजिए।

आपके पूर्ववर्ती गवर्नर ने एक पुस्तक लिखी है, जिसमें कहा गया है कि यदि आप सरकार की बात नहीं मानते तो आपको कीमत चुकानी होगी। क्या इस तरह की कोई पुस्तक आप भी लिखेंगे?
फिलहाल इस विषय पर कोई पुस्तक लिखने का मेरा कोई इरादा नहीं है। मैं अकादमिक विषयों पर ही पुस्तक लिखूंगा।

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