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अमर उजाला विशेष: योग का मेडिकल एविडेंस ट्रायल, एम्स ने ढूंढा पीठ दर्द का इलाज, जर्नल में खूब वाहवाही
Mon, 21 Jun 2021 06:10 AM IST
सुरेंद्र जोशी
आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली
आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Mon, 21 Jun 2021 06:10 AM IST
सार
केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग ने फंड देकर एम्स में योग का मेडिकल एविडेंस ट्रायल कराया है। इसमें योग के माध्यम से पीठ का दर्द दूर करने में कामयाबी मिली।
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back pain
- फोटो : self
विस्तार
कुछ दिनों देश में पहले ही एलोपैथी बनाम भारतीय पुरातन चिकित्सा पद्धति को लेकर जबरदस्त हल्ला मचा था। एक सवाल यह भी था कि भारतीय पुरातन चिकित्सा पद्धति से इलाज के वैज्ञानिक प्रमाण क्या हैं? इसी बीच दिल्ली एम्स के चिकित्सकों ने योग के माध्यम से पीठ दर्द का ऐसा नुस्खा ढूंढा, जिसका देश-दुनिया के सबसे प्रमुख मेडिकल जर्नल में खूब वाहवाही हुई। इसे केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने फंड भी दिया था। इसका मकसद पुरातन चिकित्सा पद्धति के माध्यम से गंभीर रोगों पर वैज्ञानिक तथ्यों के साथ इलाज कर लोगों को नई जिंदगी देना है।
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100 मरीजों पर किया गया शोध
दिल्ली एम्स के फिजियोलॉजी विभाग में एडिशनल प्रोफेसर डॉ रेनू भाटिया, डॉ राजकुमार और फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन विभाग के डॉक्टर श्रीकुमार वी ने पीठ के निचले हिस्से में होने वाले वर्षों पुराने दर्द पर योग के माध्यम से शोध करना शुरू किया। इस शोध के दौरान 100 मरीजों को चुना गया। जिनकी उम्र 50 साल से अधिक थी। इन मरीजों को बीते कई सालों से पीठ के निचले हिस्से में दर्द होता था। जो पैरों तक जाता था।
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विशेष योग क्रियाएं कराई गईं
शोध करने वाले चिकित्सकों ने बताया इन मरीजों को कुछ विशेष योग क्रियाओं को कराया गया। ये योग क्रियाएं ऐसी थीं, जिनसे पीठ दर्द में एक माह में ही राहत मिलना शुरू हो गई। चूंकि दर्द पुराना था और एक महीने के भीतर इस बात का आकलन करना मुश्किल था कि योग के माध्यम से ही उनके दर्द में कमी हुई है या अन्य दवाओं से, इसलिए इन मरीजों पर अगले कुछ दिनों तक और योग क्रियाएं कराई गईं।
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इसके बाद पाया गया कि न सिर्फ मरीजों में दर्द कम हुआ, बल्कि इस बात की पुष्टि की गई कि दर्द के जो कारण थे, उनमें भी परिवर्तन देखा गया। यह भी पाया गया जिन कार्टिकल के बड़े होने से दर्द होता था, वह भी योग के माध्यम से कम हुए।
छह माह चला शोध, सत्यम प्रोजेक्ट से मिला फंड
एम्स के फिजियोलॉजी डिपार्टमेंट में तकरीबन छह महीने तक चले मरीजों के इस शोध को साइंस एंड टेक्नोलॉजी ऑफ योगा एंड मेडिटेशन (सत्यम) प्रोजेक्ट की ओर से योग के माध्यम से दूर होने वाले रोग के वैज्ञानिक प्रमाण के लिए फंड दिया गया था।
'जर्नल ऑफ मेडिकल साइंस एंड क्लिनिकल रिसर्च' में प्रकाशित
योग के माध्यम से दूर होने वाली इस बीमारी पर किए गए शोध को दुनिया के प्रमुख मेडिकल जर्नल 'जर्नल ऑफ मेडिकल साइंस एंड क्लिनिकल रिसर्च' में प्रकाशित भी किया गया। शोध करने वाले चिकित्सकों का कहना है कि कार्टिकोमोटर की वजह से बढ़े होने वाले दर्द को योग चिकित्सा के माध्यम से दूर करने पर यह चिकित्सकीय शोध पहला वैज्ञानिक प्रमाण है।
योगा प्रोटोकॉल भी तैयार
चिकित्सकों का कहना है ना सिर्फ देश बल्कि पूरी दुनिया में इसके माध्यम से पीठ के निचले हिस्से के दर्द को दूर किया जा सकता है। भविष्य में इस इलाज को पूरे देश और दुनिया के अलग-अलग सेंटर्स में किया जा सके इसके लिए शोध करने वाली टीम ने एम्स के 'पेन रिसर्च एंड टीएमएस लैबोरेटरी' में योगा प्रोटोकोल भी तैयार किया है। उसी आधार पर भविष्य में इलाज किया जा सकेगा।