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अयोध्या से अमेरिका तक : वाशिंगटन पोस्ट ने कहा, मोदी की जीत के रूप में देखा जाएगा ये फैसला

Sun, 10 Nov 2019 06:06 AM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Sun, 10 Nov 2019 06:06 AM IST
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International media covered Supreme Court verdict on Ayodhya case
अयोध्या - फोटो : amar ujala

वर्षों पुराने अयोध्या-बाबरी मस्जिद विवाद पर देश की सर्वोच्च अदालत के फैसले से जुड़ी खबरें दुनियाभर के मीडिया में प्रमुखता से ऑनलाइन संस्करणों में प्रकाशित हुई हैं। अधिकतर अखबारों ने फैसले की तारीफ की है। 

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मंदिर के लिए रास्ता निकला : द न्यूयॉर्क टाइम्स

भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने देश की सबसे पुरानी धार्मिक साइट पर चल रहे कानूनी विवाद में हिंदू मंदिर के निर्माण के लिए एक रास्ता निकाल लिया है। सबसे अच्छा यह हुआ है कि बहुसंख्यक बहुमत वाली सरकार के बजाय अदालत ने इस मसले पर अपना तटस्थ रुख सामने रखा। अदालत ने मुस्लिम समुदाय को भी वैकल्पिक जमीन मुहैया कराने के आदेश दिए हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि दोनों ही पक्षों की दलीलों को सुनने और एएसआई द्वारा रखे गए तथ्यों के आधार पर यह फैसला हुआ है। इस फैसले को लेकर मुस्लिमों को डर था कि वे देश में द्वितीय श्रेणी के नागरिक बन जाएंगे लेकिन फैसला तटस्थ रहा।

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वर्षों की लड़ाई के बाद फैसला : वाशिंगटन पोस्ट

एक दिन पहले ही अपने ओप-एड में राणा अय्यूब की अयोध्या मामले पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद अखबार ने सुप्रीम फैसले की रिपोर्ट जस की तस अपनी वेबसाइट पर दी है। अखबार ने लिखा, अदालत ने फैसला दिया है कि ध्वस्त मस्जिद स्थल पर हिंदू मंदिर बन सकता है। वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद यह एक ऐतिहासिक फैसला है जिसे हिंदू और मुसलमान दोनों ही समुदायों ने स्वीकार करने की बात कही थी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बड़ी जीत के रूप में भी देखा जाएगा क्योंकि हाल ही में मई माह में उन्हें जो जनादेश मिला है उसमें यह भी एक मुद्दा शामिल था।

हिंदुओं को सौंपा विवादित स्थल 

विवादित स्थल को भारत की शीर्ष अदालत ने हिंदुओं को सौंप दिया है। अदालत ने ट्रस्ट बनाने और मुस्लिमों को वैकल्पिक जमीन देने को भी कहा है। यह फैसला कुछ लोगों के लिए अच्छा या कुछ के लिए बुरा हो सकता है लेकिन यह एक ऐतिहासिक दिन रहा और इस फैसले का सभी ने सम्मान किया। इस फैसले को सभी ने स्वागत योग्य बताया।

राजनीतिक-सामाजिक परिदृश्य को दिशा देगा

अमेरिकी मीडिया ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना करते हुए कहा है कि इससे भारत के राजनीतिक-सामाजिक परिदृश्य को नई दिशा मिलेगी। वॉल स्ट्रीट जर्नल समेत ज्यादातर अमेरिकी मीडिया ने सर्वसम्मति से लिए गए इस फैसले को प्रमुखता दी। कानून-व्यवस्था की पर्याप्त व्यवस्था की भी अमेरिकी मीडिया ने सराहना की। 

सामुदायिक संघर्ष पैदा हो सकता है : डॉन

शीर्ष अदालत ने विवादित स्थल मंदिर निर्माण के लिए हिंदुओं को सौंप दिया है। अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि 460 साल पुरानी बाबरी मस्जिद का गिराया जाना कानून और व्यवस्था का पूरी तरह से उल्लंघन था। फैसले पर मुस्लिम पक्ष के वकील ने असंतोष जताया है।

कड़ी सुरक्षा में आया फैसला : येरुशलम पोस्ट

भारतीय शीर्ष अदालत ने आखिरकार वही फैसला दिया जो ऐतिहासिक तथ्यों ने साबित किया। उसने विवादित स्थल हिंदुओं को सौंप दिया। इससे पहले देश और उत्तर प्रदेश में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाई गई ताकि कहीं कोई अप्रिय घटना न हो। इस फैसले का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पूरे देश ने सम्मान किया है। 

गुंबद की जगह हिंदू पक्ष को : बीबीसी

अयोध्या पर भारत में एक बड़ा फैसला आया है। बाबरी मस्जिद के गुंबद की जगह हिंदू पक्ष को सुप्रीम कोर्ट ने सौंप दी है। इस तरह एक बड़े विवाद का 40 दिनों तक लगातार चली सुनवाई के बाद पटाक्षेप हो गया है लेकिन आने वाला वक्त बताएगा कि दोनों समुदायों में किस तरह से सौहार्द का वातावरण बनाया जाता है।

दाइचे वेले ने लिखा, करतारपुर और राम मंदिर दोनों ही ऐतिहासिक : भारत और पाकिस्तान के बीच जहां करतारपुर कॉरिडोर खोलने की खुशी है वहीं भारत में राम मंदिर का रास्ता साफ होने से खुशी का माहौल है। 

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