फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Initiative: 100 doctors of the country will find accurate treatment for lung cancer

पहल: फेफड़ों के कैंसर का सटीक इलाज ढूंढ़ेंगे देश के 100 चिकित्सक, आईसीएमआर की निगरानी में तैयार होगी गाइडलाइन

Sat, 04 May 2024 06:42 AM IST
निर्मल कांत परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 04 May 2024 06:42 AM IST
सार

देश के 100 विशेषज्ञ चिकित्सकों की 15 टीमें धूम्रपान-तंबाकू, वायु प्रदूषण, कम खुराक वाली कंप्यूटेड टोमोग्राफी, चेस्ट रेडियोग्राफ, कीमो, इम्यूनो और रेडियोथेरेपी के अलावा सर्जरी को लेकर वैज्ञानिक साक्ष्यों को एकत्रित करेंगे

विज्ञापन
Initiative: 100 doctors of the country will find accurate treatment for lung cancer
फेफड़े - फोटो : istock

विस्तार

वायु प्रदूषण और कैंसर का बोझ झेल रहे फेफड़ों के इलाज को लेकर डॉक्टर एक मत नहीं है। इसका उपचार भी समान नही है। इसकी वजह से यह भयावह रूप ले रहा है। सरकार ने अब सख्त रुख अपनाते हुए वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित गाइडलाइन तैयार करने का निर्णय लिया है।

विज्ञापन


सरकार ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है, जिसने देश के 100 विशेषज्ञ चिकित्सकों का चयन कर 15 टीमें गठित की है। ये टीमें धूम्रपान-तंबाकू, वायु प्रदूषण, कम खुराक वाली कंप्यूटेड टोमोग्राफी, चेस्ट रेडियोग्राफ, कीमो, इम्यूनो और रेडियोथेरेपी के अलावा सर्जरी को लेकर वैज्ञानिक साक्ष्यों को एकत्रित करेंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, भारत में सभी तरह के कैंसर में 5.9% योगदान फेफड़े के कैंसर का है। इसके अलावा हर साल कैंसर से मरने वालों में 8.1% हिस्सेदारी भी है। द लांसेट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित वैश्विक रिपोर्ट 2021 के अनुसार, भारत में फेफड़ों के कैंसर की आयु-मानकीकृत घटना दर (एएसआईआर) 1990 में 6.62 प्रति एक लाख से बढ़कर 2019 में 7.7 तक पहुंची है।
विज्ञापन


इसलिए जरूरी राष्ट्रीय गाइडलाइन
आईसीएमआर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फेफड़ों के कैंसर के इलाज को लेकर मौजूदा समय में देश में राष्ट्रीय स्तर पर गाइडलाइन लागू नहीं है। अगर एक मरीज दिल्ली में किसी डॉक्टर से इलाज करा रहा है तो उसके तौर तरीके कर्नाटक या फिर तमिलनाडु में इलाज करने वाले डॉक्टर से भिन्न हो सकते हैं। इसके फायदे और नुकसान दोनों है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर गाइडलाइन की आवश्यकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


15 में से चार टीमें यूपी की
गाइडलाइन बनाने वाली 15 में से चार टीमें उत्तर प्रदेश से हैं। इनमें गोरखपुर एम्स, नोएडा स्थित आईसीएमआर का एनआईसीपीआर और लखनऊ के केजीएमयू व कल्याण सिंह सुपर स्पेशलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ शामिल हैं। वहीं हरियाणा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से एक एक संस्थान के डॉक्टरों को लिया है। पंजाब और चंडीगढ़ से दो-दो टीमें तैनात की हैं।

इसी साल पूरा होगा काम...
टीम में शामिल डॉ. आयुष लोहिया ने बताया कि गाइडलाइन में सर्जरी को लेकर उन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी टीम इस पर काफी समय से काम कर रही है और अगले कुछ समय में वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर जानकारी उपलब्ध कराएगी। उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि इसी साल में गाइडलाइन तैयार होने के बाद लागू हो जानी चाहिए।


डॉ. लोहिया का मानना है कि विविधता युक्त इस देश में उपचार के तौर तरीके एक जैसा होना बहुत जरूरी है। इससे न सिर्फ मरीज का जीवन बचाया जा सकता है बल्कि समय रहते निदान के लक्ष्य को भी पूरा कर सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed