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JPC: 'छह महीने के अंदर वेबसाइट पर देनी होगी वक्फ संपत्ति की जानकारी', इन बदलावों के साथ स्वीकारा गया विधेयक

Tue, 28 Jan 2025 04:24 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Tue, 28 Jan 2025 04:24 AM IST
सार

भाजपा सांसद बृजलाल की ओर से रखे और समिति की ओर से स्वीकृत संशोधन में कहा गया है, कानून के अनुसार, राज्य सरकार अधिसूचना के जरिये कलेक्टर के स्तर से ऊपर के किसी अधिकारी को जांच के लिए नामित कर सकती है।

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Information about Waqf property to be given on  website within six months bill accepted with these changes
वक्फ संसोधन विधेयक पर बनी संसद की संयुक्त संसदीय समिति - फोटो : पीटीआई

विस्तार

वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) ने जिन 14 संशोधनों को स्वीकार किया है, उसके तहत विधेयक में मौजूदा कानून के तहत पंजीकृत हर वक्फ संपत्ति के लिए प्रस्तावित अधिनियम के लागू होने से छह महीने की अवधि के भीतर वेबसाइट पर संपत्ति का विवरण घोषित करना अनिवार्य कर दिया गया है। एक अन्य स्वीकृत संशोधन अब मुतवल्ली (कार्यवाहक) को राज्य में वक्फ न्यायाधिकरण की संतुष्टि के अधीन अवधि बढ़ाने का अधिकार देगा। सूत्रों ने बताया कि भाजपा सांसद संजय जायसवाल के प्रस्तावित और समिति के स्वीकार किए गए संशोधन में मुस्लिम कानून और न्यायशास्त्र का ज्ञान रखने वाले एक व्यक्ति को ऐसे न्यायाधिकरणों के सदस्य के रूप में शामिल करने की बात कही गई है।

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भाजपा सांसद बृजलाल की ओर से रखे और समिति की ओर से स्वीकृत संशोधन में कहा गया है, कानून के अनुसार, राज्य सरकार अधिसूचना के जरिये कलेक्टर के स्तर से ऊपर के किसी अधिकारी को जांच के लिए नामित कर सकती है। कई मुस्लिम संगठनों ने कलेक्टर को दिए गए अधिकार पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि वह राजस्व अभिलेखों के प्रमुख भी हैं और उनके द्वारा की गई कोई भी जांच निष्पक्ष नहीं होगी, क्योंकि वह अपने कार्यालय के दावे के आधार पर ही जांच करेंगे।
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पांच साल से इस्लाम का पालन कर रहा व्यक्ति ही वक्फ घोषित कर सकता है
समिति ने यह सिफारिश की है कि केवल वही व्यक्ति संपत्ति को वक्फ घोषित कर सकता है जो कम से कम पांच वर्षों से इस्लाम का पालन कर रहा हो। इसका अर्थ इस्लामी कानून के तहत विशेष रूप से धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए समर्पित संपत्ति है।
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मौजूदा कानून के कठोर प्रावधान बनाए रखने के पक्ष में था विपक्ष

  • विपक्षी सांसदों ने वक्फ (संशोधन) बिल के सभी 44 खंडों में संशोधन का प्रस्ताव रखा। इसमें मौजूदा कानून के प्रावधानों को बहाल करने की बात थी और कहा गया कि समिति की ओर से जो रिपोर्ट दी जाए उसमें प्रस्तावित कानून विधेयक के कठोर चरित्र को बनाए रखा जाए।
  •  वक्फ ट्रिब्यूनल में दो की जगह तीन सदस्य होंगे। तीसरे सदस्य इस्लामी विद्वान होंगे।
  •  वक्फ की संपत्ति सरकार की है या नहीं, इसकी जांच वक्फ ट्रिब्यूनल नहीं, जिला कलेक्टर करेगा। हालांकि, वक्फ संपत्ति का फैसला सिर्फ जिला कलेक्टर के हाथ में नहीं होगा। सरकार इसके लिए कलेक्टर या उससे ऊपर के अधिकारी का चयन कर सकती है।
  •  वक्फ बोर्ड-काउंसिल में अनिवार्य रूप से कम से कम दो गैरमुस्लिम सदस्य होंगे। यह केंद्र या राज्य द्वारा तय अधिकारी से इतर होगा। ये मुस्लिम या गैरमुस्लिम दोनों हो सकते हैं।
  •  किसी भी प्रकार के विवाद में उलझी संपत्ति दान कर वक्फ नहीं की जा सकेगी।
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