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Rice Prices:आम आदमी के दाल-भात में महंगाई का लगा तड़का, जाने क्यों 12 दिनों में 10 प्रतिशत बढ़े चावल के रेट?

Thu, 10 Oct 2024 06:16 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 10 Oct 2024 06:16 PM IST
सार

28 सितंबर को केंद्र सरकार ने गैर बासमती चावल के निर्यात से रोक हटा दी थी। वहीं चावल पर मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस घटाकर 10 फीसदी कर दिया है। इसकी वजह से भारतीय चावल की वैश्विक मांग में उछाल देखा जा रहा है।

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Inflation vegetable food price of rice has increased by 10 percent in 12 days
दाल चावल पर महंगाई की मार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

त्योहारी सीजन में पहले ही आम आदमी टमाटर-प्याज और हरी सब्जियों की महंगाई से परेशान है। इसी बीच अब चावल के रेट में भी उछाल देखने को मिल रहा है। सरकार ने हाल ही में नॉन-बासमती चावल के निर्यात पर लगी रोक हटा दी। इससे भारत में चावल की कीमत 10-15 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। चावल के रेट में उछाल सरकार के फैसले के बाद देखा जा रहा है। जबकि वैश्विक स्तर पर चावल की कीमत 15 प्रतिशत तक गिर चुकी हैं।

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28 सितंबर को केंद्र सरकार ने गैर बासमती चावल के निर्यात से रोक हटा दी थी। वहीं चावल पर मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस घटाकर 10 फीसदी कर दिया है। इसकी वजह से भारतीय चावल की वैश्विक मांग में उछाल देखा जा रहा है। हालांकि, इसका असर घरेलू बाजार में साफ नजर आ रहा हैं। चावल के रेट में बढ़ोतरी देखी जा रही है। कारोबारियों का कहना है कि,चावल की वैश्विक मांग के कारण घरेलू मांग बढ़ रही है। ये बढ़ते रेट त्योहारी सीजन में आम आदमी को परेशान कर सकती है। ये कीमत तब तक बढ़ेगी जब तक की नई फसल नहीं आ जाती है।
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आम आदमी की दाल भी हो रही महंगी
इन दिनों बाजार में दालों के दाम भी बढ़े हुए नजर आ रहे है। जबकि पिछले तीन महीने में इनकी थोक कीमत में 10 फीसदी गिरावट आई है। लेकिन इसके बावजूद दालों की रिटेल कीमत में कोई कमी नहीं आई है। बढ़ते दामों को लेकर सरकार ने सख्त कदम उठाया है। हाल ही में सरकार ने दालों के खुदरा विक्रेताओं से थोक कीमतों में गिरावट का लाभ आम उपभोक्ताओं को देने को कहा है।
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सरकार ने व्यापारियों को चेताया कि यदि वे असामान्य रूप से मुनाफा कमाते हैं तो उनके खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उपभोक्ता मामलों के विभाग की सचिव निधि खरे ने हाल ही में भारतीय खुदरा विक्रेताओं के संघ आरएआई और प्रमुख संगठित खुदरा श्रृंखलाओं के साथ प्रमुख दालों की कीमतों के आउटलुक और रुझानों पर चर्चा करने के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की थी।


इस बैठक में निधि खरे ने पिछले तीन महीनों के दौरान प्रमुख मंडियों में तुअर और उड़द की कीमतों का जिक्र किया। उन्होंने आंकड़ों प्रस्तुत करते हुए कहा कि, दालों में औसतन लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट आई है, लेकिन इसके बावजूद खुदरा कीमतों में ऐसी कोई गिरावट नहीं देखी गई है। चना के साथ भी कुछ यही हुआ। पिछले एक महीने में चने की मंडी कीमतों में गिरावट देखी गई है, लेकिन खुदरा कीमतों में वृद्धि जारी है। निधि खरे ने कहा कि, इन रुझानों पर बारीकी से नजर रखी जा रही है और अगर यह अंतर बढ़ता हुआ पाया जाता है तो आवश्यक उपाय शुरू करने होंगे। बैठक में आरएआई के अधिकारियों और रिलायंस रिटेल लिमिटेड, विशाल मार्ट, डी मार्ट, स्पेंसर और मोर रिटेल के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।

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