फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Infiltration of East Ladakh China ready to retreat but plans to hurt PM Narendra Modi Atmanirbhar Bharat and Make in India campaign

पूर्वी लद्दाख घुसपैठ: पीछे हटने को तैयार चीन, लेकिन 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पर चोट की योजना

Mon, 12 Apr 2021 09:03 PM IST
कुमार संभव शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार संभव Updated Mon, 12 Apr 2021 09:03 PM IST
सार

  • चीनी कंपनियों के लिए समान अवसर, मई 2020 के पहले वाली स्थिति की मांग
  • पाकिस्तान के ग्वादर से पीओके होते हुए चीन तक जाने वाले सिल्क रूट की सुरक्षा है बेचैनी का कारण
  • पैगांग की तरह बफर जोन की कर रहा है उम्मीद

विज्ञापन
Infiltration of East Ladakh China ready to retreat but plans to hurt PM Narendra Modi Atmanirbhar Bharat and Make in India campaign
भारत और चीन की सेना - फोटो : Indian Army

विस्तार

पूर्वी लद्दाख से चीन के सैनिकों का अप्रैल 2020 वाली स्थिति में एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर जाने का मसला पेचीदा होता जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि चीन एलएसी के पार पुरानी स्थिति में पहुंचने के लिए बड़ी डील चाहता है। इसके बहाने चीन की मंशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महात्वाकांक्षी अभियान 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पर चोट करने की है। दरअसल, पड़ोसी देश चाहता है कि चीनी कंपनियों के लिए भारत में कारोबार के लिए अवसर पहले की तरह उपलब्ध कराए जाएं। मोटर गैराज (एमजी) मोटर्स वाहन कंपनी के रास्ते की बाधा समेत अन्य रोड़े दूर किए जाएं। इसके अलावा पड़ोसी देश पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से पीओके होकर गुजरने वाली सिल्क रोड की सुरक्षा भी उसे बेचैन कर रही है। ऐसे में चीन चाहता है कि डेपसांग, गोगरा पोस्ट और हॉटस्प्रिंग क्षेत्र में भी पैंगांग त्सो लेक इलाकों की तरह दोनों देशों की सेनाएं कुछ पीछे हटें। बीच का क्षेत्र बफर जोन बने। ताकि चीन अपने क्षेत्र और वन बेल्ट वन रोड की राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षा योजना को सुरक्षा कवच दे सके। यही मुख्य कारण है कि मई 2020 के बाद से बने गतिरोध का समाधान 11 बार सैन्य कमांडर स्तर की वार्ता के बाद भी नहीं निकल पाया।

विज्ञापन

कब तक रहेंगे ऐसे हालात?

पूर्व विदेश सचिव शशांक को हाल-फिलहाल अभी पूर्वी लद्दाख में चीन के सैनिकों के एलएसी पर जाने की उम्मीद कम दिखाई दे रही है। वहीं, भारत भी चीन की अनावश्यक धौंसबाजी को नहीं मानने वाला है। ऐसे में पूर्व विदेश सचिव को लग रहा है कि अक्टूबर-नवंबर तक इस दिशा में खास प्रगति होने के आसार कम हैं। शशांक इसके तीन बड़े कारण बताते हैं।

  • पहला कारण: पाकिस्तान और रूस के बीच बन रहा नजदीकी रिश्ता है। चीन को लग रहा है कि इस समय वह भारत पर अपना दबाव बनाकर मनमानी कर सकता है। यह चीन का भ्रम भी है।
  • दूसरा कारण: कोविड-19 का संक्रमण है। भारत और दुनिया के तमाम देशों को सामने इससे निपटने की चुनौती है। ऐसे में नई दिल्ली का पूरा ध्यान अभी इस स्थिति पर ज्यादा है।
  • तीसरा कारण: लद्दाख क्षेत्र में तापमान का बढ़ना और ठंड का कम होना है। तापमान में -40 डिग्री जैसी गिरावट नहीं है। यह स्थिति नवंबर से आएगी, तब तक पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में भारत के पास सैन्य तैनाती और अन्य इंतजाम आदि करने के पर्याप्त समय भी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

क्या कहता है चीन?

चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी ग्लोबल टाइम्स और सीजीटीएन ने चीन के प्रवक्ता के हवाले से बताया कि दोनों पक्षों को पिछली वार्ता में बनी सहमति पर आगे बढ़ना चाहिए। पीएलए के प्रवक्ता के अनुसार, उन्हें उम्मीद है कि भारतीय पक्ष दोनों देशों की सेनाओं की पिछली वार्ता में बनी सहमतियों का पालन करेगा। सीमा पर शांति और सकारात्मक माहौल बनाए रखने के लिए जिस दिशा में चीन आगे बढ़ा है, उसी रास्ते पर आगे बढ़ेगा।

विज्ञापन

भारतीय सेना ने दिया यह बयान

भारतीय सेना ने भी इसी विषय पर बयान जारी किया। भारतीय सेना के बयान के मुताबिक, दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच में हाट स्प्रिंग, गोगरा पोस्ट, डेपसांग में विवाद वाले इलाकों में सैन्य वापसी को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। सीमा पर शांति बनाए रखने, नए टकराव से बचने और शेष मुद्दों पर तेजी से हल निकालने पर सहमति बनी है। भारतीय सेना ने अंत में कहा कि सैन्य वापसी या वार्ता पर ठोस प्रगति न हो पाने का सबसे बड़ा कारण चीन की सेना का पहले से तय की सोच के आधार पर वार्ता की मेज पर आना था, लेकिन चीन ने अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई।

डेपसांग बनाम अक्साईचिन और शिनजिंयांग प्रांत

गौरतलब है कि भारत ने 2005-2012 के बीच एडवांस लैंडिंग ग्राउंड दौलत बेग ओल्डी में आधारभूत संरचना को आगे बढ़ाया था। इससे तिलमिला कर चीन ने चुमार और फिर डेपसांग में कई बार निगाहें गड़ाईं। अब इस इलाके में उसकी सेना एलएसी के संभावित क्षेत्र को पार करके भारतीय क्षेत्र तक आ गई है। एडवांस लैंडिग ग्राउंड दौलतबेग ओल्डी, डेपसांग से अक्साईचिन की दूरी 22-24 किमी है। इसके करीब से ही चीन का जी-219 हाईवे गुजरता है। यह हाईवे तिब्बत को शिनजिंयाग प्रांत से जोड़ता है। इसे लेकर चीन काफी संवेदनशील है, क्योंकि भारत सामरिक दृष्टि से काफी अच्छी स्थिति में है। कहा जा सकता है कि चीन की सेना के यहां पीछे हटने के बाद कभी तनाव की स्थिति आने पर भारतीय सेना को अक्साईचिन, तिब्बत या शिनजियांग प्रांत तक पहुंचने में ज्यादा मशक्कत नहीं होगी। ऐसे में चीन इस इलाके में बफर जोन के साथ-साथ सबकुछ सुरक्षित करने की मंशा पाले हुए है।

भारत पर दबाव बनाना चाहता है चीन

कूटनीति के जानकारों की मानें तो चीन की निगाह इस समय भारत पर दबाव बनाकर अपना हित साधने की है। वह मई 2020 से दोनों देशों के बिगड़े द्विपक्षीय रिश्ते को पटरी पर लाने के लिए संवेदनशील है। भारत का बड़ा बाजार चीन को काफी समय से ललचा रहा है। ऐसे में वह पहले की तरह द्विपक्षीय व्यापार के बहाने तमाम सहूलियतें भी चाहता है। पिछले वर्षों के द्विपक्षीय व्यापार में चीन अधिक फायदे में रहा। इस तरह की स्थितियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती हैं। हालांकि, भारत का मानना है कि सबसे पहले पूर्वी लद्दाख में सीमा पर शांति, सौहार्द, स्थायित्व और विश्वास की बहाली के लिए चीन अपने सैनिकों को पुराने तैनाती वाले स्थल पर ले जाए। विदेश मंत्री एस जयशंकर कई बार बयान देकर कह चुके हैं कि इस तरह की लंबे समय की स्थितियां दोनों देशों के हित में नहीं है। भारत का यह बयान एकतरफा तरीके से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति (अवधारणा) को बदलने चीन की चीन की मंशा से जुड़ा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed