Indus Waters Treaty: आतंक का समर्थन बंद किए बिना नहीं बहेगी सिंधु की धारा, भारत का जल संधि पर निलंबन बरकरार
भारत ने सिंधु जल संधि पर निलंबन बरकरार रखा है। मामले में जल शक्ति मंत्रालय ने कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन देना पूरी तरह नहीं छोड़ता, तब तक सिंधु जल संधि बहाल नहीं होगी।
विस्तार
भारत के लाख समझाने के बावजूद भी पाकिस्तान ने आतंक और आतंकियों का समर्थन करना नहीं छोड़ा। जिसके बाद भारत सरकार ने भी इस मामले में सख्त कर्रवाई करते हुए सिंधु जल संधि पर रोक लगाने के अपने फैसले को बरकरार रखा। मामले में शुक्रवार को केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और विश्वसनीय रूप से नहीं छोड़ता, तब तक सिंधु जल संधि निलंबित रहेगी।
बता दें कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि पर रोक लगाने का फैसला लिया था। हालिया तनाव के बाद हुए संघर्ष विराम के बाद दुनिया इस आस में बैठी थी कि अब भारत सिंधु जल संधि पर रोक हटा देगा, लेकिन भारत ने पाकिस्तान को सख्त चेतावनी दी है कि जब तक पाकिस्तान आतंकियों को समर्थन देना बंद नहीं करेगा तब ये संधि निलंबित ही रहेगी।
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जल शक्ति मंत्रालय ने दी जानकारी
मामले में जल शक्ति मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को सौंपी अपनी मासिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि सरकार ने सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने की घोषणा की है।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के जल संसाधन सचिव सैयद अली मुर्तजा ने भारत द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर चर्चा की इच्छा जताई है। लेकिन भारत अपने रुख पर अडिग है और साफ कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थन नहीं छोड़ता, संधि लागू नहीं होगी। इसके साथ ही भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस फैसले से पाकिस्तान को यह संदेश देना जरूरी था कि अब आतंक और द्विपक्षीय समझौते साथ नहीं चल सकते।
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क्या है सिंधु जल संधि?
गौरतलब है कि सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई थी। इसका उद्देश्य था कि दोनों देश सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी का आपस में शांति से बंटवारा करें। इस समझौते की मध्यस्थता विश्व बैंक ने की थी। इसके तहत पूर्वी नदियां जैसे कि ब्यास, रावी और सतलुज भारत को मिलीं। वहीं पश्चिमी नदियां सिंधु, झेलम और चिनाब पाकिस्तान को दी गईं। देखा जाए तो अब तक भारत इस समझौते का पालन करता रहा, लेकिन अब यह बाध्यता खत्म हो गई है।
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