RSS: इंद्रेश कुमार बोले- नफरत में रहेंगे दुनिया के पचास फीसदी लोग, तो विश्व शांति की नहीं की जा सकती कल्पना
RSS: मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मुख्य संरक्षक इंद्रेश कुमार ने इस्राइल, फलस्तीन, यूक्रेन और रूस का नाम लिए बिना कहा कि मुस्लिम, ईसाई और यहूदी कुल आबादी के 50 फीसदी हैं, लेकिन इतना बड़ा समाज आज की तारीख में गुस्से व नफरत में जीते हुए आपस में लड़ रहा है।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व सरकार्यवाह सुरेश भैय्या जी जोशी ने 'दिल की गीता' ग्रंथ के विमोचन के मौके पर गीता को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि हम सभी के अंदर भगवत गीता का बीज है। उन्होंने एलान किया कि पूरी दुनिया को शुद्धता के संस्कार, सकारात्मक सोच और धर्म के रास्ते पर चलने की जरूरत है।
वहीं, आरएसएस से जुड़े मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मुख्य संरक्षक इंद्रेश कुमार ने इस्राइल, फलस्तीन, यूक्रेन और रूस का नाम लिए बिना कहा कि मुस्लिम, ईसाई और यहूदी कुल आबादी के 50 फीसदी हैं, लेकिन इतना बड़ा समाज आज की तारीख में गुस्से व नफरत में जीते हुए आपस में लड़ रहा है, ऐसे में विश्व शांति की कल्पना नहीं की जा सकती है।
सुरेश भैय्याजी जोशी ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि भारतीय ऋषियों, मुनियों और चिंतन ने समय-समय पर समरसता का संदेश दिया है। उपनिषद में भी भेदभाव नहीं है, सर्वकल्याण की बाद कही गई है। उन्होंने आगे कहा कि भगवान ने कहा है कि वह सज्जनों और धर्म की रक्षा के लिए बार-बार आयेंगे। समरसता, समस्त जीव जगत और मानव समाज का जिक्र गीता में किया गया है। सभी के कल्याण की कामना की बात कही गई है।
जोशी ने आगे कहा, जब दुनिया दुर्जनों से भरी होगी तो ईश्वर ऊपर से नहीं आएंगे। उन्होंने गीता के संदेशों को संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए आवश्यक बताया। गीता में कर्मशील और भक्ति से पूर्ण संदेश दिया गया है। परंतु यह भक्ति और कर्म.. बिना ज्ञान के करना मूर्खता होती है। यह बातें सिर्फ हिंदुओं या एक समुदाय के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव जाति के लिए है। धर्म युद्ध में भगवान कृष्ण ने कहा था कि धर्म की रक्षा के लिए अधर्म के रास्ते पर भी चलना पड़े तो यह गलत नहीं है। अर्थात धर्म की रक्षा करना महत्वपूर्ण है।
आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए सामाजिक समरसता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'मालिक यानी ईश्वर,अल्लाह, वाहेगुरु गॉड सभी एक ही हैं, जिसको आसान शब्दों में ऊपर वाला कहा गया है। दीन, कुरान, पंथ, गीता, ग्रंथ एवं मतपंथों सभी में समरसता, प्यार, शांति और अपनेपन की बात कही गई है।'
उन्होंने गीता के उपदेशों का जिक्र करते हुए कहा कि रोटी-कपड़ा-मकान खून से नहीं, श्रम से कमाया जाता है। गीता में श्रीकृष्ण ने भी यही कहा था कि कर्म किए जा, फल की चिंता न कर। अंग्रेजों को भी जब इस देश से भगाया गया था तो जो नारा लगा था वो था.... तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। उन्होंने कहा कि बापू (राष्ट्रपिता महात्मा गांधी) ने भी रोटी कपड़ा और मकान की नहीं स्वाभिमान की बात की थी। क्योंकि यह स्वाभाविक था कि अंग्रेजों से जब आजादी मिलेगी तो बाकी चीजें खुद ही मिलेंगी।
दिल्ली विश्विद्यालय के जाकिर हुसैन कॉलेज में राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद, भारतीय सिंधु समाज, हिमालय परिवार और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच द्वारा आयोजित सामाजिक समरसता और सिंधी समाज कार्यक्रम में पुस्तक 'दिल की गीता' का विमोचन किया गया। इस मौके पर श्रीकृष्ण द्वारा गीता में दिए उपदेशों को उर्दू और हिंदी में अनुवाद भी किया गया। गीता को उर्दू में ख्वाजा दिल मोहम्मद, हिन्दी में डॉक्टर प्रदीप कुमार जोशी, और उर्दू को देवनागरी में तैयार किया है पंडित लक्ष्मण महाराज ने... और किताब की संपादक प्रोफेसर गीता जोशी हैं। पुस्तक दिल की गीता का कविता (नज्म) आधारित अनुवाद किया गया है।