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IndiGo: 'इंडिगो' का ऑपरेशन ठप, जिम्मेदार कौन? निजीकरण की राह में ‘अनुबंध और शोषण’ से सबक लेने की नसीहत

Sat, 06 Dec 2025 03:22 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Sat, 06 Dec 2025 03:22 PM IST
सार

एयरलाइन कंपनी, 'इंडिगो' का ऑपरेशन ठप होने के कारण हवाई यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। देश में ऐसी स्थिति क्यों पैदा हो रही है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है। केंद्र सरकार को कौन सा कदम उठाना चाहिए। एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार ने इस बाबत अमर उजाला डॉट कॉम को विस्तार से बताया है। 
 

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IndiGo operations halted, who is responsible? A lesson to be learned from privatization
इंडिगो संकट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

देश में एयरलाइन कंपनी 'इंडिगो' की ऑपरेशनल मूवमेंट में शनिवार को भी सुधार नहीं दिखा। विभिन्न एयरपोर्ट पर 400 से अधिक फ्लाइट रद्द कर दी गई हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई एयरपोर्ट पर पिछले चार दिन में 2,000 से ज्यादा उड़ान रद्द हो चुकी हैं। उड़ानों के सामान्य स्थिति में आने के लिए 15 दिसंबर तक का समय लग सकता है। सिविल एविएशन मिनिस्टर राम मोहन नायडू का कहना है, नए एफडीटीएल नियम एक नवंबर से लागू हैं। इनका पालन करने में अन्य किसी भी एयरलाइन को दिक्कत नहीं आई, लेकिन 'इंडिगो' आनाकानी कर रही है। एयरलाइन कंपनी की लापरवाही, इस मामले की जांच होगी और उसके बाद कार्रवाई की जाएगी। दूसरी तरफ, 

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ज्वाइंट कन्सलटेटिव मशीनरी (जेसीएम) के वरिष्ठ सदस्य और अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी. श्रीकुमार ने इस बाबत अमर उजाला डॉट कॉम को विस्तार से बताया है कि देश में ऐसी स्थिति क्यों पैदा हो रही है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है। केंद्र सरकार को कौन सा कदम उठाना चाहिए। 
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एयरलाइन कंपनी, 'इंडिगो' का ऑपरेशन ठप होने के कारण हवाई यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 'इंडिगो' को लेकर लोगों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है। चार-पांच दिन के दौरान एयरपोर्ट पर यात्रियों की भीड़ है। एक फ्लाइट रद्द हो रही हैं। कुछ देर बाद पता चलता है कि दूसरी फ्लाइट भी रद्द हो गई। ये सब निजीकरण का नतीजा है। इस पॉलिसी के तहत ही एयरलाइंस और एयरपोर्ट भी निजी हाथों में सौंपे जा रहे हैं। ज्वाइंट कन्सलटेटिव मशीनरी (जेसीएम) के वरिष्ठ सदस्य और अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी. श्रीकुमार ने इस बाबत अमर उजाला डॉट कॉम को विस्तार से बताया है कि देश में ऐसी स्थिति क्यों पैदा हो रही है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है और केंद्र सरकार को कौन सा कदम उठाना चाहिए। 
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सी. श्रीकुमार ने कहा, हवाई यात्रियों की कहीं पर कोई सुनवाई नहीं हो रही। खुद मेरी फ्लाइट कैंसल हो गई है। मैं पूना में हूं। चेन्नई जाने के लिए शुक्रवार को मेरी फ्लाइट थी, वह कैंसल हो गई। कहा गया कि शनिवार को मिल जाएगी। अगले दिन फिर मैसेज आ गया कि फ्लाइट कैंसल हो गई है। अब ऐसे में यात्री कहां जाएं। ये सब निजीकरण का नतीजा है। एयर इंडिया बंद कर टाटा के हवाले कर दिया गया। संसद में भी यह मुद्दा उठा। 'इंडिगो' का ऑपरेशन ठप होने के कारण सांसद, अपने निर्वाचन क्षेत्र में नहीं जा पा रहे हैं। परिस्थिति बहुत खराब है। श्रीकुमार बोले, इसका कारण क्या है। कोई भी प्राइवेट कंपनी, अपने वर्कर का शोषण करती है। नियम के अनुसार, काम नहीं होता। तय घंटे के बाद अगर पायलट या दूसरे कर्मियों को आराम करने का वक्त नहीं मिलेगा तो स्ट्रेस बढ़ेगी। कर्मियों को तय छुट्टी मिलना भी जरुरी है। पायलट और क्रू मेंबर की कितनी परेशानियां हैं, ये सभी जानते हैं। उन्हें निर्धारित समय पर आराम तक नहीं मिलता। 



हवाई इंडस्ट्री में कर्मियों पर बहुत दबाव रहता है। केवल यहीं पर ही नहीं, बल्कि दूसरे विभागों में भी ऐसा ही हाल है। राजस्थान में रेलवे के लोको पायलट, आंदोलन कर रहे हैं। उन्हें भी रोजाना 12 से 13 घंटे काम करना पड़ रहा है। रक्षा क्षेत्र में तीस और चालीस वर्ष के लोगों को हार्ट अटैक हो रहा है। हादसे बढ़ रहे हैं। ये अनावश्यक दबाव के चलते हो रहा है। अब नया लेबर कोड आ गया है। इसमें आठ घंटे की ड्यूटी करने की बात कही गई है, लेकिन कर्मियों पर दबाव डालकर उनसे 12 घंटे तक काम करा सकते हैं। ये शोषण नहीं है तो क्या है। अनुबंध आधारित जॉब दी जा रही हैं। 


सरकार कहती है कि नए लेबर कोड अच्छे हैं, लेकिन इनकी हकीकत कोई सुनना नहीं चाहता। इससे कर्मियों को बहुत बड़ा नुकसान होगा। कर्मचारी की दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। 
'इंडिगो' का मूवमेंट बंद होना, इससे सरकार को सीखना चाहिए। रेलवे, रक्षा एवं दूसरे विभागों को मजबूती प्रदान करनी होगी। निजीकरण और आउटसोर्सिंग की नीति बंद की जाए। सरकार, कर्मचारियों से चर्चा करने के बाद नई पॉलिसी बनाए। देश में 65 लाख से ज्यादा पेंशनर हैं। उन्होंने राष्ट्र सेवा में अपने जीवन के तीस चालीस साल लगाए हैं। अब आठवें वेतन आयोग में उनकी पेंशन बदलेगी, इसका कुछ पता नहीं है। कर्मचारियों का संतुष्टि स्तर लगातार गिर रहा है। पुरानी पेंशन पर भी सरकार मौन है। श्रीकुमार ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह आराम से सोचे। इंडिगो के घटनाक्रम से सबक लेते हुए अपनी पॉलिसी बदले। 

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