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भारत के ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा से आ गई थी दुनिया के चेहरे पर उदासी

Tue, 15 Aug 2017 10:56 AM IST
amarujala.com- Written by: ऋतुराज त्रिपाठी
amarujala.com- Written by: ऋतुराज त्रिपाठी Updated Tue, 15 Aug 2017 10:56 AM IST
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Indias first nuclear testing program of 1974 smiling budhha draw attention from all over the world
Pokhran nuclear test

18 मई 1974 को भारत ने विश्व के इतिहास में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवाई थी, उसने एक ऑपरेशन के जरिये पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था। इस ऑपरेशन का नाम था 'स्माइलिंग बुद्धा' । 1974 में भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था जिसके बाद वो उन ताकतवर देशों की लिस्ट में शामिल हो गया था जो परमाणु हथियारों के दम पर दुनिया में अपना वर्चस्व साबित करते थे।

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भारत से पहले संयुक्त राष्ट्र के 5 स्थायी देशों ने ही परमाणु परीक्षण किया था। परमाणु परीक्षण का नाम बुद्ध जैसे शांतिप्रिय व्यक्तित्व के पीछे रखने की खास वजह थी। भारत दुनिया को बताना चाहता था कि ये परीक्षण शांति के उद्देश्य से किया गया है।
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दूसरा कारण यह था कि परीक्षण के दिन बुद्ध पूर्णिमा थी। भारत के पहले पीएम जवाहरलाल नेहरू ने परमाणु से जुड़े कार्यों का जिम्मा वैज्ञानिक होमी जहांगीर भावा को सौंपा था। जब पाक के साथ 1971 का युद्ध हुआ, तब तक परमाणु की दिशा में कोई खास काम नहीं हुआ था। 

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जब परमाणु मामले पर इंदिरा हुईं थी सीरियस

Indias first nuclear testing program of 1974 smiling budhha draw attention from all over the world
पीएन हक्सर के साथ इंदिरा गांधी

पाक से युद्ध के बाद तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने इस मिशन को प्राथमिकता दी। इंदिरा के इस दिशा में जागरूक प्रयासों से तीन साल के भीतर ही वैज्ञानिकों ने पहला परमाणु परीक्षण किया। यह मिशन इतना गोपनीय था कि तत्कालीन रक्षा मंत्री बाबू जगजीवन को भी ऑपरेशन सफल होने के बाद जानकारी हो पाई थी।

इंदिरा ने यह मिशन गुप्त रखा था जिसके बारे में केवल कुछ प्रमुख वैज्ञानिकों को ही जानकारी थी। इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने वाले वैज्ञानिकों की टीम के अहम सदस्य राजा रमन्ना को इस मिशन के बारे में जानकारी थी। क्योंकि वो विस्फोट के कर्ता-धर्ता थे। 

मुख्य सचिव पीएन हक्सर और उनके साथी मुख्य सचिव पीएन धर, भारतीय रक्षामंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार, डॉ. नाग चौधरी और एटॉमिक एनर्जी कमीशन के चेयरमैन एच. एन. सेठना जैसे कुछ लोग ही इस मिशन के बारे में जानते थे। 

इंदिरा बोलीं-तय समय पर ही होगा परमाणु विस्फोट

Indias first nuclear testing program of 1974 smiling budhha draw attention from all over the world
इंदिरा गांधी

विस्फोट को लेकर फाइनल मीटिंग होनी थी। इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने वाले वैज्ञानिकों की टीम के अहम सदस्य राजा रमन्ना ने अपनी बायोग्राफी ‘इयर्स ऑफ पिलग्रिमिज’ में बताया कि मेरा मानना था कि ये केवल एक औपचारिकता होगी लेकिन मीटिंग में बहस हुई।

पीएन धर ने विस्फोट का विरोध किया। उन्हें लगता था कि विस्फोट से भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा। जबकि रमन्ना ने कहा कि अब तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, टेस्ट को टालना मुश्किल है। तीखी बहस के बीच में अचानक इंदिरा गांधी की आवाज सुनाई दी, उन्होंने कहा कि इस परीक्षण को निश्चित समय पर हो जाना चाहिए, दुनिया के सामने भारत को ऐसे प्रदर्शन की जरूरत है। 

भारत ने विश्व को करवाया शक्ति का अहसास

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पोखरण विस्फोट

18 मई 1974 को परमाणु डिवाइस षट्कोणीय आकार का था, जिसका वजन 1400 किलो था। इस डिवाइस का व्यास 1.25 मीटर का था। आर्मी डिवाइस को बालू में छिपाकर आर्मी के बेस कैंप में ले गई थी। राजस्थान के पोखरण में सुबह 8.05 बजे ये विस्फोट किया गया। विस्फोट इतना तेज था कि जमीन में 45 से 75 मीटर तक गड्ढा हो गया था। आसपास के 1`0 किलोमीटर तक के क्षेत्र में भूकंप जैसे झटके महसूस किये गये थे।  
 

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