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14 महीने बाद भारत लौटी महिला, सऊदी में बना लिया था 'गुलाम', सुनाई आपबीती
टीम डिजिटल अमर उजाला
Updated Sun, 24 Sep 2017 05:29 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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कर्नाटक की एक महिला को 14 महीने बाद सऊदी अरब से वापस लाया गया है। उन्हें कथित रूप से वहां एक घर पर गुलाम बनाकर रखा गया था। महिला का नाम जसिंथा मेनडोनका है। वह 42 साल की हैं। जसिंथा का दावा है कि मुंबई की एक एजेंसी ने उनको अच्छी नौकरी लगवाने का झांसा देकर कतर भेजा जहां उनको गुलाम बना लिया गया।
खबरों के मुताबिक, जसिंथा को पहले सऊदी अरब लेकर जाया गया। वहां से उनको यंबु भेजा गया। जो कि सऊदी का ही एक शहर है। वहां उनको 14 महीने तक कैद में रखा गया। पत्रकारों से बात करते हुए जसिंथा ने बताया कि जिस शख्स ने उनको गुलाम बनाकर रखा उसकी मां के तीन बड़े-बड़े घर थे।
तीनों घरों की साफ सफाई का जिम्मा जसिंथा पर था। इसके साथ ही उस शख्स की तीन पत्नियों और उनके बच्चों की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर थी। जसिंथा के मुताबिक, उनके साथ जानवरों जैसा बर्ताव किया जाता था और शख्स से सभी बच्चे उनको गुलाम ही कहते थे।
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खबरों के मुताबिक, जसिंथा को पहले सऊदी अरब लेकर जाया गया। वहां से उनको यंबु भेजा गया। जो कि सऊदी का ही एक शहर है। वहां उनको 14 महीने तक कैद में रखा गया। पत्रकारों से बात करते हुए जसिंथा ने बताया कि जिस शख्स ने उनको गुलाम बनाकर रखा उसकी मां के तीन बड़े-बड़े घर थे।
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तीनों घरों की साफ सफाई का जिम्मा जसिंथा पर था। इसके साथ ही उस शख्स की तीन पत्नियों और उनके बच्चों की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर थी। जसिंथा के मुताबिक, उनके साथ जानवरों जैसा बर्ताव किया जाता था और शख्स से सभी बच्चे उनको गुलाम ही कहते थे।
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भागने की कोशिश रही नाकाम
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
जसिंथा ने पिछले साल नवंबर में भागने की कोशिश की थी। लेकिन पुलिस ने उनको पकड़कर फिर से मालिक के हवाले कर दिया। इसके बाद जसिंथा पर होने वाला अत्याचार और ज्यादा बढ़ गया था। जसिंथा के मुताबिक, फिर उनको बुरी तरह पीटा गया और सिर भी दीवार में देकर मारा गया। जसिंथा ने बताया कि उनको मांगने पर पानी भी नहीं दिया जाता था।
अब जसिंथा अपने घर आ गई हैं। वह मानव अधिकारों के लिए लड़ रहे एक संगठन की मदद से 22 सितंबर को भारत लौटीं। वह कर्नाटक की रहने वाली हैं और अब अपने घरवालों के साथ हैं। जसिंथा चाहती हैं कि उनको फंसाने वाली एजंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
अब जसिंथा अपने घर आ गई हैं। वह मानव अधिकारों के लिए लड़ रहे एक संगठन की मदद से 22 सितंबर को भारत लौटीं। वह कर्नाटक की रहने वाली हैं और अब अपने घरवालों के साथ हैं। जसिंथा चाहती हैं कि उनको फंसाने वाली एजंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।