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जल्द ही आपका आसमान में घूमने का सपना होगा पूरा, इसरो ने की पूरी तैयारी
amarujala.com- Presented by: जया पाण्डेय
Updated Tue, 02 May 2017 11:12 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : Getty Images
इसरो की योजना ऐसे तकनीकी को विकसित करने की है जिसमें अंतरिक्ष यान की डॉकिंग और बर्थिंग की जा सके। इस प्रक्रिया में दो अंतरिक्ष वाहनों के ऑर्बिट यानी कक्षा को जोड़कर उसके बीच मैटेरियल स्थानांतरित किया जाता है। इसके लिए अंतरिक्ष विभाग को 10 करोड़ के अनुदान के साथ मंजूरी दे दी गई है। इस तकनीक के तहत इसरो अंतरिक्ष में मनुष्यों को स्थानांतरित कर सकेगा। लेकिन फिलहाल इसरो का लक्ष्य अंतरिक्ष यान में ईंधर भरकर उसके जीवनकाल को बढ़ाने और अंतरिक्ष यान की कक्षा में महत्वपूर्ण सिस्टम को हस्तांतरित करना है।
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वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि इस प्रयोग को इसरो स्पेस एप्लीकेशन सेंटर , बैंगलौर में 2016 में शुरू किया गया था। उन्होंने बताया कि इसरो ने इससे जुड़े बहुत से काम जमीनी स्तर पर पूरे कर लिए हैं । एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि अभी हमारी योजना 2 छोटे अंतरिक्ष यान का लॉन्च करने की है जिससे इस तकनीकी का परीक्षण अंतरिक्ष में हो सके। भारत उपग्रहों का विशाल समूह संचालित करता है और इस तकनीकी की मदद से पुन: ईंधन भरके इसरो उन उपग्रहों का जीवनकाल बढ़ा सकता है। इससे अंतरिक्ष में होने वाला प्रदूषण भा काफी हद तक कम हो जाएगा।
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उन्होंने आगे कहा कि ज्यादातर मामलों में उपग्रह को बंद करने के बाद भी अंतरिक्ष उपकरण अभी तक काम कर रहे हैं क्योंकि उनका ईंधन बचा हुआ होता है। इस तकनीक की मदद से भविष्य में हम अपने उपग्रहों का जीवनकाल कई गुना तक बढ़ा सकते हैं।
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भारत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का सदस्य बन चुका है। ह्यूमन स्पेस प्रोग्राम अभी इसकी योजना नहीं है लेकिन डॉकिंग सिस्टम का अंतिम उद्देश्य अंतरिक्ष में मनुष्यों को ले जाने और उन्हें वापस लाने का है। इसरो के पूर्व अध्यक्ष और इसरो के सलाहकार समिति के अध्यक्ष यू आर राव बताते हैं कि इस तकनीकी का इस्तेमाल लोगों को अंतरिक्ष में ले जाने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा इस तकनीकी का इस्तेमाल अंतरिक्ष यान के उपकरणों को बदलने के लिए भी किया जा सकता है।