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भारतीय युद्धपोत आईएनएस तलवार ने अरब सागर में अमेरिकी नौसेना के टैंकर से भरा ईंधन
Tue, 15 Sep 2020 08:41 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Tue, 15 Sep 2020 08:41 AM IST
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भारतीय युद्धपोत ने अमेरिकी टैंकर से ईंधन भरा
- फोटो : Twitter @indiannavy
भारतीय युद्धपोत ने सोमवार को एक रक्षा समझौते के प्रावधानों का उपयोग करते हुए उत्तरी अरब सागर में अमेरिकी नौसेना के टैंकर यूएसएनएस यूकोन से ईंधन भरने का काम किया। यह समझौता दो देशों को करीब मिलकर काम करने और एक-दूसरे के बेस (ठिकानों) का इस्तेमाल करने की अनुमति देता है।
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भारतीय नौसेना के प्रवक्ता ने कहा, 'उत्तरी अरब सागर में मिशन आधारित तैनाती पर आईएनएस तलवार ने एलईएमओए के तहत यूएस नेवी फ्लीट टैंकर यूएसएनएस यूकोन से ईंधन भरने का काम किया।' 2016 में भारत और अमेरिका के बीच लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एलईएमओए) का समझौता हुआ था।
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#INSTalwar on #MissionBasedDeployment in Northern Arabian Sea undertook refuelling with @USNavy Fleet Tanker #USNSYukon under #LEMOA (1/2). #BridgesofFriendship#Interoperability@SpokespersonMoD @DefenceMinIndia@MEAIndia @DrSJaishankar @DDNewslive pic.twitter.com/ykiJQw7hsT
विज्ञापन विज्ञापन— SpokespersonNavy (@indiannavy) September 14, 2020
यह समझौता दोनों देशों की सेनाओं को मरम्मत और पुनःपूर्ति के लिए एक दूसरे के ठिकानों का उपयोग करने और गहन सहयोग की इजाजत देता है। भारत ने फ्रांस, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ इसी तरह के समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रवक्ता ने कहा, 'यह भारतीय नौसेना और अमेरिकी नौसेना के बीच इंट्रोपेराबिलिटी (सूचना का आदान-प्रदान करने के लिए कंप्यूटर सिस्टम या सॉफ्टवेयर की क्षमता) को उजागर करने के अलावा समुद्री सुरक्षा को बढ़ाने के लिए उपस्थिति को सक्षम बनाता है।'
भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में प्रगति हुई है। दोनों देशों ने 2018 में सीओएमसीएएसए (कम्युनिकेशंस कॉम्पैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट) नामक एक अन्य समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो दोनों सेनाओं में इंट्रोपेराबिलिटी और अमेरिका से भारत में उच्च प्रौद्योगिकी की बिक्री प्रदान करने की अनुमति देता है।
जुलाई में भारतीय नौसेना ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के तट पर परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत यूएसएस निमित्ज के नेतृत्व में अमेरिकी नौसेना के साथ सैन्य अभ्यास किया था। यूएसएस निमित्ज दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत है। अमेरिकी नौसेना के साथ अभ्यास में भारतीय नौसेना के चार फ्रंटलाइन युद्धपोतों ने भाग लिया था।