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खोज: मरीजों को जानलेवा सुपरबग से बचाएगा एंटीबायोटिक अणु, भारतीय वैज्ञानिकों ने निकाला तोड़
Wed, 14 Jun 2023 05:47 AM IST
गुलाम अहमद
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
Published by: गुलाम अहमद
Updated Wed, 14 Jun 2023 05:47 AM IST
सार
वैज्ञानिक साक्ष्यों के अनुसार, आमतौर पर यह सुपरबग अस्पतालों में पाया जाता है। खासतौर पर आईसीयू या फिर वेंटिलेटर पर लंबे समय तक रहने वाले मरीजों को यह संक्रमित कर सकता है। अस्पताल में भर्ती 10 में से एक रोगी को यह संक्रमण हो सकता है। यह मिट्टी और पानी में भी पाया जाता है।
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- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
जानलेवा सुपरबग से लोगों को बचाने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों को बड़ी कामयाबी मिली है। लखनऊ स्थित केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीडीआरआई) और पुणे स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) के शोधकर्ताओं ने एक नए एंटीबायोटिक अणु की खोज की है, जो एसिनेटोबेक्टर बॉमनी नामक घातक सुपरबग को मार सकता है।
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2017 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एसिनेटोबेक्टर बॉमनी की पहचान दुनिया के सबसे घातक एंटीबायोटिक प्रतिरोधी जीवाणु के रूप में की है। सीडीआरआई के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सिद्धार्थ चोपड़ा ने कहा कि शुरुआत में नए मॉलिक्यूल के नतीजे काफी उत्साहजनक रहे हैं। इस खोज को आगे बढ़ाने से पहले अणुओं की एक लाइब्रेरी तैयार की गई। इसके बाद जानवरों पर परीक्षण किया। दुनियाभर में ऐसे कई सुपरबग हैं, जो घातक हैं। इनमें से अधिकतर का इलाज अभी तक नहीं है। कुछ दवाओं के जरिये इनसे बचाने की कोशिश की जाती है, लेकिन सामान्य तौर पर इन दवाओं के फायदे और नुकसान दोनों ही नजर आते हैं।
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दुनिया के 12 घातक सुपरबग
डब्ल्यूएचओ के बाद जैव प्रौद्योगिकी विभाग और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने हाल ही में भारतीय प्राथमिकता रोगजनक सूची तैयार की है। भारत में सबसे अधिक पाए जाने वाले 12 सुपरबग इस सूची में शामिल हैं, जिनमें से चार एसिनेटोबेक्टर बॉमनी सहित बहुत गंभीर और तीन गंभीर सुपरबग हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, एसिनेटोबैक्टर बैक्टीरिया (कीटाणुओं) का एक समूह है। इसके कई प्रकार हैं। इनमें से एसिनेटोबेक्टर बॉमनी इन्सानों के लिए बहुत गंभीर संक्रमण है, जो फेफड़ों में रक्त, मूत्र पथ और निमोनिया का कारण बन सकता है।
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अस्पताल में भर्ती मरीजों को रहता है खतरा...
वैज्ञानिक साक्ष्यों के अनुसार, आमतौर पर यह सुपरबग अस्पतालों में पाया जाता है। खासतौर पर आईसीयू या फिर वेंटिलेटर पर लंबे समय तक रहने वाले मरीजों को यह संक्रमित कर सकता है। अस्पताल में भर्ती 10 में से एक रोगी को यह संक्रमण हो सकता है। यह मिट्टी और पानी में भी पाया जाता है।
दवाओं का अधिक सेवन भी एक कारण...
जीवाणु रोगों के इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली दवाओं के अत्यधिक उपयोग के कारण जीवाणु रोगाणुरोधी प्रतिरोध भी विकसित होता है।
दुनिया में हर साल 13 लाख मौतें
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, दुनियाभर में सुपरबग के कारण हर वर्ष लगभग 13 लाख लोगों की मौत होती है। मेडिकल जर्नल लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, अगर ये सुपरबग इसी दर से फैलते रहे तो दुनिया में हर साल करीब एक करोड़ लोगों की मौत हो सकती है। स्कॉलर एकेडमिक जर्नल ऑफ फार्मेसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 15 सालों में दुनियाभर में एंटीबायोटिक के इस्तेमाल में 65 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। सुपरबग से संबंधित स्वास्थ्य देखभाल खर्चों से अमेरिका को पांच बिलियन डॉलर यानी करीब 411 अरब रुपये का प्रति वर्ष नुकसान हो रहा है।