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Indian Railways: क्यों करोड़ों रुपए के 80 इंजन सस्ते दाम में बेच रहा रेलवे? इस तरह कर सकते हैं खरीदी
Tue, 24 Sep 2024 03:24 PM IST
श्वेता महतो
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: श्वेता महतो
Updated Tue, 24 Sep 2024 03:24 PM IST
सार
पश्चिम मध्य रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि,भारत में अधिकांश रेलवे ट्रैक इलेक्ट्रीफाइड हो चुके है। लेकिन अभी भी बांग्लादेश समेत कुछ छोटे देशों में डीजल इंजन चलते हैं। इसके अलावा कई निजी लोग भी डीजल इंजन का इस्तेमाल करते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
आमतौर त्योहारों के सीजन में कपड़े और इलेक्ट्रिक उपकरण समेत कई सामनों की सेल बाजारों में बड़े पैमाने पर लगती हैं। इस बीच ट्रेन के इंजन की भी एक सेल लगाई गई है। भारतीय रेलवे ने यह सेल 80 से ज्यादा पुराने डीजल इंजन की लगाई है। दरअसल, पश्चिम मध्य रेलवे के पूरी तरह से इलेक्ट्रीफाइड होने गया है। इसके बाद से उनके पास खड़े 80 से ज्यादा डीजल इंजन का कोई उपयोग नहीं रह गया है। ऐसे में रेलवे ने इन्हें अपने एक यार्ड में खड़ा कर दिया है और इनकी सेल लगा दी है।
जानकारी के मुताबिक,पश्चिम मध्य रेलवे के कुछ इंजन कबाड़ हो चुके है। जबकि कुछ डीजल इंजनों की हालत बहुत अच्छी है और सभी चालू हालत में है। रेलवे ने अपना ट्रेकों का इलेक्ट्रिफिकेशन कर दिया हैं। ऐसे में इन पुराने डीजल इंजन की रेलवे को कोई जरुरत नहीं हैं। रेलवे को इन्हें चलाना और रखना महंगा पड़ने लगा है। इसलिए रेलवे ने इन करोड़ों रुपए के इंजन को बेचने का निर्णय लिया है।
पश्चिम मध्य रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि,भारत में अधिकांश रेलवे ट्रैक इलेक्ट्रीफाइड हो चुके है। लेकिन अभी भी बांग्लादेश समेत कुछ छोटे देशों में डीजल इंजन चलते हैं। इसके अलावा कई निजी लोग भी डीजल इंजन का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए पुराने लोकोमोटिव को बेचने के पश्चिम मध्य रेलवे सभी संभावनाएं तलाश कर रहा है। कुछ ओवर ऐज इंजनों को कबाड़ में भी बेचने की तैयारी है।
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रेलवे का एक डीजल इंजन लगभग 4500 हॉर्स पावर का होता है। एक नए डीजल इंजन की कीमत लगभग 10 करोड़ रुपए होती है। रेलवे ने कुछ वर्षों पहले अच्छी हालत में दो इंजन बेचे थे। इससे पश्चिम मध्य रेलवे को करीब 5 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे। इसके अलावा कबाड़ हो चुके ओवर ऐज 28 लोकोमोटिव 27 करोड़ रुपए में बेचे गए थे। आज की स्थिति में पश्चिम मध्य रेलवे के पास 80 लोकोमोटिव इंजन हैं, जिन्हें रेलवे बेचने की कोशिश कर रहा है लेकिन अबतक कोई खरीददार सामने नहीं आया है।
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जानकारी के मुताबिक,पश्चिम मध्य रेलवे के कुछ इंजन कबाड़ हो चुके है। जबकि कुछ डीजल इंजनों की हालत बहुत अच्छी है और सभी चालू हालत में है। रेलवे ने अपना ट्रेकों का इलेक्ट्रिफिकेशन कर दिया हैं। ऐसे में इन पुराने डीजल इंजन की रेलवे को कोई जरुरत नहीं हैं। रेलवे को इन्हें चलाना और रखना महंगा पड़ने लगा है। इसलिए रेलवे ने इन करोड़ों रुपए के इंजन को बेचने का निर्णय लिया है।
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पश्चिम मध्य रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि,भारत में अधिकांश रेलवे ट्रैक इलेक्ट्रीफाइड हो चुके है। लेकिन अभी भी बांग्लादेश समेत कुछ छोटे देशों में डीजल इंजन चलते हैं। इसके अलावा कई निजी लोग भी डीजल इंजन का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए पुराने लोकोमोटिव को बेचने के पश्चिम मध्य रेलवे सभी संभावनाएं तलाश कर रहा है। कुछ ओवर ऐज इंजनों को कबाड़ में भी बेचने की तैयारी है।
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रेलवे का एक डीजल इंजन लगभग 4500 हॉर्स पावर का होता है। एक नए डीजल इंजन की कीमत लगभग 10 करोड़ रुपए होती है। रेलवे ने कुछ वर्षों पहले अच्छी हालत में दो इंजन बेचे थे। इससे पश्चिम मध्य रेलवे को करीब 5 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे। इसके अलावा कबाड़ हो चुके ओवर ऐज 28 लोकोमोटिव 27 करोड़ रुपए में बेचे गए थे। आज की स्थिति में पश्चिम मध्य रेलवे के पास 80 लोकोमोटिव इंजन हैं, जिन्हें रेलवे बेचने की कोशिश कर रहा है लेकिन अबतक कोई खरीददार सामने नहीं आया है।