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Indian Railways: जून से सभी ट्रेनों में रेलवे मुहैया करवाएगा कंबल, चादर और तकिया, कोविड के चलते लगी थी रोक

Fri, 20 May 2022 02:17 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 20 May 2022 02:17 PM IST
सार

रेलवे मंत्रालय के अनुसार रोजाना करीब 7.5 लाख तकिया, चादर, कंबल आदि की जरूरत पड़ती है। चादरों की उम्र एक साल होती है। करीब दो साल इस्तेमाल न होने से काफी चादर खराब हो गई थीं। इसके अलावा कोरोना की पहली लहर में ट्रेनों में कोविड कोच बनाए गए थे, उनमें भी इनका इस्तेमाल किया गया...

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Indian Railways will provide blankets, bed sheets and pillows in all trains from June onwards
भारतीय रेलवे बेडरोल किट - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। एसी कोच में यात्रा करने वाले लोगों को अब अपने साथ चादर ले जाने की जरुरत नहीं होगी। दरअसल, रेलवे जून माह से सभी ट्रेनों में कंबल, चादर और तकिया मुहैया कराने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए रेलवे ने सभी जोनों को जल्द से जल्द यह सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मौजूदा समय में 529 जोड़ी ट्रेनों में यह सुविधा शुरू हो चुकी है। जबकि कुल 1114 जोड़ी ट्रेनों में यह सुविधा उपलब्ध करवाई जानी है।

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भारतीय रेलवे ने कोरोना संक्रमण रोकने के लिए ट्रेनों में तकिया, चादर, कंबल की सुविधा देनी बंद कर दी थी। इतना ही नहीं एसी क्लास से पर्दे भी हटा दिए थे, लेकिन अब संक्रमण कम होने के बाद रेलवे यह सुविधा दोबारा से शुरू कर चुका है। रेल मंत्रालय के अनुसार, कोरोना से पहले प्रीमियम ट्रेनों के अलावा मेल, एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनें मिलाकर 1700 जोड़ी से अधिक ट्रेनें चलती थीं। इन ट्रेनों में से 1114 जोड़ी ट्रेनों में तकिया, चादर, कंबल आदि की सुविधा उपलब्ध करानी है। मौजूदा समय 529 जोड़ी ट्रेनों में यह सुविधा चालू हो चुकी है और बची हुई 585 ट्रेनों में यह सुविधा अगले माह उपलब्ध करा दी जाएगी। इसके साथ ही, एसी क्लास में पर्दे भी दोबारा से लगाए जा रहे हैं। कुल 1308 जोड़ी ट्रेनों में पर्दे लगने हैं, जिनमें से 1225 जोड़ी ट्रेनों में लगाए जा चुके हैं और बची हुई 83 ट्रेनों भी जल्द पर्दे लगा दिए जांएगे।
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इसलिए हो रही है देरी

रेलवे मंत्रालय के अनुसार रोजाना करीब 7.5 लाख तकिया, चादर, कंबल आदि की जरूरत पड़ती है। चादरों की उम्र एक साल होती है। करीब दो साल इस्तेमाल न होने से काफी चादर खराब हो गई थीं। इसके अलावा कोरोना की पहली लहर में ट्रेनों में कोविड कोच बनाए गए थे, उनमें भी इनका इस्तेमाल किया गया। सरकार द्वारा 10 मार्च को सुविधा दोबारा से बहाल करने के आदेश के बाद केवल 40 फीसदी चादरों का स्टॉक था। अब दोबारा से चादर खरीदी जा रही हैं। इसके लिए सभी जोनों के डीआरएम को पॉवर दी गई हैं, जिससे वे जरूरत के अनुसार चादर आदि जल्द खरीद कर यह सुविधा उपलब्ध करा सकें।

कोरोना के मामले कम हुए तो फिर बढ़ने लगी मांग

कोरोना के मामले घटते ही लगातार यात्रियों द्वारा इसकी मांग की जा रही थी। क्योंकि अभी यात्रियों को अपने साथ घर से कंबल-चादर लेकर चलना पड़ता है, जिससे एक अतिरिक्त लगेज साथ में हो जाता है। रेलवे की ओर से सभी ट्रेनों के एसी कोचों में कंबल, तकिया और चादर की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। गरीब रथ जैसी ट्रेनों में ये वैकल्पिक सुविधा है। अब कोरोना के मामलों में गिरावट को देखते हुए रेलवे ने इस सुविधा का बहाल करने का एलान किया है।

अब तक चल रही थी यह व्यवस्था

रेलवे ने कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए यात्रियों को कई ट्रेनों में डिस्पोजेबल बेड रोल देने की सुविधा शुरू की थी। कई स्टेशनों पर भी यात्रियों के लिए बेड रोल लेने के लिए स्टॉल लगाए गए थे। इसके लिए यात्रियों को 150 से 300 रुपये तक चुकाना पडते थे। रेलवे ने यह किट यात्रियों की सुविधाओं को देखते हुए तैयार की थी। इसमें कंबल के साथ टूथपेस्ट, मास्क और हैंड सैनिटाइजर जैसी चीजें भी शामिल थीं।

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