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मालाबार युद्धाभ्यास: विक्रमादित्य और अमेरिकी सुपरकैरियर निमित्ज गोवा के तट पर करेंगे अभ्यास
Sat, 07 Nov 2020 10:18 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Sat, 07 Nov 2020 10:18 AM IST
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मालाबार नौसेना अभ्यास 2020
- फोटो : Twitter: @indiannavy
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भारत और चीन के बीच मई की शुरुआत से सीमा पर तनाव जारी है। इसी बीच भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान मिलकर गोवा के तट पर 17 से 20 नवंबर तक मालाबार नौसेना युद्धाभ्यास करेंगे। इस अभ्यास में भारतीय नौसेना का जहाज विक्रमादित्य और अमेरिकी सुपरकैरियर निमित्ज के साथ ऑस्ट्रेलियाई और जापानी नौसेना के दो विध्वंसक हिस्सा लेंगे।
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विक्रमादित्य पर मिग-29के और निमित्ज पर F-18 लड़ाकू विमान भी युद्धाभ्यास में हिस्सा लेंगे। इसके अलावा दो अन्य देश जो भारत और अमेरिका की तरह क्वाड का हिस्सा हैं वो डोमेन बहु-संचालन क्षमता को मजबूत करेंगे। इस युद्धाभ्यास के जरिए चारों देशों को एक-दूसरे की नौसेनाओं, कमांडरों और कर्मियों के प्रशिक्षण के लोकाचार और स्तर को समझने में मदद मिलेगी।
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यह अभ्यास फारस की खाड़ी और अरब सागर के बीच के क्षेत्र में गश्त करने वाले कम से कम 70 विदेशी युद्धपोतों के साथ काफी भीड़भाड़ वाले वातावरण में होगा। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की नौसेना के युद्धपोत आसपास के क्षेत्र में नहीं हैं, लेकिन बहुत दूर भी नहीं हैं। वे संभवतः अदन की खाड़ी से समुद्री डाकू विरोधी अभियान चला रहे हैं।
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शीर्ष नौसैनिक कमांडरों के अनुसार, भारतीय नौसेना पूरी तरह से पूर्वी और पश्चिमी समुद्री तट पर तैनात है और यदि पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में स्थिति बदतर हो जाती है तो आकस्मिक स्थिति के लिए भी तैयार है। विश्लेषकों का कहना है कि यह स्पष्ट है कि नेविगेशन के लिए संचार के समुद्री लेन को खुला रखने के लिए क्वाड सदस्य प्रतिबद्ध हैं। इसके अलावा वे दक्षिण चीन सागर में पीएलए नौसेना द्वारा पैदा की गई किसी भी चुनौती से निपटने के लिए भी तैयार हैं।
विश्लेषकों ने कहा, भारतीय नौसेना अगले साल तक अपनी दूसरी परमाणु ऊर्जा चालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी, आईएनएस अरिघाट के साथ स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत को कमीशन कर सकती है। इससे भारत मलक्का स्ट्रेट्स से लेकर अदन की खाड़ी तक और उससे भी आगे तक नजर रख सकेगा।
नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह के नेतृत्व में बल का ध्यान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में तेजी से विकसित हो रहे सैन्य ढांचे पर रहा है। नौसेना तीसरे विमानवाहक पोत के निर्माण के लिए भी इच्छुक है।