Indian Navy: भारत ने अरब सागर में दिखाई अपनी ताकत, 35 से ज्यादा विमानों-दो युद्धपोतों के साथ किया युद्धाभ्यास
भारतीय नौसेना ने समुद्री विस्तार में निरंतर हवाई संचालन सुनिश्चित करने और भारत के राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्धता को रेखांकित करने में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।
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विस्तार
भारतीय नौसेना ने चीन की बढ़ती मौजूदगी के बीच अरब सागर में एक विराट सैन्य ऑपरेशन का अभ्यास कर साबित किया कि पूरा हिंद महासागर भारत की सुरक्षा में है। मित्र देशों को भी इस सुरक्षा में आश्वस्त होकर रहना चाहिए। इसे हालिया वर्षों में नौसेना का सबसे बड़ा अभ्यास कहा जा रहा है। नौसेना ने बताया कि इसमें विमान वाहक युद्धपोत आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत सहित 35 प्रमुख लड़ाकू विमानों ने शक्ति दिखाई।
दोनों विमानवाहक युद्धपोत ऑपरेशन के समय समुद्र में तैरती ‘संप्रभु एयरफील्ड’ की तरह केंद्रीय भूमिका में थे। उन्होंने ‘मोबाइल बेस’ बनकर बड़ी संख्या में विमानों को टेकऑफ करने का प्लेटफॉर्म प्रदान किया। ट्विन कैरियर बैटल ग्रुप (सीबीजी) श्रेणी के इस अभ्यास की वास्तविक तारीख नौसेना ने नहीं बताई, लेकिन कहा कि यह प्रमाण है कि समुद्र आधारित वायु शक्ति सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है। हिंद महासागर व इससे परे क्षेत्र में सुरक्षा साझेदार के तौर पर भारत की प्रधान भूमिका भी प्रमाणित हुई। सीबीजी को कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी कहा जाता है, इस श्रेणी में वे विराट नौसैनिक बेड़े आते हैं, जिनमें विमान वाहक युद्धपोत, बड़ी संख्या में जलपोत विध्वंसक, मध्यम आकार के युद्धपोत व अन्य सैन्य जहाज शामिल हों।
#WATCH | Indian Navy undertakes twin-carrier CBG ops with more than 35 aircraft in the Arabian Sea, demonstrating its formidable capability in ensuring sustained air operations across the maritime expanse & underscoring commitment to safeguarding India’s national interests. pic.twitter.com/tbgvnIMa13
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) June 10, 2023
देश हितों की सुरक्षा का प्रमाण
नौसेना के प्रवक्ता कमांडर विवेक मधवाल ने कहा, भारत ने एक बड़े सामुद्रिक क्षेत्र में लगातार हवाई ऑपरेशन सफलता से चलाने की मजबूत क्षमता साबित कर दी है।
समुद्र से हवाई ऑपरेशन की क्षमता दिखाई
आईएनएस विक्रमादित्य व विक्रांत ने दर्शा दिया कि उन्हें किसी भी समय समुद्र में कहीं भी तैनात किया जा सकता है। इससे सैन्य ऑपरेशन व मिशन को लचीलापन मिलेगा, नए खतरों का समय पर जवाब देने की क्षमता आएगी। अब दुनिया में कहीं भी समुद्र से हवाई ऑपरेशन किए जा सकेंगे।
समुद्र आधारित वायु शक्ति की अहमियत
युद्धपोतों ने रणक्षेत्र में सफलता से ऑपरेशन अंजाम दिए। इससे साबित हुआ कि समुद्र आधारित वायुशक्ति की अहम भूमिका है। अभ्यास से देश की सुरक्षा रणनीति और क्षेत्रीय स्थायित्व बनाए रखने में विमान वाहक पोतों की अहमियत दिखी।
शक्तिप्रदर्शन में शामिल
- दोनों युद्धपोत, अन्य जलपोत के बेड़े, पनडुब्बियां। विमानवाहक युद्धपोतों से संचालित वायु सेना के सभी विमान व अन्य सैन्य उपकरण।
- मिग-29के, अन्य लड़ाकू विमान, एमएच 60 आर, कामोव, सी-किंग, चेतक व एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर शामिल।
- यह अभ्यास मित्र देशों को अपनी सुरक्षा पर आश्वस्त करेगा। क्षेत्र की सामूहिक सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना की क्षमता का उन्हें पता रहेगा।
- मई 2023 : आईएनएस विक्रांत पर रात में मिग-29के उतारा गया, जिसने इस विमान वाहक पोत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति व स्थायित्व के लिए अहम भूमिका निभाने वाला साबित किया।
- सितंबर 2022 : पीएम नरेंद्र मोदी ने आईएनएस विक्रांत को नौसेना में शामिल किया। भारत उन चुनिंदा देशों में आ गया, जो 40,000 टन से भारी विमानवाहक युद्धपोत बना सकते हैं।
- 23 हजार करोड़ में बने आईएनएस विक्रांत में वायु सुरक्षा नेटवर्क व एंटी-शिप मिसाइल प्रणाली है। 30 लड़ाकू जेट विमान व हेलिकॉप्टर तैनात करने की क्षमता है।