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लद्दाख में चीनी आक्रामकता से निपटेगा नौसेना का फॉरवर्ड पॉश्चर
Sun, 19 Jul 2020 10:40 AM IST
Tanuja Yadav
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Sun, 19 Jul 2020 10:40 AM IST
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नौसेना का शौर्य
- फोटो : Social Media
एक तरफ जहां भारतीय सेना और वायुसेना अक्साई चीन सीमा पर तैनात है तो वहीं भारतीय नौसेना ने अपने ये आश्वासन दिया है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में पीपुल्स लिबरेशन पार्टी का कोई खतरा फिलहाल नहीं है। मुंबई, दिल्ली और विशाखापट्टनम के सूत्रों के मुताबिक 15 जून को गलवां घाटी में हुए झड़प के बाद, नौसेना ने अपनी तैनाती बढ़ा दी थी।
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भारतीय नौसेना ने पूर्वीय और पश्चिमी समुद्री तटों पर अपने एयरक्राफ्ट और पनडुब्बी की स्थिति और कड़ी कर दी थी ताकि मलक्का जलसंधि से लेकर अप्रीका के सींग तक चीनी खतरे को भांपा जा सके। पीएलए नौसेना युद्धपोत एंटी पायरसी ऑपरेशन कवर का इस्तेमाल करती है, उनका रख-रखाव और लॉजिस्टिक बेस बलूचिस्तान में है।
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पीएलए युद्धपोत ने मलक्का जलसंधि के जरिए भारतीय महासागर में प्रवेश कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय पानी का संचालन कर रहे हैं। गलवां घाटी की झड़प के बाद भारतीय नौसेना ने सुनिश्चित किया कि तीन पीएलए युद्धपोत ने गल्फ ऑफ एडेन में साफ पानी ले लिया है।
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एक वरिष्ठ कमांडक ने कहा कि चीनी युद्धपोत जो इंडोनेशिया के जरिए भारतीय महासागर में घुसने की योजना बना रहे थे, भारतीय नौसेना की तैयारियों को देखकर पीछ हट गए हैं। पीएलए नौसेना ने म्यांमार, श्रीलंका, पाकिस्तान, ईरान और पूर्व अफ्रीका के एक तट पर कब्जा कर लिया है ताकि भारतीय नौसेना को रोकने के साथ-साथ अमेरिकी सेंट्रल कमांड फोर्स की उपस्थिति, फ्रांस और ब्रिटिश नौसेना को चुनौती दे सके।
म्यांमार के क्यौकप्यु बंदरगाह पर बीजिंग का 70 फीसदी हिस्सा है, जो बंगाल की खाड़ी की ओर स्थित है, दक्षिण श्रीलंका का हमबंथोटा बंदरगाह भारतीय महासागर को प्रभावित करता है, पाकिस्तान का ग्वाडर बंदरगाह गल्फ ऑफ ओमान की ओर स्थित है और ईरान का जास्क बंदरगाह पर्सियन गल्फ के छोर पर स्थित है।
चीन के कब्जे से साफ होता है कि भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा नियोजक अपनी अखंडता को बरकरार रखते हुए कुछ 1062 द्विपों एडवांस लैंडिंग ग्राउंड बनाने की ओर अग्रसर हैं। ज्यादा एयरक्राफ्ट खरीदने की बजाय, भारत की योजना अंडमान निकोबार और लक्षद्वीप में सैनिक सुविधाओं को और अपग्रेड करना है।
चीन को जवाब देने के लिए अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में भारतीय एयरबेस के नेटवर्क को बढ़ाना है ताकि नेविगेशन की आजादी और ओवरफ्लाइट्स का रख-रखाव किया जा सके और दक्षिण चीन सागर की तरह यहां पाबंदी ना लगे।