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गौरव: 40 साल बाद सेवामुक्त हो रहा है भारतीय नौसेना का यह जहाज, कल विशाखापत्तनम में कार्यक्रम का होगा आयोजन

Thu, 03 Jun 2021 03:16 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रियंका तिवारी Updated Thu, 03 Jun 2021 03:16 PM IST
सार

भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस संध्यायक ने राष्ट्र को 40 सालों तक अपनी सेवा दी। अब 4 जून को यह जहाज सेवामुक्त हो रहा है। ऐसे में आईएनएस संध्याक का सेवामुक्ति समारोह विशाखापत्तनम में आयोजित किया जाएगा। 

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Indian Navy INS Sandhayak ship of is being decommissioned after 40 years tomorrow the program will be organized in Visakhapatnam
भारतीय नौसेना का जहाज आईएनएस संध्यायक - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारतीय नौसेना के लिए कल का दिन बेहद अहम है। दरअसल, भारतीय नौसेना के स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण जहाज आईएनएस संध्यायक, 40 वर्षों तक राष्ट्र की सेवा करने के बाद कल यानी शुक्रवार (4 जून) को सेवामुक्त हो जाएगा। इस मौके पर नेवल डॉकयार्ड विशाखापत्तनम में आईएनएस संध्याक का सेवामुक्ति समारोह आयोजित किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण समारोह में कोरोना प्रोटोकॉल के चलते केवल इन-स्टेशन अधिकारी और नाविक ही शामिल हो सकेंगे। कार्यक्रम के दौरान कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाएगा।

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जहाज की परिकल्पना
इस जहाज की परिकल्पना तत्कालीन चीफ हाइड्रोग्राफर, रियर एडमिरल एफएल फ्रेजर ने की थी, जिन्होंने भारत में इस हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण पोत का डिजाइन और निर्माण भी किया था। नौसेना मुख्यालय द्वारा डिजाइन को अंतिम रूप दिए जाने के बाद, जहाज का निर्माण 1978 में कील बिछाकर जीआरएसई कोलकाता (तब कलकत्ता) में शुरू हुआ था। जहाज को भारतीय नौसेना में 26 फरवरी, 1981 को वाइस एडमिरल एमके रॉय द्वारा कमीशन किया गया था, जो तत्कालीन फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ पूर्वी नौसेना कमान (ईएनसी) थे।
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जहाज ने लगभग 200 प्रमुख हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण किए
अपनी कमीशनिंग के समय से यह जहाज अल्मा-मेटर रहा है और प्रायद्वीपीय जल के पूर्ण हाइड्रोग्राफिक कवरेज की नींव रखने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जहाज को डिजाइन करना एक बड़ी सफलता थी जिसने भारतीय नौसेना के सभी सर्वेक्षण जहाजों के लिए हाल ही में संशोधनों में मार्ग प्रशस्त किया। सेवा में रहते हुए इस जहाज ने लगभग 200 प्रमुख हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण किए हैं और देश के पूर्वी और पश्चिमी तटों, अंडमान समुद्र और पड़ोसी देशों में भी कई छोटे सर्वेक्षणों का हिस्सा रहा है।
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सर्वेक्षण मिशनों के अलावा यह कई महत्वपूर्ण अभियानों में सक्रिय भागीदार रहा है। ऑपरेशन पवन में इस जहाज ने साल 1987 में श्रीलंका में भारतीय शांति सेना की सहायता की। वहीं,  ऑपरेशन सारोंग और ऑपरेशन रेनबो के दौरान साल 2004 की सुनामी के बाद इस जहाज ने मानवीय सहायता प्रदान करने वाले काम किए। इसने पहले संयुक्त इंडो-यूएस एचएडीआर अभ्यास 'टाइगर-ट्रायम्फ' में भी भाग लिया था।

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