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भारत में महिलाओं से दो-तिहाई ज्यादा है पुरुषों की कमाई
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर
Updated Thu, 09 Mar 2017 07:26 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
अंततराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर एक्सेंचर द्वारा किए गए एक सर्वे में भारत में पुरुष और महिलाओं की कमाई के बीच बड़े फर्क का खुलासा हुआ है। इस नतीजे में सामने आया है कि भारत में महिलाओं की तुलना में पुरुषों की कमाई दो-तिहाई ज्यादा है। इसका मतलब है कि भारत में पुरुष महिलाओं से 67% ज्यादा कमाई करते हैं।
इस सर्वे में कई उद्योगों को शामिल किया गया और नतीजे वैश्विक आंकड़ो से कहीं ज्यादा पाए गए। वैश्विक स्तर पर पुरुष महिलाओ से 40 फीसदी ज्दाया कमाई करते हैं। ‘गेटिंग टू इक्वल 2017’ के नाम से किए गए इस सर्वे में 29 देशों की 31 इंडस्ट्रीज के 28,000 पुरुष और महिला अंडरग्रेजुएट कर्मचारियों की 12 महीनों सैलरी पर शोध और आंकलन किया गया। हालांकि, इसमें बोनस को शामिल नहीं किया गया।
एक्सेंचर इंडिया की प्रमुख रेखा मेनन ने कहा, “इस फर्क की कई वजह हैं। इसमें सामाजिक और सांस्कृतिक कारण प्रमुख हैं। हमारे समाज में आज भी औरतों को घर की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। इसके अलावा कामकाजी महिलाएं ज्यादा पैसों की मांग नहीं करतीं।”
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इस शोध में यह भी सामने आया कि यदि ऐसे ही फर्क जारी रहा, तो विकसित देशों में 2080 तक और विकासशील देशों में 2168 तक यह खत्म नहीं होगा। साथ ही साल 2030 तक यह फर्क 19 फीसदी तक कम हो जाएगा, जो करीब 39 बिलियन डॉलर देश की आय में जोड़ेंगी।
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इस सर्वे में कई उद्योगों को शामिल किया गया और नतीजे वैश्विक आंकड़ो से कहीं ज्यादा पाए गए। वैश्विक स्तर पर पुरुष महिलाओ से 40 फीसदी ज्दाया कमाई करते हैं। ‘गेटिंग टू इक्वल 2017’ के नाम से किए गए इस सर्वे में 29 देशों की 31 इंडस्ट्रीज के 28,000 पुरुष और महिला अंडरग्रेजुएट कर्मचारियों की 12 महीनों सैलरी पर शोध और आंकलन किया गया। हालांकि, इसमें बोनस को शामिल नहीं किया गया।
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एक्सेंचर इंडिया की प्रमुख रेखा मेनन ने कहा, “इस फर्क की कई वजह हैं। इसमें सामाजिक और सांस्कृतिक कारण प्रमुख हैं। हमारे समाज में आज भी औरतों को घर की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। इसके अलावा कामकाजी महिलाएं ज्यादा पैसों की मांग नहीं करतीं।”
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इस शोध में यह भी सामने आया कि यदि ऐसे ही फर्क जारी रहा, तो विकसित देशों में 2080 तक और विकासशील देशों में 2168 तक यह खत्म नहीं होगा। साथ ही साल 2030 तक यह फर्क 19 फीसदी तक कम हो जाएगा, जो करीब 39 बिलियन डॉलर देश की आय में जोड़ेंगी।