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Britain: भारतीय लेक्चरर ने ब्रिटेन में विश्वविद्यालय के खिलाफ जीती कानूनी लड़ाई, नस्लीय भेदभाव जुड़ा है मामला

Wed, 14 Dec 2022 05:32 PM IST
Jeet Kumar पीटीआई, लंदन
पीटीआई, लंदन Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 14 Dec 2022 05:32 PM IST
सार

लेक्चरर ने नवंबर 2020 में विश्वविद्यालय की शिकायत प्रक्रिया के तहत शिकायत की कि उनके साथ यूके के समानता अधिनियम 2010 के तहत भेदभाव किया गया था। 

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Indian lecturer wins discrimination case against UK university
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

ब्रिटेन में एक भारतीय लेक्चरर ने यूनिवर्सिटी ऑफ पोर्ट्समाउथ के खिलाफ नस्लीय भेदभाव मामले में कानूनी लड़ाई जीत ली है। लेक्चरर का नाम काजल शर्मा है जो यूनिवर्सिटी ऑफ पोर्ट्समाउथ में पांच साल से कार्यरत थी। यूनिवर्सिटी ने उनको संगठनात्मक अध्ययन और मानव संसाधन प्रबंधन के लिए एसोसिएट हेड के रूप में निश्चित अवधि के लिए नियुक्त किया गया था।

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हालांकि जब उन्होंने पद के लिए फिर से आवेदन किया गया तो उनकी अनदेखी की गई। उन्होंने नवंबर 2020 में विश्वविद्यालय की शिकायत प्रक्रिया के तहत शिकायत की कि उनके साथ यूके के समानता अधिनियम 2010 के तहत भेदभाव किया गया था। 
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शिकायत में कहा गया था कि लेक्चरर जिस पद पर पांच साल से कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी कर रही थी। लेकिन उनको फिर से उसी नौकरी के लिए आवेदन करने का अधिकार था, लेकिन वहां के अधिकारी ने अश्वेत और अल्पसंख्यक जातीय कर्मचारियों के आवेदन स्वीकार नहीं किए, बल्कि इसकी जगह गोरे लोगों के नौकरी के लिए आवेदन मंजूर कर लिए और कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। 
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साउथेम्प्टन में मामले की सुनवाई के दौरान, काजल शर्मा ने ट्रिब्यूनल को सूचित किया कि उनके प्रबंधक डॉ गैरी रीस के साथ उनके संबंध अच्छे नहीं थे। एक उदाहरण का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि रीस ने उसे उसके पिता की मृत्यु के तुरंत बाद विश्वविद्यालय का काम करने के लिए कहा था और फिर उसके पति ने इस बात की पुष्टि की और साक्ष्य दिया कि कैसे रीस ने भारत की तत्काल यात्रा योजनाओं के बारे में सूचित किए जाने पर उसकी पत्नी को विभिन्न कार्यों को पूरा करने के लिए कहा। 


ट्रिब्यूनल ने फैसले में कहा गया है कि काजल शर्मा द्वारा सबूतों से इस बात की पुष्टि होती है कि वह नस्लभेद का शिकार हुई हैं।आगे कहा कि हम यह निर्धारित करने में सक्षम नहीं हैं कि क्या होता अगर प्रोफेसर रीस भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं होते तो प्रक्रिया में नस्ल भेदभाव की बात सामने आती। वहीं विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि पोर्ट्समाउथ विश्वविद्यालय में नस्ल भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है।

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