फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Indian currency breaches 72 mark against US dollar

रुपये में रिकॉर्ड गिरावट ने बढ़ाई टेंशन, पेट्रोल-डीजल और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद पर करनी होगी जेब ढीली

Thu, 06 Sep 2018 05:06 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 06 Sep 2018 05:06 PM IST
विज्ञापन
Indian currency breaches 72 mark against US dollar

डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। गुरुवार को भी रुपये में भारी गिरावट देखने को मिली। डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। अब एक डॉलर की कीमत 72 रुपये के पार हो गई है। ठीक एक माह पहले 6 अगस्त को डॉलर के मुकाबले रुपया 68.50 के स्तर पर था, जो 6 सितंबर को बढ़कर 71.90 के स्तर पर पहुंच गया था। रुपया पहली बार 31 अगस्त को 71 रुपये पर आया था।

विज्ञापन


यह भी पढ़ें: अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 72 पार
विज्ञापन


जेटली ने बताया क्यों डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहा रुपया

डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहे रुपए पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि इसके लिए कोई घरेलू आर्थिक स्थिति कारण नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि आप घरेलू आर्थिक स्थिति और वैश्विक स्थिति को देखते हैं, तो इसका कारण घरेलू नहीं बल्कि वैश्विक है। दुनियाभर की करेंसी गिर रही है। उन्होंने कहा कि हमें यह ध्यान में रखना चाहिए कि डॉलर लगभग हर मुद्रा के खिलाफ मजबूत हुआ है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


ग्लोबल चिंताओं से भी रुपये पर दबाव

महीने के अंत में डॉलर की खरीदारी से रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। साथ ही ग्लोबल चिंताओं से भी रुपये पर दबाव बना है। रुपये में यह गिरावट अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापार तनाव, अर्जेंटीना एवं तुर्की के बढ़ते संकट और कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में वृद्धि ने विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में धारणा की वजह से है। दक्षिण अफ्रीका और तुर्की की करेंसी भी गिरी हैं। वहीं जुलाई व्यापार घाटा 18 अरब डॉलर होने से स्थिति बिगड़ी है। ट्रेडर्स, हेज फंड्स ने जुलाई तक लॉन्ग पोजीशन बनाई है।

फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम 

Indian currency breaches 72 mark against US dollar

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और डॉलर के मुकाबले रुपया के कमजोर पड़ने से बृहस्पतिवार को भी पेट्रोल एवं डीजल के दाम में बढ़ोतरी हुई। इससे एक दिन पहले दाम में कोई फेरबदल नहीं हुआ था लेकिन इससे पहले लगातार दस दिनों तक दोनों ईंधनों के दाम बढ़े थे। इसी के साथ दोनों ईंधनों के दाम अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं।
  
इंडियन ऑयल से मिली जानकारी के अनुसार बृहस्पतिवार को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 20 पैसे बढ़कर 79.51 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गई, जबकि डीजल की कीमत 21 पैसे बढ़कर 71.55 रुपए हो गई। इससे एक दिन पहले यहां पेट्रोल की कीमत 79.31 रुपए प्रति लीटर, जबकि डीजल 71.34 रुपये प्रति लीटर थी। उल्लेखनीय है कि इस समय डॉलर के मुकाबले रुपए का विनिमय दर 72 रुपये का स्तर पार कर चुका है। 

महंगे हो सकते हैं इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद 

रुपये में लगातार आ रही गिरावट से इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं। अगर हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतों में 5 से 10 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है।  

बाजार विशेषज्ञों की मानें, तो अगर आप फ्रिज, टीवी, वाशिंग मशीन या मोबाइल फोन खरीदने के लिए आगामी दीपावली के त्योहारी सत्र का इंतजार कर रहें हैं, तो संभव है कि यह इंतजार आपको महंगा पड़े। क्योंकि डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत ने कंपनियों को परेशानी में डाल दिया है। 

क्या होता है रुपये का गिरना

डॉलर या किसी भी और विदेशी मुद्रा के मुकाबले रुपये का एक्सचेंज प्राइस जब घट जाती है तो उसे रुपये में गिरावट कहते हैं। यानी एक डॉलर के बदले ज्यादा रुपये देने पड़ते हैं।  जैसे एक दिन पहले 70 रुपये में मिल रहा डॉलर, अगले ही दिन 71 रुपये में बिकने लगे तो इसका मतलब ये हुआ कि डॉलर के मुकाबले रुपये की एक्सचेंज प्राइस कम हो गयी, यानी रुपये में गिरावट शुरू हो गई। 

क्यों गिर रहा है रुपया

विशेषज्ञों की मानें तो भारत में इन दिनों व्यापार का संतुलन काफी खराब हालत में हैं यानी हम जितना इंपोर्ट करते हैं उसके मुकाबले एक्सपोर्ट की दर बहुत कम है जिसकी वजह से बाजार में डॉलर की मांग बढ़ गई है। मतलब जब मांग ज्यादा हो और सप्लाई कम हो रही होती है तो व्यापार में घाटे की बढ़ोतरी होती है और जिसका सीधा प्रभाव रुपये के गिरना है। इन सबके बीच सीधे विदेशी निवेश में भी गिरावट आ रही है। इन दोनों ही वजहों से डॉलर की मांग बढ़ रही है, डॉलर महंगा हो रहा है और रुपया दिनों दिन नीचे गिर रहा है। 

जब मनमोहन सरकार के समय गिरा था रुपया

2013 में जब मनमोहन सिंह की सरकार थी तब भी रुपया रोज गिर रहा था। 2 जनवरी 2013 को रुपया डॉलर के मुकाबले 54.24 पर था जो 3 सितंबर को 67.635 तक गिर गया था उस समय भी रुपया का गिरना मीडिया की हेडलाइंस बनी थी। उस समय कांग्रेस नीत यूपीए सरकार के नियंत्रण से बाहर हो गए थे और माना ये जा रहा है कि जिस तरह रुपया अपने निम्नतर स्तर पर है अब वह दिन दूर नहीं जब भाजपा के हाथों से ये मामला निकलता जा रहा है। और हां, बीजेपी सरकार के पास 2018 में नियंत्रण खोने पर बहानेबाजी की गुंजाइश कांग्रेस के मुकाबले बहुत कम होगी। कारण यह है कि इन पांच सालों में आर्थिक आंकड़े बहुत बदल गए हैं

2013 बनाम 2018

 2013 में फरवरी से अगस्त के बीच रुपया 23 फीसदी टूट गया था। 2018 में जनवरी से सितंबर के बीच रुपया 11 फीसदी से अधिक टूटा है। 
 2013 में वित्तीय घाटा जीडीपी का 4.8 फीसदी  था। 2018 में यह 3.5 फीसदी के आसपास है। 
 2013 में चालू खाता घाटा जीडीपी का 3.4 फीसदी था। 2018 में घाटे में तेज वृद्धि के बावजूद यह 2 फीसदी से कम है। 
 2013 में फरवरी से अगस्त के बीच कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत औसतन 107 डॉलर प्रति बैरल से कम थी। 2018 में जनवरी से सितंबर के बीच यह औसतन 75 डॉलर प्रति बैरल रही। 
2013 में सितंबर के पहले सप्ताह तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 285 अरब डॉलर था। अभी विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 415 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed