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ED: बांग्लादेश जा रहे प्याज से इंडियन बैंक को 26 करोड़ का नुकसान, जाली बिलों के चलते बैंकों ने रोका था भुगतान

Wed, 10 Dec 2025 07:25 PM IST
संध्या डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला Published by: संध्या Updated Wed, 10 Dec 2025 07:25 PM IST
सार

बांग्लादेश को प्याज निर्यात करने के लिए पूर्व इलाहाबाद बैंक (इंडियन बैंक) से 25 करोड़ रुपये प्राप्त किए। आरोपियों ने जाली निर्यात बिल जमा करके बैंक को 26.72 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा दिया। प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत विशेष न्यायालय में अभियोग दर्ज किया है। 

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Indian Bank suffers Rs 26 crore loss due to onions going to Bangladesh
प्याज - फोटो : Freepik.com

विस्तार

पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश जाने वाले 'प्याज' के चलते 'इंडियन बैंक' को 26 करोड़ का नुकसान हो गया। जाली निर्यात बिल तैयार कराए गए। नतीजा, बांग्लादेश के कई बैंकों ने भुगतान रोक दिया। पड़ोसी मुल्क में प्याज का निर्यात करने वाले स्व: पूर्णेंदु दास ने अपनी स्वामित्व वाली फर्म मेसर्स केपीएस एंटरप्राइज के माध्यम से 8 करोड़ रुपये की पैकिंग क्रेडिट सुविधा और 2 करोड़ रुपये की विदेशी बिल नेगोशिएशन सुविधा का लाभ भी उठाया। बांग्लादेश को प्याज निर्यात करने के लिए पूर्व इलाहाबाद बैंक (इंडियन बैंक) से 25 करोड़ रुपये प्राप्त किए। जाली निर्यात बिल जमा करके बैंक को 26.72 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा दिया। 

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने 8 दिसंबर, 2025 को पी.के. एंटरप्राइजेज के मालिक प्रसेनजीत दास, चंदन सरकार, ललतू साहा और तीन अन्य के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत विशेष न्यायालय (पीएमएलए), कोलकाता में अभियोग शिकायत (पीसी) दर्ज की है। यह मामला स्वर्गीय पूर्णेंदु दास, मेसर्स केपीएस एंटरप्राइज के मालिक द्वारा अपने बेटे प्रसेनजीत दास और अन्य के साथ मिलीभगत से रची गई बैंक धोखाधड़ी से संबंधित है। 

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ईडी की जांच में पता चला है कि बांग्लादेश के विभिन्न बैंकों में खाते खोले गए। इलाहाबाद बैंक द्वारा केपीएस एंटरप्राइज के लिए जारी किए गए लेटर ऑफ क्रेडिट के तहत 25 करोड़ रुपये की कुल राशि के साइट बिल बकाया हो गए थे। जब इलाहाबाद बैंक ने निर्यात बिलों के भुगतान की मांग की, तो बांग्लादेश के लेटर ऑफ क्रेडिट जारी करने वाले बैंकों ने माल की प्राप्ति न होने का हवाला देते हुए भुगतान करने से इनकार कर दिया। दिवंगत पूर्णेंदु दास ने ऋण की राशि को अपने बेटे की प्रोप्राइटरशिप फर्म, पीके एंटरप्राइज और अपने निजी खातों में स्थानांतरित कर दिया। 

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इसके परिणामस्वरूप पूर्व इलाहाबाद बैंक से लिए गए धन का गबन हुआ है। उन्होंने स्वयं सहित विभिन्न माल (प्याज) आपूर्तिकर्ताओं के नाम पर 70 बियरर चेक भी जारी किए। केपीएस एंटरप्राइज के कर्मचारियों के माध्यम से उन 70 बियरर चेक का उपयोग करके नकद राशि निकाली। इस मामले में, पहले 34.42 लाख रुपये के मूल्य की पांच अचल संपत्तियों को जब्त करने का एक अस्थायी कुर्की आदेश जारी किया गया था।

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