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पदोन्नति: सेवानिवृत्ति के चार साल बाद दो ब्रिगेडियर बने मेजर जनरल
Sun, 06 Jun 2021 04:31 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 06 Jun 2021 04:31 AM IST
सार
- सेना से सेवानिवृत्त होने के चार साल बाद दो ब्रिगेडियर को सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मिली पदोन्नति।
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सर्वोच्च न्यायालय
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद, दो ब्रिगेडियर सेना से सेवानिवृत्त होने के चार साल बाद मेजर जनरल के रैंक पर पदोन्नत किए गए। उनकी पदोन्नति सेना में रहने के दौरान दो साल से लंबित थी। यह मामला दो अधिकारियों ब्रिगेडियर नलिन भाटिया और ब्रिगेडियर वीएन चतुर्वेदी से संबंधित है। ब्रिगेडियर भाटिया खुफिया कोर और चतुर्वेदी शिक्षा कोर से थे और ये दोनों अपने संबंधित बैच से 2015 में मेजर जनरल रैंक के लिए विचारार्थ इकलौते अधिकारी थे।
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अधिकारियों के वकील कर्नल इंद्र सेन सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा कि इस तथ्य के बावजूद इन दोनों अधिकारियों की पदोन्नति नहीं की गई है कि ये अपनी-अपनी कोर से पदोन्नति के लिए इकलौते अधिकारी थे। साथ ही दोनों की प्रोफाइल भी बेहतरीन थी और उनके खिलाफ कोई नकारात्मक रिपोर्ट भी नहीं थी। इतना ही नहीं दोनों को पदोन्नत नहीं किए जाने की वजह आरटीआई आवेदन में नहीं बताई गई।
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उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि इन दोनों अधिकारियों को इस वजह से पदोन्नत नहीं किया गया क्योंकि तत्कालीन सेना प्रमुख उन्हें अपने से पहले के सेना प्रमुख का व्यक्ति समझते थे। खुफिया कोर के कई अन्य अधिकारियों ने भी तत्कालीन सेना प्रमुख और मौजूदा समय में केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह का करीबी होने के चलते प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया था।
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इन दोनों अधिकारियों ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। कर्नल सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में पाया कि दोनों अधिकारियों की पदोन्नति न किया जाना सेना की खुद की नीति के खिलाफ है।