फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Indian Army in favor of giving pension to women officers who fulfill service conditions

सेवा शर्तों को पूरा करने वाली महिला अधिकारियों को पेंशन देने के पक्ष में भारतीय सेना

Mon, 10 Feb 2020 02:30 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Mon, 10 Feb 2020 02:30 PM IST
विज्ञापन
Indian Army in favor of giving pension to women officers who fulfill service conditions
भारतीय सेना की महिला अधिकारी - फोटो : PTI

भारतीय सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन लेकर तैयारियां सही दिशा में चल रही है। वहीं सेना ने कहा है कि वह उन महिला अधिकारियों को पेंशन देने के पक्ष में है, जिन्होंने सेवा शर्तों को पूरा किया है।

विज्ञापन


सेना ने यह भी कहा कि महिला अधिकारियों को जरूरत के हिसाब से उपयुक्त असाइनमेंट दिए जाएंगे। ये सभी फैसले महिलाओं की सेना में सौंपी गई विभिन्न भूमिकाओं में सुचारु एकीकरण की दिशा में व्यक्तिओं और संगठन के हित में लिए जाएंगे।
विज्ञापन


विज्ञापन
विज्ञापन



शारीरिक सीमाओं के आधार पर महिलाओं को कमान पद से इनकार प्रतिगामी कदम
भारतीय सेना में सेवारत महिला अधिकारियों ने महिलाओं को उनकी शारीरिक सीमाओं के आधार पर कमान पद देने से इनकार करने के केंद्र के सुप्रीम कोर्ट में उल्लेखित रुख का विरोध किया है और इसे न केवल प्रतिगामी बल्कि प्रदर्शित रिकॉर्ड और आंकड़ों से पूरी तरह से विपरीत करार दिया है।

महिला अधिकारियों ने अदालत में दिये लिखित प्रतिवेदन में केंद्र के इस रुख को खारिज करने का अनुरोध किया है। महिला अधिकारियों ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसे आधार उल्लेखित किये गए हैं जो कि मामले के प्रदर्शित रिकार्ड के पूरी तरह से विपरीत हैं। महिला अधिकारियों ने कहा कि वे 10 कॉम्बैट सपोर्ट आर्म्स में पिछले 27 से 28 वर्षों से सेवारत हैं और उन्होंने अपनी शूरता और साहस को साबित किया है।

अधिकारियों ने लिखित प्रतिवेदन में कहा कि उन्हें संगठन द्वारा उपयुक्त पाया गया और उन्होंने 10 कॉम्बैट सपोर्ट आर्म्स में शांति स्थलों के साथ ही प्रतिकूल स्थानों/अभियानों में सैनिकों और पुरुषों के प्लाटून और कंपनियों का नेतृत्व किया है। ऐसा कोई मौका सामने नहीं आया है जब सैनिकों/पुरुषों ने अपनी कथित 'ग्रामीण पृष्ठभूमि, प्रचलित सामाजिक मानदंडों’ के कारण महिलाओं की कमान से इनकार या उसे अस्वीकार किया हो।

लिखित प्रतिवेदन को रिकार्ड में लिया गया है। इसमें कहा गया है कि महिला अधिकारियों ने प्रदर्शित किया है कि उन्हें जो भूमिका सौंपी गई है उसमें वे किसी भी तरह से कमतर नहीं हैं। इसमें कहा गया है कि महिला अधिकारियों को उनके उचित हकों से वंचित करने के लिए भारत संघ द्वारा दिए गए कथित आधार गलत हैं। यह 25 फरवरी 2019 के भारत के संघ के नीतिगत निर्णय के विपरीत है जिसके तहत एसएससीडब्लूओ को सभी 10 इकाइयों में स्थायी कमीशन पर सहमति जताई गई थी।


महिला अधिकारियों ने दलील दी कि 1992 में महिलाओं को पहली बार भारतीय सेना में शामिल किये जाने के बाद से किसी भी विज्ञापन या नीतिगत फैसलों में महिला अधिकारियों को केवल कर्मचारी नियुक्तियों तक ही सीमित रखने का कभी कोई उल्लेख नहीं किया गया है। शीर्ष अदालत ने गत पांच फरवरी को मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और महिला अधिकारियों एवं रक्षा मंत्रालय को अपने लिखित प्रतिवेदन देने को कहा था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed