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राजनाथ ने कहा- भारतीय और चीनी सेना सूझबूझ से ले रही काम....दौरे से चीन तिलमिलाया
Fri, 15 Nov 2019 10:33 PM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ईटानगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ईटानगर
Published by: Priyesh Mishra
Updated Fri, 15 Nov 2019 10:33 PM IST
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अरुणाचल प्रदेश में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह
- फोटो : ANI
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दो दिवसीय दौरे पर अरुणाचल प्रदेश पहुंचे राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को बुमला इलाके में चीनी सीमा के नजदीक स्थित फारवर्ड पोस्ट का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ भारतीय सेना और इंडो तिब्बत बार्डर पुलिस के कई बड़े अधिकारी थे।
उन्होंने कहा कि मुझे यहां तैनात सैनिकों से मिलने और बातचीत करने का मौका मिला, जिन्होंने मुझे बताया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर कोई तनाव नहीं है। भारतीय और चीनी सेना सीमा पर सूझबूझ से काम ले रही है। रक्षा मंत्री बुमला क्षेत्र में बने एक पुल का भी उद्घाटन करेंगे।
राजनाथ सिंह ने परमवीर चक्र से सम्मानित सूबेदार जोगिंदर सिंह के स्मारक के भी दर्शन किए। उन्होंने ट्वीट किया कि अरुणाचल प्रदेश के बुम ला सेक्टर में परमवीर चक्र विजेता सूबेदार जोगिंदर सिंह की स्मृति स्थली के दर्शन करने का आज सौभाग्य मिला।
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राजनाथ सिंह ने एक ट्वीट में कहा कि 1962 के युद्ध के समय उन्होंने अदम्य साहस और पराक्रम का परिचय देते हुए बलिदान दिया था। जहां उनकी शहादत हुई उस माटी को आज माथे से लगा लिया।
भारत-चीन सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोग रणनीतिक संपत्ति
अरुणाचल प्रदेश के तवांग में आयोजित 11वें मैत्री दिवस समारोह में उन्होंने कहा कि मैं भारत-चीन सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों को आम नागरिक नहीं बल्कि रणनीतिक संपत्ति मानता हूं। मुझे अभी भी याद है कि जब एएन-32 विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था तो स्थानीय लोगों की मदद से हमें दुर्घटनास्थल के बारे में जानकारी मिली।
आर्थिक हितों के चलते आरसीईपी से बाहर रहने का फैसला
क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) से भारत के बाहर रहने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले का समर्थन करते हुए राजनाथ ने कहा, देश हित में यह फैसला लिया गया है। खास तौर पर पूर्वोत्तर के राज्यों के हितों को ध्यान में रखा गया है। अगर भारत आरसीईपी में शामिल हो जाता तो किसानों, मजदूरों और उद्योगों पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता। राजनाथ ने यहां 200 मीटर लंबे सिसरी पुल का उद्घाटन भी किया। यह पुल अरुणाचल की सियांग घाटी को दिबांग घाटी से जोड़ता है।
चीन तिलमिलाया
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) का दौरा करने से चीन तिलमिला गया है। रक्षा मंत्री ने शुक्रवार को बुम ला दर्रे के पास एलएसी पर जवानों से मुलाकात की। राजनाथ ने कहा कि सीमा विवाद पर भले भारत-चीन में मतभेद हों, लेकिन दोनों देशों की सेनाएं तनाव कम करने को लेकर सूझबूझ से काम कर रही हैं। दूसरी ओर, चीन ने इस पर एतराज जताते हुए कहा कि भारत को चीन के हितों और चिंताओं का सम्मान करना चाहिए और ऐसी किसी कार्रवाई से बचना चाहिए जो सीमा विवाद को जटिल बनाए। रक्षा मंत्री के रूप में राजनाथ का अरुणाचल का यह पहला दौरा है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जेंग शुआंग ने कहा कि उसने कभी भी भारत के तथाकथित पूर्वोत्तर राज्य (अरुणाचल) को मान्यता नहीं दी। हम उस क्षेत्र में भारतीय अधिकारियों या नेताओं की गतिविधियों का विरोध करते हैं। भारत को सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए कदम उठाने चाहिए। गौरतलब है कि चीन अरुणाचल के दक्षिण तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता है। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए अभी तक 21 दौर की वार्ता हो चुकी है। दोनों देशों के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा है। चीन अपने रुख को मजबूत करने के लिए हमेशा भारतीय नेताओं की अरुणाचल यात्रा का विरोध करता है। वहीं, भारत का कहना है कि अरुणाचल उसका अभिन्न अंग है और भारतीय नेता देश के अन्य हिस्सों की तरह ही समय-समय पर वहां भी जाते हैं।
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उन्होंने कहा कि मुझे यहां तैनात सैनिकों से मिलने और बातचीत करने का मौका मिला, जिन्होंने मुझे बताया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर कोई तनाव नहीं है। भारतीय और चीनी सेना सीमा पर सूझबूझ से काम ले रही है। रक्षा मंत्री बुमला क्षेत्र में बने एक पुल का भी उद्घाटन करेंगे।
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राजनाथ सिंह ने परमवीर चक्र से सम्मानित सूबेदार जोगिंदर सिंह के स्मारक के भी दर्शन किए। उन्होंने ट्वीट किया कि अरुणाचल प्रदेश के बुम ला सेक्टर में परमवीर चक्र विजेता सूबेदार जोगिंदर सिंह की स्मृति स्थली के दर्शन करने का आज सौभाग्य मिला।
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राजनाथ सिंह ने एक ट्वीट में कहा कि 1962 के युद्ध के समय उन्होंने अदम्य साहस और पराक्रम का परिचय देते हुए बलिदान दिया था। जहां उनकी शहादत हुई उस माटी को आज माथे से लगा लिया।
Defence Minister Rajnath Singh: Is Bharat-China seema par jahan humlog bahut soojh-bhooj se kaam le rahe hain, wahin par Chinese PLA bhi bahut soojh-bhooj se kaam le rahi hai. https://t.co/XSMid1DN55 pic.twitter.com/JqAaLdHm0w
— ANI (@ANI) November 15, 2019
भारत-चीन सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोग रणनीतिक संपत्ति
अरुणाचल प्रदेश के तवांग में आयोजित 11वें मैत्री दिवस समारोह में उन्होंने कहा कि मैं भारत-चीन सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों को आम नागरिक नहीं बल्कि रणनीतिक संपत्ति मानता हूं। मुझे अभी भी याद है कि जब एएन-32 विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था तो स्थानीय लोगों की मदद से हमें दुर्घटनास्थल के बारे में जानकारी मिली।
आर्थिक हितों के चलते आरसीईपी से बाहर रहने का फैसला
क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) से भारत के बाहर रहने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले का समर्थन करते हुए राजनाथ ने कहा, देश हित में यह फैसला लिया गया है। खास तौर पर पूर्वोत्तर के राज्यों के हितों को ध्यान में रखा गया है। अगर भारत आरसीईपी में शामिल हो जाता तो किसानों, मजदूरों और उद्योगों पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता। राजनाथ ने यहां 200 मीटर लंबे सिसरी पुल का उद्घाटन भी किया। यह पुल अरुणाचल की सियांग घाटी को दिबांग घाटी से जोड़ता है।
चीन तिलमिलाया
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) का दौरा करने से चीन तिलमिला गया है। रक्षा मंत्री ने शुक्रवार को बुम ला दर्रे के पास एलएसी पर जवानों से मुलाकात की। राजनाथ ने कहा कि सीमा विवाद पर भले भारत-चीन में मतभेद हों, लेकिन दोनों देशों की सेनाएं तनाव कम करने को लेकर सूझबूझ से काम कर रही हैं। दूसरी ओर, चीन ने इस पर एतराज जताते हुए कहा कि भारत को चीन के हितों और चिंताओं का सम्मान करना चाहिए और ऐसी किसी कार्रवाई से बचना चाहिए जो सीमा विवाद को जटिल बनाए। रक्षा मंत्री के रूप में राजनाथ का अरुणाचल का यह पहला दौरा है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जेंग शुआंग ने कहा कि उसने कभी भी भारत के तथाकथित पूर्वोत्तर राज्य (अरुणाचल) को मान्यता नहीं दी। हम उस क्षेत्र में भारतीय अधिकारियों या नेताओं की गतिविधियों का विरोध करते हैं। भारत को सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए कदम उठाने चाहिए। गौरतलब है कि चीन अरुणाचल के दक्षिण तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता है। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए अभी तक 21 दौर की वार्ता हो चुकी है। दोनों देशों के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा है। चीन अपने रुख को मजबूत करने के लिए हमेशा भारतीय नेताओं की अरुणाचल यात्रा का विरोध करता है। वहीं, भारत का कहना है कि अरुणाचल उसका अभिन्न अंग है और भारतीय नेता देश के अन्य हिस्सों की तरह ही समय-समय पर वहां भी जाते हैं।