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IAF: वायुसेना को मिली बड़ी सफलता, पहली बार रात में सुपर हरक्यूलिस विमान की कारगिल में कराई सफल लैंडिंग, वीडियो
Sun, 07 Jan 2024 10:50 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 07 Jan 2024 10:50 AM IST
सार
यह कमांडोज की ट्रेनिंग का भी हिस्सा था कि कैसे आपात स्थिति में उनकी जल्द से जल्द मोर्चे पर तैनाती की जा सकती है। वायुसेना ने लैंडिंग का वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया है।
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वायुसेना का सुपर हरक्यूलिस एयरक्राफ्ट (फाइल फोटो))
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भारतीय वायुसेना को बड़ी सफलता मिली है। दरअसल वायुसेना ने अपने सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान को रात के समय कारगिल हवाई पट्टी पर उतारने में सफलता हासिल की है। इस दौरान वायुसेना के गरुड़ कमांडोज को भी सुपर हरक्यूलिस विमान में बिठाकर कारगिल भेजा गया। यह कमांडोज की ट्रेनिंग का भी हिस्सा था कि कैसे आपात स्थिति में उनकी जल्द से जल्द मोर्चे पर तैनाती की जा सकती है। गरुड़ कमांडो फोर्स, वायुसेना की स्पेशल फोर्स है। वायुसेना ने लैंडिंग का वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया है।
क्यों खास है ये मिशन
ऊंचाई वाले मुश्किल हालात में एयरक्राफ्ट की लैंडिंग हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहती है। ऐसे में कारगिल जैसे ऊंचे पहाड़ों वाले इलाके में सुपर हरक्यूलिस विमान की सफल लैंडिंग एक बड़ी सफलता है। इस ऑपरेशन के दौरान वायुसेना ने रात के अंधेरे में कारगिल जैसी चुनौतीपूर्ण एयरस्ट्रिप पर सफलतापूर्वक सुपर हरक्यूलिस की लैंडिंग कराकर ना सिर्फ अपनी तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन किया है, साथ ही इस ऑपरेशन की काफी रणनीतिक अहमियत भी है।
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कारगिल की एयरस्ट्रिप 8800 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इतनी ऊंचाई पर खराब मौसम और तेज हवाएं सबसे बड़ी चुनौती होती हैं। ऐसे में लैंडिंग के लिए उच्च स्तर की तकनीकी दक्षता की जरूरत होती है। गरुड़ कमांडो को सफलतापूर्वक कारगिल पहुंचाने से एयरफोर्स की लॉजिस्टिक क्षमता के साथ ही वायुसेना की हवाई के साथ ही जमीनी तैयारी का भी पता चलता है। इससे पता चलता है कि वायुसेना मुश्किल से मुश्किल हालात में भी अपने सैनिकों की तैनाती जल्द से जल्द कर सकती है।
इससे पहले वायुसेना के पायलटों ने उत्तराखंड में धारासू में सुपर हरक्यूलिस विमान की सफल लैंडिंग कराई थी। खास बात ये है कि ये लैंडिंग भी एक चुनौतीपूर्ण मौसम में कराई गई थी। धारासू में जहां लैंडिंग कराई गई, वह 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित जगह है। अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन कंपनी द्वारा बनाया गया सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान एक ट्रांसपोर्ट विमान है, जो वायुसेना की 12वीं फ्लीट का हिस्सा है। इन्हें साल 2011 में वायुसेना में शामिल किया गया था।
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#WATCH | "In a first, an IAF C-130 J aircraft recently carried out a night landing at the Kargil airstrip. Employing terrain masking enroute, the exercise also dovetailed a training mission of the Garuds," tweets Indian Air Force.
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(Video: Indian Air Force) pic.twitter.com/JHVQ7p6Vxu — ANI (@ANI) January 7, 2024
क्यों खास है ये मिशन
ऊंचाई वाले मुश्किल हालात में एयरक्राफ्ट की लैंडिंग हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहती है। ऐसे में कारगिल जैसे ऊंचे पहाड़ों वाले इलाके में सुपर हरक्यूलिस विमान की सफल लैंडिंग एक बड़ी सफलता है। इस ऑपरेशन के दौरान वायुसेना ने रात के अंधेरे में कारगिल जैसी चुनौतीपूर्ण एयरस्ट्रिप पर सफलतापूर्वक सुपर हरक्यूलिस की लैंडिंग कराकर ना सिर्फ अपनी तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन किया है, साथ ही इस ऑपरेशन की काफी रणनीतिक अहमियत भी है।
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कारगिल की एयरस्ट्रिप 8800 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इतनी ऊंचाई पर खराब मौसम और तेज हवाएं सबसे बड़ी चुनौती होती हैं। ऐसे में लैंडिंग के लिए उच्च स्तर की तकनीकी दक्षता की जरूरत होती है। गरुड़ कमांडो को सफलतापूर्वक कारगिल पहुंचाने से एयरफोर्स की लॉजिस्टिक क्षमता के साथ ही वायुसेना की हवाई के साथ ही जमीनी तैयारी का भी पता चलता है। इससे पता चलता है कि वायुसेना मुश्किल से मुश्किल हालात में भी अपने सैनिकों की तैनाती जल्द से जल्द कर सकती है।
इससे पहले वायुसेना के पायलटों ने उत्तराखंड में धारासू में सुपर हरक्यूलिस विमान की सफल लैंडिंग कराई थी। खास बात ये है कि ये लैंडिंग भी एक चुनौतीपूर्ण मौसम में कराई गई थी। धारासू में जहां लैंडिंग कराई गई, वह 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित जगह है। अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन कंपनी द्वारा बनाया गया सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान एक ट्रांसपोर्ट विमान है, जो वायुसेना की 12वीं फ्लीट का हिस्सा है। इन्हें साल 2011 में वायुसेना में शामिल किया गया था।