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पुलवामा हमले का पाकिस्तान को करारा जवाब, इन तीन परियोजनाओं से भारत रोकेगा पाक जाने वाला पानी

Sat, 23 Feb 2019 05:16 AM IST
Pranjal Dixit एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Pranjal Dixit Updated Sat, 23 Feb 2019 05:16 AM IST
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india will stop water going to pakistan from three of its water projects: nitin gadkari
नितिन गडकरी - फोटो : फाइल
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के पाकिस्तान को भारत के हिस्से का पानी नहीं देने के फैसले के एक दिन बाद जल संसाधन मंत्रालय ने तीन परियोजनाओं का विवरण साझा किया। इन परियोजनाओं के जरिये भारत रावी, सतलुज और ब्यास नदियों के अपने हिस्से के पानी को पाकिस्तान जाने से रोकेगा। 
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मंत्रालय में अतिरिक्त महानिदेशक (मीडिया एवं संचार) नीता प्रसाद ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि यह नया फैसला नहीं है। जल संसाधन मंत्री ने वही दोहराया है, जो हमेशा कहते हैं। मंत्रालय के मुताबिक, सिंधु जल समझौते के तहत रावी, सतलुज और ब्यास नदियों का औसतन 33 मिलियन एकड़ फीट (एमएफए) भारत को उपयोग के लिए आवंटित किया गया। भारत ने सतलुज पर भाखड़ा बांध, ब्यास पर पोंग व पांदोह बांधी और रावी पर थेन (रंजीतसागर) बांध का निर्माण किया है। 
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इसके अलावा ब्यास-सतलुज लिंक, माधोपुर-ब्यास लिंक, इंदिरा गांधी नहर परियोजना इत्यादि से भारत पूर्वी नदियों का करीब 95 फीसदी पानी का इस्तेमाल करता है। हालांकि रावी नदी से सालाना 2 एमएफए पानी माधोपुर के रास्ते पाकिस्तान में बह जाता है। रावी नदी पर शाहपुरकांडी परियोजना से थेन बांध से आने वाले पानी को इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। 
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इस परियोजना से जम्मू-कश्मीर और पंजाब के 37,000 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई और 206 मेगावॉट बिजली उत्पादन किया जा सकेगा। इस परियोजना को सितंबर 2016 तक पूरा होना था, लेकिन पंजाब और जम्मू-कश्मीर सरकार में विवाद के बाद इसे 30 अगस्त, 2014 तक टाल दिया गया। 8 सितंबर, 2018 को दोनों राज्य सरकारों में सहमति के बाद काम फिर से शुरू हो सका है।


वहीं, उज्ह परियोजना से भी पाकिस्तान जाने वाले पानी का इस्तेमाल भारत के लिए किया जाएगा। उज्ह के अलावा दूसरा रावी-ब्यास लिंक तीसरी परियोजना है। इसके तहत, रावी नदी पर बैराज बनाकर पानी के प्रवाह को ब्यास नदी से सुरंग के जरिये जोड़ा जाएगा।  
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