भारत ने संयुक्त राष्ट्र में इस्रायल के पक्ष में किया मतदान, चीन-पाकिस्तान विरोध में रहे
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
भारत ने संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद में इस्रायल के एक प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया है। इस्रायल ने अपने प्रस्ताव में फिलीस्तीन के एक मानवाधिकार गैर सरकारी संगठन को सलाहकार का दर्जा दिए जाने पर आपत्ति जताई थी। इस संगठन को लेकर इस्रायल का कहना है कि इसने हमास के साथ अपने संबंधों का खुलासा नहीं किया है। जिसके चलते संगठन को संयुक्त राष्ट्र में पर्यवेक्षक का दर्जा देने का प्रस्ताव खारिज हो गया।
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
इस्रायल ने भारत का आभार जताया
इस्रायल ने साथ देने के लिए भारत का आभार जताया है। दिल्ली में तैनात इस्रायल की राजनयिक माया कडोश ट्वीट करते हुए कहा, "इस्रायल के साथ खड़े रहने और आतंकी संगठन शहीद को संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षक का दर्जा देने की अपील को खारिज करने के लिए भारत का धन्यवाद। हम आतंकी संगठनों के खिलाफ साथ मिलकर काम करते रहेंगे। जिन संगठनों का उद्देश्य नुकसान पहुंचाना है।"
Thank you #India for standing with @IsraelinUN and rejecting the request of terrorist organization “Shahed” to obtain the status of an observer in #UN. Together we will continue to act against terrorist organizations that intend to harm. pic.twitter.com/erHTfuY1A1
— Maya Kadosh (@MayaKadosh) June 11, 2019
बता दें इस्रायल ने छह जून को मसौदा प्रस्ताव 'एल.15' पेश किया था। जिसके पक्ष में 28 और विपक्ष में 15 मत पड़े। वहीं पांच देशों ने मत प्रक्रिया में भाग नहीं लिया। जिन देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है, उनमें ब्राजील, कनाडा, कोलंबिया, फ्रांस, जर्मनी, भारत, आयरलैंड, जापान, कोरिया, यूक्रेन, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। वहीं प्रस्ताव के विरोध में जिन 14 देशों ने मत दिया है, उनमें मिस्र, पाकिस्तान, तुर्की, वेनेजुएला, यमन, ईरान और चीन का नाम शामिल है।
अब संयुक्त राष्ट्र की परिषद ने एनजीओ का आवेदन लौटाने का फैसला लिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये संगठन कुछ महत्वपूर्ण जानकारी पेश करने में नाकाम रहा था। ये जानकारी उस समय मांगी गई थी जब इस एनजीओ के विषय पर विचार किया जा रहा था। इस एनजीओ ने संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षक का दर्जा दिए जाने के लिए आवेदन किया था।