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India-US Ties: एस जयशंकर और मार्को रुबियो के बीच हुई बातचीत; इंडो-पैसिफिक, व्यापार समझौते पर हुई चर्चा
Mon, 07 Apr 2025 11:09 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Mon, 07 Apr 2025 11:09 PM IST
सार
भारत और अमेरिका के विदेश मंत्रियों ने आज कई अहम मुद्दों पर चर्चा की है। इसकी जानकारी साझा करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि आज अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से अच्छी बातचीत हुई। हमने इंडो-पैसिफिक, भारतीय उपमहाद्वीप, यूरोप, पश्चिम एशिया और कैरेबियन पर अपने दृष्टिकोण साझा किए।
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डॉ. एस. जयशंकर, विदेश मंत्री
- फोटो : ANI
विस्तार
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो के साथ एक महत्वपूर्ण बातचीत की। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, भारतीय उपमहाद्वीप, यूरोप, पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) और कैरेबियन जैसे कई अहम मुद्दों पर विचार साझा किए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया, 'आज अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से अच्छी बातचीत हुई। हमने इंडो-पैसिफिक, भारतीय उपमहाद्वीप, यूरोप, पश्चिम एशिया और कैरेबियन पर अपने दृष्टिकोण साझा किए। हमने द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द से जल्द पूरा करने की अहमियत पर सहमति जताई। भविष्य में भी संपर्क में रहने की उम्मीद है।'
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भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी
भारत और अमेरिका के बीच संबंध केवल व्यापार या कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी है, जो लगभग हर अहम क्षेत्र को कवर करती है। इन दोनों देशों के रिश्ते लोकतांत्रिक मूल्यों, साझा रणनीतिक हितों और लोगों के बीच मजबूत रिश्तों पर आधारित हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति कई बार अलग-अलग मौकों पर आमने-सामने मिल चुके हैं। दोनों नेता न केवल द्विपक्षीय बैठकों में मिले हैं, बल्कि कई बहुपक्षीय मंचों जैसे क्वाड, आई2यू2 और डेमोक्रेसी समिट जैसी वर्चुअल बैठकों में भी साथ आए हैं।
रक्षा सहयोग और व्यापार
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध भी बहुत मजबूत हैं। 2015 में न्यू फ्रेमवर्क फॉर इंडिया-यूएस डिफेंस कोऑपरेशन नाम का समझौते को 10 साल के लिए नवीनीकृत किया गया था। 2016 में अमेरिका ने भारत को मेजर डिफेंस पार्टनर घोषित किया, जिससे दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरणों और तकनीकी सहयोग को और मजबूती मिली। साथ ही, जुलाई 2018 में अमेरिका ने भारत को अपनी टीयर-1 स्ट्रैटेजिक ट्रेड ऑथराइजेशन सूची में शामिल किया, जिससे उच्च तकनीक वाले व्यापार को बढ़ावा मिला।
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भारतीय डायस्पोरा की भूमिका
अमेरिका में लगभग 44 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो वहां की तीसरी सबसे बड़ी एशियाई जातीय समूह है। ये लोग राजनीति, व्यवसाय, विज्ञान, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ चुके हैं। वर्तमान में अमेरिका की कांग्रेस में 5 भारतीय मूल के सांसद काम कर रहे हैं। भारतीय डायस्पोरा भारत और अमेरिका के संबंधों को मजबूत करने में एक पुल का काम कर रही है। फरवरी 2024 में नई दिल्ली में भारत-अमेरिका कांसुलर डायलॉग हुआ था, जिसमें वीजा, पासपोर्ट और प्रवासी भारतीयों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
व्यापार और निवेश
वित्तीय वर्ष 2023-24 में अमेरिका भारत का तीसरा सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का स्रोत रहा। इस दौरान अमेरिका से भारत में 4.99 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जो कुल एफडीआई का लगभग 9 प्रतिशत है। सिर्फ अमेरिका से भारत में ही नहीं, बल्कि भारत से भी कई कंपनियों ने अमेरिका में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। 2023 में भारतीय उद्योग परिसंघ की एक रिपोर्ट के अनुसार, 163 भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में 40 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश किया है। इससे वहां 4.25 लाख से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा हुईं।
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Good to speak with @SecRubio today.
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Exchanged perspectives on the Indo-Pacific, the Indian Sub-continent, Europe, Middle East/West Asia and the Caribbean.
Agreed on the importance of the early conclusion of the Bilateral Trade Agreement.
Look forward to remaining in touch.…— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) April 7, 2025
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भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी
भारत और अमेरिका के बीच संबंध केवल व्यापार या कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी है, जो लगभग हर अहम क्षेत्र को कवर करती है। इन दोनों देशों के रिश्ते लोकतांत्रिक मूल्यों, साझा रणनीतिक हितों और लोगों के बीच मजबूत रिश्तों पर आधारित हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति कई बार अलग-अलग मौकों पर आमने-सामने मिल चुके हैं। दोनों नेता न केवल द्विपक्षीय बैठकों में मिले हैं, बल्कि कई बहुपक्षीय मंचों जैसे क्वाड, आई2यू2 और डेमोक्रेसी समिट जैसी वर्चुअल बैठकों में भी साथ आए हैं।
रक्षा सहयोग और व्यापार
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध भी बहुत मजबूत हैं। 2015 में न्यू फ्रेमवर्क फॉर इंडिया-यूएस डिफेंस कोऑपरेशन नाम का समझौते को 10 साल के लिए नवीनीकृत किया गया था। 2016 में अमेरिका ने भारत को मेजर डिफेंस पार्टनर घोषित किया, जिससे दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरणों और तकनीकी सहयोग को और मजबूती मिली। साथ ही, जुलाई 2018 में अमेरिका ने भारत को अपनी टीयर-1 स्ट्रैटेजिक ट्रेड ऑथराइजेशन सूची में शामिल किया, जिससे उच्च तकनीक वाले व्यापार को बढ़ावा मिला।
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भारतीय डायस्पोरा की भूमिका
अमेरिका में लगभग 44 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो वहां की तीसरी सबसे बड़ी एशियाई जातीय समूह है। ये लोग राजनीति, व्यवसाय, विज्ञान, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ चुके हैं। वर्तमान में अमेरिका की कांग्रेस में 5 भारतीय मूल के सांसद काम कर रहे हैं। भारतीय डायस्पोरा भारत और अमेरिका के संबंधों को मजबूत करने में एक पुल का काम कर रही है। फरवरी 2024 में नई दिल्ली में भारत-अमेरिका कांसुलर डायलॉग हुआ था, जिसमें वीजा, पासपोर्ट और प्रवासी भारतीयों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
व्यापार और निवेश
वित्तीय वर्ष 2023-24 में अमेरिका भारत का तीसरा सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का स्रोत रहा। इस दौरान अमेरिका से भारत में 4.99 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जो कुल एफडीआई का लगभग 9 प्रतिशत है। सिर्फ अमेरिका से भारत में ही नहीं, बल्कि भारत से भी कई कंपनियों ने अमेरिका में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। 2023 में भारतीय उद्योग परिसंघ की एक रिपोर्ट के अनुसार, 163 भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में 40 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश किया है। इससे वहां 4.25 लाख से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा हुईं।
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