राजनाथ सिंह ने बंगलूरू में तेजस ट्रेनर और एचटीटी-40 सौंपे, ध्रुव एनजी की भी हुई डिलीवरी; कितनी ताकत बढ़ी?
बंगलूरू में एचएएल ने भारतीय वायुसेना और पवन हंस को स्वदेशी विमान और हेलीकॉप्टर सौंपे। इसमें तेजस के दो ट्विन सीटर ट्रेनर, एचटीटी-40 बेसिक ट्रेनर विमान और ध्रुव एनजी हेलीकॉप्टर शामिल हैं। इससे सैन्य विमानन के साथ पायलट प्रशिक्षण और नागरिक हेलीकॉप्टर क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी। इन तीनों प्लेटफॉर्म की खासियत क्या है? इनके शामिल होने से भारत की स्वदेशी विमान निर्माण क्षमता को कितना बल मिलेगा? आइए, सबकुछ विस्तार से समझते हैं...
विस्तार
तेजस एफओसी ट्विन सीटर एक हल्का, हर मौसम में काम करने वाला बहुउद्देश्यीय 4.5 पीढ़ी का विमान है। इसे मुख्य रूप से वायुसेना के पायलट प्रशिक्षण के लिए बनाया गया है, लेकिन इसमें लड़ाकू विमान जैसी संचालन क्षमता भी है। इसमें डिजिटल कॉकपिट, आधुनिक एवियोनिक्स, फ्लाई-बाय-वायर नियंत्रण और कंपोजिट सामग्री से बना ढांचा है। 2010 में 16 तेजस लड़ाकू विमानों और चार ट्विन सीटर का एफओसी अनुबंध हुआ था। सभी 16 लड़ाकू विमान 2022-23 के दौरान दिए जा चुके हैं। अब अंतिम दो ट्विन सीटर की डिलीवरी के साथ यह अनुबंध पूरा हो गया है। इन विमानों में बेहतर रडार, ऑटोपायलट, ईंधन प्रणाली, सुरक्षित संचार और हवा में ईंधन भरने की क्षमता जैसे सुधार भी किए गए हैं।
राजनाथ सिंह ने क्या-क्या कहा?
- रक्षा अनुसंधान और विकास को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने युवा वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और डिजाइनरों को ऐसी तकनीक विकसित करने की चुनौती दी, जो अभी अस्तित्व में नहीं है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान और विकास ऐसा क्षेत्र है, जहां एक व्यक्ति भी बड़ा बदलाव ला सकता है। उन्होंने युवा प्रतिभाओं से ऐसी क्षमताएं विकसित करने का आह्वान किया, जो आने वाले दशक में वैश्विक एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में भारत को अग्रणी स्थान दिला सकें।
- राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, इसलिए भारत के लिए नई क्षमताएं विकसित करना समय की जरूरत है। किसी भी अभियान में प्रभावी तरीके से काम करने के लिए अच्छी तरह प्रशिक्षित personnel, आधुनिक तकनीक, एकीकृत प्रणालियां और तेजी से फैसला लेने की क्षमता जरूरी है। उन्होंने भरोसा जताया कि स्वदेशी एचटीटी-40 ट्रेनर विमान भारतीय वायुसेना के पायलटों को बदलते युद्ध वातावरण के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने बताया कि बुनियादी प्रशिक्षण के लिए लंबे समय तक हॉक और पिलाटस जैसे विदेशी विमानों पर निर्भरता रही, लेकिन अब एचएएल ने एचटीटी-40 को देश में तैयार किया है और सीरीज प्रोडक्शन लाइन का पहला विमान वायुसेना को सौंपा गया है।
- रक्षा मंत्री ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल को केवल विमान बनाने वाली संस्था तक सीमित न रखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि एचएएल में डिजाइन, विकास, निर्माण, प्रमाणन, पूरे जीवनकाल तक रखरखाव और वैश्विक बाजार में बिक्री तक विश्वस्तरीय क्षमता होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने रक्षा परियोजनाओं में होने वाली देरी को गंभीर मुद्दा बताया। उनके अनुसार तकनीकी समेत कई कारणों से परियोजनाओं में देरी होती है और इस पर गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं की समयसीमा ऐसी होनी चाहिए, जो वास्तविक और व्यावहारिक हो, क्योंकि बहुत ज्यादा देरी होने पर तैयार तकनीक हाथ में आने तक पुरानी पड़ सकती है।
- राजनाथ सिंह ने कहा कि एयरोस्पेस क्षेत्र में अचानक कोई बड़ा बदलाव नहीं आ सकता। यह एक लंबी और धीरे-धीरे आगे बढ़ने वाली प्रक्रिया है। हर उत्पाद और हर पुर्जा इस विकास यात्रा की सीढ़ी का एक कदम है और लगातार इन चरणों को पार करते हुए आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि इस लंबी प्रक्रिया में कई चुनौतियां आएंगी, लेकिन उन्हें विकास की राह में पड़ने वाले पड़ाव के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने स्वदेशी हेलीकॉप्टर का उदाहरण देते हुए कहा कि इसे ओएनजीसी समुद्र में होने वाले संचालन के लिए इस्तेमाल करेगा। उन्होंने इसे बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि डीजीसीए से प्रमाणित स्वदेशी शक्ति इंजन का एकीकरण भारत की स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता को और मजबूत करता है।
- रक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य में उत्पादन बढ़ने के साथ ये स्वदेशी मशीनें केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत नहीं करेंगी, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देंगी और देश का गौरव बढ़ाएंगी। उन्होंने एयरोस्पेस क्षेत्र में ऐसा एकीकृत तंत्र बनाने पर जोर दिया, जो हर क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो। राजनाथ सिंह ने कहा कि सामूहिक क्षमता और आपसी सहयोग को मिलाकर भारत इस लक्ष्य को हासिल कर सकता है। साथ ही उन्होंने युवा वैज्ञानिकों से नई और अभी तक मौजूद नहीं तकनीकों पर काम करने का आह्वान किया, ताकि भारत आने वाले दशक में वैश्विक एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में अपनी मजबूत जगह बना सके।
एचटीटी-40 क्यों है वायुसेना के लिए अहम?
एचएएल का एचटीटी-40 बेसिक ट्रेनर विमान भारतीय रक्षा सेवाओं के शुरुआती पायलट प्रशिक्षण की जरूरत पूरी करने के लिए बनाया गया है। इसकी पहली उड़ान 31 मई 2016 को हुई थी। विमान ने परीक्षण और विकास के कई चरण पूरे किए हैं। इसमें 1,100 हॉर्सपावर का टर्बोप्रॉप इंजन है और इसकी अधिकतम गति 300 नॉट है। यह बुनियादी उड़ान प्रशिक्षण, कलाबाजी, उपकरणों के सहारे उड़ान, नेविगेशन, रात में उड़ान और नजदीकी फॉर्मेशन उड़ान के लिए तैयार किया गया है। इसमें करीब 57 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री है। रक्षा मंत्रालय ने एचएएल से 70 एचटीटी-40 विमानों का अनुबंध किया है और शुक्रवार को हुआ हस्तांतरण इस अनुबंध के तहत डिलीवरी की शुरुआत है।
ध्रुव एनजी हेलीकॉप्टर में क्या खास है?
- ध्रुव एनजी एचएएल का बनाया 5.5 टन का हल्का, दो इंजन वाला बहुउद्देश्यीय हेलीकॉप्टर है। इसे भारत का पहला स्वदेशी रूप से तैयार नागरिक हेलीकॉप्टर बताया गया है। इसमें दो शक्ति 1एचआईसी इंजन हैं। इसकी अधिकतम उड़ान गति करीब 285 किलोमीटर प्रति घंटा और करीब 630 किलोमीटर की दूरी तक उड़ान की क्षमता है।
- इसमें अधिकतम 14 यात्री बैठ सकते हैं। इसका इस्तेमाल वीआईपी परिवहन, यात्री सेवा, उपयोगी परिवहन, एयर एंबुलेंस, समुद्री क्षेत्र के संचालन, कानून-व्यवस्था और आपदा राहत जैसे कामों में किया जा सकता है। पवन हंस को चार ध्रुव एनजी हेलीकॉप्टर सौंपे जाने के साथ नागरिक हेलीकॉप्टर क्षेत्र में इसका प्रवेश शुरू हुआ है।
- इन तीनों प्लेटफॉर्म को एक साथ देखें तो इनकी भूमिका अलग-अलग है, लेकिन लक्ष्य एक बड़ा है। तेजस ट्विन सीटर लड़ाकू विमान प्रशिक्षण क्षमता को मजबूत करता है, एचटीटी-40 शुरुआती पायलट प्रशिक्षण की जरूरत पूरी करता है और ध्रुव एनजी नागरिक हेलीकॉप्टर क्षेत्र के लिए स्वदेशी विकल्प उपलब्ध कराता है।
- एचएएल के अनुसार, इनकी डिलीवरी सैन्य विमानन, नागरिक हेलीकॉप्टर संचालन और पायलट प्रशिक्षण में देश की आत्मनिर्भर क्षमता को मजबूत करती है। तेजस ट्विन सीटर के आगे 83 और 97 विमान वाले अनुबंधों के तहत भी नए ट्विन सीटर विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें एईएसए रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और आधुनिक हथियार क्षमता शामिल करने की योजना है। इस तरह शुक्रवार का हस्तांतरण केवल कुछ विमानों और हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी नहीं, बल्कि भारत के स्वदेशी विमानन ढांचे के विस्तार का भी संकेत है।