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लॉकडाउन की मारः देश में बेरोजगारी दर 27 फीसदी से ऊपर पहुंची, असंगठित क्षेत्रों का बुरा हाल
Tue, 05 May 2020 07:58 PM IST
Rohit Ojha
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Rohit Ojha
Updated Tue, 05 May 2020 07:58 PM IST
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बेरोजगारी दर में उछाल आया ( फाइल फोटो)
- फोटो : PTI (for Reference)
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कोरोना वायरस के कारण देश में लगे लॉकडाउन की वजह से बेरोजगारी दर में उछाल आया है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) ने देश में बेरोजगारी पर सर्वे रिपोर्ट जारी किया है। इस सर्वे रिपोर्ट के अनुसार तीन मई को समाप्त हुए सप्ताह में देश में बेरोजगारी दर बढ़कर 27.1 फीसदी पर पहुंच गई है।
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इससे पहले जारी सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2020 में देश में बेरोजगारी दर बढ़कर 23.5 फीसदी पर पहुंच गई थी। सिर्फ अप्रैल महीने में बेरोजगारी दर में 14.8 फीसदी का इजाफा हुआ था। मार्च महीने के मुकाबले अप्रैल में बेरोजगारी दर में तेज बढ़ोतरी हुई थी।
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कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने लॉकडाउन का एलान किया। इसके चलते 130 करोड़ की आबादी वाले देश में कई उद्यम बंद हो गए हैं। बेरोजगारी की दर शहरी क्षेत्रों में सबसे अधिक बढ़ी है। कोविड-19 के मामलों की वजह से रेड जोन वाले क्षेत्रों में यह दर 29.22 प्रतिशत है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 26.69 प्रतिशत है।
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बेरोजगार लोगों की संख्या और बढ़ सकती है
अप्रैल के अंत तक, दक्षिण भारत के पुदुचेरी में सबसे अधिक 75.8 प्रतिशत बेरोजगारी थी, उसके बाद पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में 49.8 प्रतिशत, झारखंड में 47.1 फीसदी और बिहार में यह आंकड़ा 46.6 प्रतिशत था। महाराष्ट्र की बेरोजगारी दर सीएमआईई द्वारा 20.9 प्रतिशत आंकी गई थी, जबकि हरियाणा में 43.2 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 21.5 प्रतिशत और कर्नाटक में 29.8 प्रतिशत थी।
सीएमआईई ने अनुमान लगाया गया है कि अप्रैल में दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों और छोटे व्यवसायी सबसे ज्यादा बेरोजगार हुए हैं। सर्वे के अनुसार 12 करोड़ से ज्यादा लोगों को नौकरी गंवानी पड़ी है। इनमें फेरीवाले, सड़क के किनारे सामान बेचने वाले, निर्माण उद्योग में काम करने वाले कर्मचारी और कई लोग हैं जो रिक्शा को ठेला चलकर गुजारा करते थे।
सीएमआईई के कार्यकारी चीफ महेश व्यास ने कहा कि लॉकडाउन बढ़ने से बेरोजगार लोगों की संख्या और बढ़ सकती है। शुरुआत में असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों की नौकरियां गई हैं, लेकिन अब धीरे-धीरे, संगठित और सुरक्षित नौकरी वालों की नौकरी पर भी खतरा मंडराने लगा है।