भारत का ‘त्रिशूल’ प्रहार: स्वदेशी ड्रोनों ने सीमा पर दिखाई दमदार ताकत, मुश्किल हालात में भी साधे सटीक निशाने
पाकिस्तान के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन सिंदूर के बीच तीनों सेनाओं के संयुक्त अभ्यास ‘त्रिशूल’ में स्वदेशी ड्रोनों का सफल परीक्षण हुआ। गुजरात-राजस्थान सीमा पर इन ड्रोनों ने कठिन परिस्थितियों में भी सटीक निशाना साधा। दक्षिणी कमान के अनुसार, यह उपलब्धि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है।
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पाकिस्तान के खिलाफ जारी ऑपरेशन सिंदूर के बीच तीनों सेनाओं के संयुक्त युद्धाभ्यास त्रिशूल में स्वदेशी ड्रोनों का परीक्षण सफल रहा। पाकिस्तान से सटे गुजरात और राजस्थान सीमा पर इन ड्रोनों ने मुश्किल हालात में भी लक्ष्य पर सटीक निशाने साधे। युद्ध के हालात में इन ड्रोनों की योग्यता का सत्यापन होना मील का पत्थर है। दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने देश के सीमावर्ती प्रदेशों में सैकड़ों ड्रोन भेजे थे। भारत की हवाई रक्षा प्रणाली ने उन ड्रोन हमलों को नाकाम कर दिया था, लेकिन इन हमलों ने आधुनिक युद्धों में ड्रोन की उपयोगिता को नये सिरे से स्थापित किया।
भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने बताया कि ये ड्रोन आधुनिक सैन्य अभियानों की जरूरत के अनुरूप लंबी उड़ान वाले मिशन में भी कामयाब रहे। अब यह स्वदेशी तकनीक सीधे सेना के ऑपरेशनल फ्रेमवर्क में शामिल हो पाएगी। त्रिशूल अभ्यास की देखरेख सेना की दक्षिणी कमान, नौसेना की पश्चिमी कमान और वायुसेना की दक्षिण-पश्चिमी कमान कर रही।
सेना ने बताया कि उसकी इंजीनियरिंग शाखा कॉर्प्स ऑफ ईएमई की तकनीकी क्षमता और देश के एमएसएमई क्षेत्र के सहयोग से एक सशक्त ड्रोन इकोसिस्टम तैयार किया गया है। इसके तहत डिजाइन तैयार कर ऐसे ड्रोन बड़े पैमाने पर बनाए जा रहे, जो निगरानी, सटीक हमले और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसे अभियानों में फिट बैठ पाएं।
ईगल इन द आर्म दृष्टिकोण
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना की नई रणनीति ड्रोन आधारित संचालन पर विशेष जोर देती है। सेना अपनी इस रणनीति को ईगल इन द आर्म दृष्टिकोण कहती है। इसका अर्थ है- हर सैनिक के हाथ में एक ड्रोन होगा। उसका उपयोग निगरानी, रसद पहुंचाने और दुश्मन पर हमला करने में किया जाएगा।
ड्रोन केंद्रों का गठन
सेना तेजी से ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियों को ऑपरेशनल यूनिटों में शामिल कर रही है। देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी, महू स्थित इन्फैंट्री स्कूल और चेन्नई स्थित अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी जैसी प्रमुख अकादमियों में ड्रोन केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसका उद्देश्य सेना के सभी अंगों के सैनिकों के लिए ड्रोन संचालन को मानक परिपाटी बनाना है।