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Hindi News ›   India News ›   India to lead security pillar of BIMSTEC as it adopts a charter in 5th summit and gets international personality news in Hindi

BIMSTEC Summit 2022: बिम्सटेक को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता, सात स्तंभों में से भारत के पास सुरक्षा का जिम्मा

Wed, 30 Mar 2022 10:14 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 30 Mar 2022 10:14 PM IST
सार

बुधवार को बिम्सटेक (बहुक्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल) के पांचवें शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस दौरान एक चार्टर को स्वीकार किया गया और सात स्तंभों में से सुरक्षा के स्तंभ की जिम्मेदारी भारत को सौंपी गई।

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India to lead security pillar of BIMSTEC as it adopts a charter in 5th summit and gets international personality news in Hindi
बिम्सटेक के अतिरिक्त सचिव रुद्रेंद्र टंडन - फोटो : एएनआई

विस्तार

दक्षिण एशिया क्षेत्रीय समूह बिम्सटेक (BIMSTEC) के सुरक्षा स्तंभ का नेतृत्व भारत करेगा। इसके पांचवें शिखर सम्मेलन में संपूर्ण सहयोग का विस्तार करने के लिए एक चार्टर को अपनाया गया है। वर्चुअल माध्यम से हुए इस शिखर सम्मेलन में परिवहन संपर्क को लेकर एक मास्टर प्लान का एलान हुआ और सात स्तंभों पर खड़ी सहयोग गतिविधियों का उल्लेख किया गया। 

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बुधवार को विदेश मंत्रालय की एक विशेष ब्रीफिंग के दौरान बिम्सटेक के अतिरिक्त सचिव रुद्रेंद्र टंडन ने कहा कि यह चार्टर समूह को एक मान्य क्षेत्री संगठन के रूप में बदलने के लिए औपचारिकता की प्रक्रिया में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि यह इस शिखर सम्मेलन का मुख्य परिणाम था। अब इस चार्टर के साथ बिम्सटेक के पास एक अंतरराष्ट्रीय पहचान हो गई है।
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टंडन ने कहा कि श्रीलंका के कोलंबो में इस चार्टर पर हस्ताक्षर होने से बिम्सटेक को एक प्रतीक, ध्वज औपचारिक रूप से सूचीबद्ध सिद्धांतों के साथ एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के तौर पर मान्यता मिली है। यह साल बिम्सटेक की स्थापना का 25वां वर्ष है और इसे मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता इस समूह के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि और अहम व सकारात्मक बदलाव है। 
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वर्चुअल माध्यम से बुधवार को हुए बिम्सटेक के पांचवें शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सात सदस्य देशों के अध्यक्ष शामिल हुए। बिम्सटेक में भारत के अलावा श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड, नेपाल और भूटान शामिल हैं। संगठन को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने की कोशिशें 2004 से शुरू हुई थीं लेकिन साल 2014 के बाद इनमें काफी तेजी देखने को मिली थी।

सात स्तंभों पर आधारित होंगी बिम्सटेक की सहयोग गतिविधियां
टंडन ने कहा, बिम्सटेक सहयोग गतिविधियां सात स्तंभों पर आधारित होंगी। हर स्तंभ का नेतृत्व एक सदस्य देश करेगा, जो उस क्षेत्र में सहयोग के लिए जिम्मेदार होगा। इसके तहत फैसला लिया गया है कि सुरक्षा के स्तंभ की अगुवाई भारत के पास रहेगी। परिवहन संपर्क पर मास्टर प्लान को लेकर उन्होंने कहा कि यह पिछले कई साल से हमारा मुख्य एजेंडा था। 

उन्होंने कहा कि साल 2018 में हुए शिखर सम्मेलन में यह फैसला लिया गया था कि समूह और व्यवस्थित रूप से इस मुद्दे को लेकर काम करेगा। मास्टर प्लान तैयार करने का सुझाव थाईलैंड की और से आया था। टंडन ने आगे कहा कि इस पर एशियाई विकास बैंक के साथ पिछले दो साल के काम किया जा रहा था और इस सम्मेलन से पहले इसे अंतिम स्वरूप दे दिया गया था।


वैश्विक आर्थिक वृद्धि के इंजिन बन गए हैं बिम्सटेक देश: राजपक्षे
शिखर सम्मेलन के दौरान श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे ने कहा कि बिम्सटेक क्षेत्र को आतंकवाद, क्षेत्रीय उग्रवाद और नारकोटिक्स से बचाने की आवश्यकता है। बिम्सटेक के सदस्य देश वैश्विक अर्थव्यवस्था में वृद्धि के इंजिन बन चुके हैं। राजपक्षे ने श्रीलंका के वर्तमान आर्थिक संकट पर भी बात की और कहा कि देश कोविड महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

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