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'सुखोई' के जले अब रूस के साथ फूंक-फूंक कर रखेंगे कदम
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर
Updated Thu, 09 Mar 2017 11:11 AM IST
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सुखोई 30एमकेआई
- फोटो : Wikepedia
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भारत ने कहा है कि वो रूस के साथ पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान (एफजीएफए) के विकास और निर्माण में तभी जाएगा, जब उसे संपूर्ण स्तर पर तकनीक और फायदे मुहैया कराए जाएंगे। अरबों डॉलर की इस डील पर हस्ताक्षर के बाद भारत अपने देश में बेहतरीन लड़ाकू विमान बना सकेगा।
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि यह फैसला उच्च स्तर पर लिया गया है, ताकि सुखोई-30एमकेआई जैसी पुरानी गलतियों को न दोहराया जाए। रूस के साथ 55,71 रुपए की इस डील में भारत को घरेलु विमान निर्माण के लिए कोई ठोस मदद नहीं दी गई। सूत्रों ने कहा, 'रूस से 272 सुखोई विमान खरीद गए थे, जिन्हें हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स (एचएएल) ने अलेंबल (एकत्रित) किया। इम्पोर्टिड किट्स वाले इन विमानों का निर्माण भारत में नहीं होता।" बता दें कि सुखोई एचएएल द्वारा निर्मित सुखोई विमान रूस की तुलना में 100 करोड़ रुपए ज्यादा मंहगा पड़ता है।
अब, रूस द्वारा नए एफजीएफए कॉन्ट्रेक्ट के बारे में दी गई पूरी जानकारी दी जाने के बाद भी भारत यह जानना चाहता है कि 127 विमानों के लिए लिए 25 बिलियन डॉलर (करीब 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपए) की कीमत में देश को क्या मिलेगा। इससे पहले दोनों देशों ने 2007 में हुए एफजीएफए समझौते को वापिस ले लिया था। अब भारत ने इस परियोजना की लागत समीक्षा के अलावा, दो और अनिवार्य आवश्यकताएं निर्धारित की हैं। भारत की मांग है कि 'सोर्स कोड' के साथ उसे संपूर्ण तकनीक मुहैया जाए, ताकि वो इन विमानों को घर में ही अपग्रेड कर सके। इसके अलावा उसे घरेलु निर्माण के लिए भी पूरी सहायता दी जाए।
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रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि यह फैसला उच्च स्तर पर लिया गया है, ताकि सुखोई-30एमकेआई जैसी पुरानी गलतियों को न दोहराया जाए। रूस के साथ 55,71 रुपए की इस डील में भारत को घरेलु विमान निर्माण के लिए कोई ठोस मदद नहीं दी गई। सूत्रों ने कहा, 'रूस से 272 सुखोई विमान खरीद गए थे, जिन्हें हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स (एचएएल) ने अलेंबल (एकत्रित) किया। इम्पोर्टिड किट्स वाले इन विमानों का निर्माण भारत में नहीं होता।" बता दें कि सुखोई एचएएल द्वारा निर्मित सुखोई विमान रूस की तुलना में 100 करोड़ रुपए ज्यादा मंहगा पड़ता है।
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अब, रूस द्वारा नए एफजीएफए कॉन्ट्रेक्ट के बारे में दी गई पूरी जानकारी दी जाने के बाद भी भारत यह जानना चाहता है कि 127 विमानों के लिए लिए 25 बिलियन डॉलर (करीब 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपए) की कीमत में देश को क्या मिलेगा। इससे पहले दोनों देशों ने 2007 में हुए एफजीएफए समझौते को वापिस ले लिया था। अब भारत ने इस परियोजना की लागत समीक्षा के अलावा, दो और अनिवार्य आवश्यकताएं निर्धारित की हैं। भारत की मांग है कि 'सोर्स कोड' के साथ उसे संपूर्ण तकनीक मुहैया जाए, ताकि वो इन विमानों को घर में ही अपग्रेड कर सके। इसके अलावा उसे घरेलु निर्माण के लिए भी पूरी सहायता दी जाए।
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