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फैसला: भारत को मिल सकती हैं पहली महिला सीजेआई, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के नौ जजों के नाम पर केंद्र की सहमति
Thu, 26 Aug 2021 09:39 AM IST
प्रशांत कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत कुमार झा
Updated Thu, 26 Aug 2021 09:39 AM IST
सार
कॉलेजियम ने जिन नामों की सिफारिश की है उनमें जस्टिस नागारात्ना भारत की पहली महिला चीफ जस्टिस बन सकती हैं। वह 25 सितंबर से 29 अक्तूबर 2027 तक के लिए यह पद संभाल सकती हैं।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
तीन महिला जज समेत नौ जजों को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त करने की कॉलेजियम की सिफारिश को बिना किसी बाधा के केंद्र सरकार के स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा हस्ताक्षर किए जाने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट को नौ नए जज मिल गए। केंद्र सरकार ने इन सभी की नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या 33 हो गई। सुप्रीम कोर्ट में अधिकतम 34 जजों के होने का ही प्रावधान है।
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सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार है जब एक ही झटके में सुप्रीम कोर्ट में तीन महिला जजो की नियुक्ति हुई। इतना ही नहीं कॉलेजियम की इस सिफारिश को सरकार द्वारा स्वीकार करने से जस्टिस बीवी नागरत्ना का भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनने का रास्ता साफ हो गया है। वह सितंबर, 2027 में चीफ जस्टिस बनेंगी और उनका कार्यकाल करीब एक महीने का होगा। पिछले 71 वर्षों में सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ आठ महिलाएं ही जज बनी हैं।
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न्यायमूर्ति नागरत्ना पूर्व चीफ जस्टिस एंगलगुप्पे सीतारामैया वेंकटरमैया की बेटी हैं जो 1989 में छह महीने के लिए चीफ जस्टिस रहे थे। सुप्रीम कोर्ट का नेतृत्व करने वाले परिवार की दो पीढ़ियों का यह केवल दूसरा उदाहरण होगा। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ नवंबर 2022 में चीफ जस्टिस बनने की कतार में हैं जबकि उनके पिता जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ 1978 और 1985 के बीच चीफ जस्टिस थे। गत 17 मई को भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने शीर्ष अदालत में जज नियुक्त करने के लिए नौ नामों की सिफारिश की थी।
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केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को तेलंगाना हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जस्टिस हिमा कोहली, कर्नाटक की जज जस्टिस बीवी नागरत्ना, गुजरात हाईकोर्ट की जज जस्टिस बेला त्रिवेदी, पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल वरिष्ठ वकील पीएस नरसिम्हा, कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एएस ओका, गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विक्त्रस्म नाथ, सिक्किम हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जेके माहेश्वरी, केरल हाईकोर्ट के जस्टिस सीटी रविकुमार और मद्रास हाईकोर्ट के जज जस्टिस एमएम सुंदरेश को शीर्ष अदालत में जज नियुक्त करने की अधिसूचना जारी कर दी है।
नौ में से तीन जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बीवी नागरत्ना और पीएस नरसिम्हा भारत के मुख्य न्यायाधीश बन जाएंगे। नरसिंहा बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने वाले नौवें वकील हैं। वह बार से सुप्रीम कोर्ट का चीफ जस्टिस बनने वाले तीसरे चीफ जस्टिस होंगे।
1. जस्टिस एएस ओकाऱ् मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले। बॉम्बे विश्वविद्यालय से 1983 में एलएलएम की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने थाने जिला अदालत में वकालत की शुरुआत की। 2003 में बॉम्बे हाईकोर्ट में एडिशनल जज बने। 2005 में वह स्थायी जज बने। 10 मई 2019 को उन्हें कर्नाटक हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया।
2. जस्टिस हिमा कोहली मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली। उन्होंने स्कूली शिक्षा दिल्ली के सेंट थॉमस स्कूल से हासिल की। इसके बाद उन्होंने सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास में स्नातक किया। कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री हासिल की। 1984 में वकालत के पेशे में आईं। 2006 में दिल्ली हाईकोर्ट में एडिशनल नियुक्त। अगस्त 2007 में स्थायी जज बनीं। सात जनवरी 2021 को उन्हें तेलंगाना के चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया था।
3. जस्टिस विक्रम नाथ मूलत: उत्तर प्रदेश के रहने वाले। 1987 से वकालत की शुरुआत की। सितंबर 2004 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में एडिशनल जज बनाए गए। फरवरी 2006 में स्थायी जज बने। 10 सितंबर 2019 में गुजरात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनाये गए।
4. जस्टिस जेके माहेश्वरी मूल रूप से मध्यप्रदेश के रहने वाले। 1985 में एलएलबी की डिग्री हासिल की। इसके बाद एलएलएम की पढाई भी की। 1985 में वकालत की शुरुआत की। 2005 में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एडिशनल जज नियुक्त हुए और नवंबर 2008 में स्थायी जज बने। अक्टूबर 2019 में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने। जनवरी 2021 में सिक्किम हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने।
5. जस्टिस बीवी नागरत्न 21 वर्षों तक कर्नाटक हाईकोर्ट में एक वकील के रूप में प्रैक्टिस की। 2008 से कर्नाटक हाईकोर्ट में जज। कोविड महामारी के दौरान उन्होंने कर्नाटक सरकार को अपने कर्तव्यों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने का आदेश देते हुए कई निर्णय पारित किए।
6. जस्टिस सीटी रविकुमार केरल के एर्नाकुलम से कानूनी करियर की शुरुआत की। जनवरी 2009 में केरल हाईकोर्ट में एडिशनल जज बने। दिसंबर, 2010 में उन्हें केरल हाईकोर्ट के स्थायी जज के रूप में नियुक्त किया गया।
7. जस्टिस एमएम सुंदरेश 2009 से मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्य किया है। पर्यावरण संरक्षण के हित में फरवरी 2021 में उन्होंने तमिलनाडु में हाथी के दांत के लिए हाथी के अवैध शिकार के संदेह पर सीबीआई जांच का आदेश दिया।
8. जस्टिस बेला त्रिवेदी मूल रूप से गुजरात की रहने वाली। फरवरी 2011 में गुजरात हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बनी। 2016 में स्थायी जज बनी। हाईकोर्ट में पदोन्नत होने से पहले एक दशक तक निचली अदालत के न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। गुजरात हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में उनका कोर्टरूम देश के उन पहले कोर्ट रूम में शामिल था जहां से लाइवस्ट्रीम हुई थी।
9. वरिष्ठ वकील पीएस नरसिम्हा वर्ष 2014 से 2018 तक अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के रूप में कार्य किया। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने भगवान श्री राम विराजमान का प्रतिनिधित्व किया था।