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पूर्वी लद्दाख में भारत की मजबूत सैन्य स्थिति, चीन की उकसावे की हरकतों पर लगाई जा सकती है लगाम

Sat, 12 Sep 2020 04:40 AM IST
संजीव कुमार झा गुंजन कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
गुंजन कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Sat, 12 Sep 2020 04:40 AM IST
सार

  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए और सीडीएस ने जयशंकर-वांग बातचीत की सैन्य स्तर पर की समीक्षा
  • चीन जल्द ही सैन्य स्तर की बातचीत के लिए करेगा पहल, कोर कमांडर की बातचीत अगले हफ्ते संभव

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India strong military position in eastern Ladakh can force China to go back
भारतीय सेना - फोटो : पीटीआई

विस्तार

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने रूस की राजधानी मॉस्को में विदेशमंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेशमंत्री वांग यी से बहुप्रतीक्षित बातचीत की सैन्य स्तर पर समीक्षा कर रहे हैं। वहीं, इस पर सेना का मानना है कि पूर्वी लद्दाख में मजबूत सैन्य स्थिति के बाद आगामी बातचीत में चीन की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बार-बार की जाने वाली उकसावे की हरकतों पर लगाम लगाई जा सकती है। फिलहाल, कोर कमांडर के छठे दौर की बातचीत अगले हफ्ते संभावित है।

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दरअसल, सेना चीन के साथ विभिन्न स्तर पर होने वाली बातचीत में पैंगोंग पर सामरिक लिहाज से भारतीय सेना की अति मजबूत स्थिति का लाभ लेने के पक्ष में हैं। जयशंकर- वांग बातचीत से साझा बयान में सेनाओं के अप्रैल-मई वाली स्थिति में वापस जाने का कोई जिक्र नहीं है। उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक पैंगोंग के दोनों किनारों पर हालात को देखते हुए चीन जल्द ही सैन्य स्तर की बातचीत के लिए पहल करने वाला है।
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इसके अलावा, भारत सैन्य बातचीत के साथ विदेश प्रतिनिधि बातचीत पर जोर देगा। जयशंकर के साथ बातचीत करने वाले चीनी विदेशमंत्री वांग यी ही चीन के विदेश प्रतिनिधि भी हैं। भारत की तरफ से एनएसए डोभाल विशेष प्रतिनिधि  हैं। सूत्रों ने बताया कि मास्कों में हुई बातचीत के आधार पर आगे की सैन्य रणनीति तय करने  के लिए सेना के शीर्ष अधिकारी और रक्षामंत्री स्तर पर जल्द ही एक और बैठक होगी।
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चीन के सामने दो ही विकल्प: जंग करे या बातचीत में सम्मानजक रास्ता निकले
सेना सूत्रों ने कहा कि पैंगोंग के दक्षिणी इलाके में अहम ठिकानों पर भारतीय सेना की मजबूत स्थिति के साथ उत्तरी किनारे के फिंगर-4 की सबसे ऊंची चोटी पर कब्जे में बाद चीनी सेना के पास ज्यादा विकल्प नहीं। या तो चीनी सेना जंग पर उतारू हो जाए या फिर बातचीत में पीछे हटने का सम्मानजनक रास्ता ढूंढे। चूंकि मौजूदा हालात में चीन जंग से बचना चाहेगा। ऐसे में बातचीत कर वह अपनी नीयत साफ करना चाहेगा।

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