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कोरोना संकट 2.0: समुदाय में फैल रहा है कोविड-19 संक्रमण, केंद्र सरकार के हाथ-पांव फूले, मई तक हालात होंगे गंभीर

Fri, 16 Apr 2021 07:52 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 16 Apr 2021 07:52 PM IST
सार

  • अप्रैल के तीसरे सप्ताह से शुरू हो सकता है कोविड-19 का भयानक मंजर
  • गांवों में फैल रहे संक्रमण ने बढ़ा दी है परेशानी
  • जून से पहले हालात के सुधरने की संभावना कम

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India should worried Lancet magazine report claim as Covid-19 is airborne, major chances of community transmission
कोरोना टेस्ट - फोटो : PTI

विस्तार

यह न्यूज रिपोर्ट डराने के लिए नहीं है, बल्कि सावधान और सतर्क करने के उद्देश्य से है। जानकारी केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और कोविड-19 टास्क फोर्स के सदस्यों के हवाले से आयी है। केन्द्र सरकार के रणनीतिकारों को समुदाय में कोविड-19 फैलने का साफ खतरा दिखाई देने लगा है। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को कोविड-19 की स्थितियों को लेकर समीक्षा की है। सूत्र बताते हैं कि उन्हें भी भावी स्थितियों से अवगत कराया गया है। अप्रैल के तीसरे सप्ताह के बाद से मई के महीने तक कोविड-19 का विकराल रूप देखने को मिल सकता है।

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सामान्य वार्ड में भी 400 की वेटिंग

सर गंगाराम अस्पताल के चिकित्सकों के बीच में कोविड-19 के हालात चिंता का विषय का बने हुए हैं। वहां कोविड-19 के सामान्य वार्ड में भी 400 की वेटिंग चल रही है। आईसीयू, वेंटिलेटर के वार्ड बिल्कुल खाली नहीं हैं। दिल्ली में कोविड-19 के संक्रमितों का इलाज कर रहे एक वरिष्ठ चिकित्सक का कहना है कि अभी तो यह शुरुआत जैसा लग रहा है। इस संक्रमण का भयानक मंजर आना बाकी है। सूत्र का कहना है कि कोरोना का समुदाय में प्रसार हो चुका है। संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ में अधिकतम मरीजों की छुट्टी करके वार्ड खाली करा लिए गए हैं। यही स्थिति केजीएमयू की भी है। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के सूत्र बताते हैं कि जिस तरह से कोविड-19 के मामले सामने आ रहे हैं, वे डराने वाले हैं। कोविड-19 का संक्रमण दूर-दराज के गांवों में फैल रहा है। हमें अगले दो महीने बहुत सावधान रहने की आवश्यकता है। रिम्स, रांची और पटना से भी इसी तरह की सूचनाएं मिल रही हैं। बिहार और झारखंड के गांवों में कोविड-19 के संक्रमित मिल रहे हैं।

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पांच लाख तक रोज मिल सकते हैं मामले!

नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि अगले दो सप्ताह के भीतर पांच लाख से अधिक सक्रिय मामले हर रोज सामने आ सकते हैं। संक्रमण की चपेट में अधिक लोगों को जान गंवानी पड़ सकती है। सूत्र का कहना है कि केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, देश के समाचार पत्र और चैनल लोगों को लगातार खराब हालात की चेतावनी दे रहे हैं, लेकिन अभी लोगों के भीतर कोविड-19 को लेकर किसी तरह का डर नहीं दिखाई दे रहा है। लोग सावधान नहीं हो रहे हैं।

फिर लॉकडाउन क्यों नहीं लगाती सरकार?

हालांकि इस सवाल का जवाब केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण दे चुकी हैं। वित्तमंत्री ने साफ कहा कि है लॉकडाउन लगा कर आर्थिक गतिविधियां ठप नहीं कर सकते। लॉकडाउन के बारे में केंद्र सरकार के रणनीतिकारों का कहना है कि यह नीतिगत फैसला है। इसे सरकार को लेना है। वह केवल यथास्थिति, आने वाले समय का अनुमान लगाकर उसके बारे में जानकारी और सुझाव भर दे सकते हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन के सचिवालय से जुड़े सूत्र का कहना है कि केन्द्र सरकार ने लॉकडाउन जैसे सभी अधिकार राज्य सरकारों को दे दिए हैं। राज्य सरकार स्थिति की गंभीरता को देखकर उचित निर्णय ले रही हैं। बताते हैं प्रधानमंत्री मोदी और उनका कार्यालय लगातार केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के कंट्रोल रूम, केन्द्रीय सचिव राजेश भूषण पांडे, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन समेत तमाम लोगों से संपर्क बनाए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय लगातार राज्यों से रिपोर्ट ले रहा है, सुझाव दे रहा है।

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लांसेट का दावा, हवा से फैल रहा है संक्रमण

लांसेट पत्रिका का चिकित्सा क्षेत्र में खासा मुकाम है। इसने दावा किया है कि हवा में कोविड के वायरस हैं और इससे संक्रमण फैल रहा है। इसलिए इस बार संक्रमण के फैलाव में काफी तेजी देखने में आ रही है। ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा के विशेषज्ञों के शोध के हवाले से यह दावा किया जा रहा है। शोधकर्ता लुइस जिमनेज के हवाले से कहा गया है कि बड़े ड्रापलेट्स के जरिए कोविड के फैलने के सबूत ना के बराबर हैं। वहीं हवा के जरिए कोविड के फैलने के मजबूत सबूत हैं। नये शोध में सामने आया है कि कोविड बिना खांसी और छींक के भी फैल रहा है।

कोविड संक्रमण को लेकर एक तथ्य यह भी चल रहा था कि जो एक बार इससे संक्रमित होकर ठीक हो रहा है, उसे दोबारा संक्रमण नहीं होगा। लेकिन हाल में कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जिनमें लोग दोबारा संक्रमित हुए हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा भी इनमें से एक हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारी इस तरह की तमाम सूचनाओं को लेकर असहाय स्थिति में खुद को महसूस कर रहे हैं।

जून से पहले अच्छी सूचना के आसार नहीं

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (महामारी विभाग) के प्रो. आनंद कृष्णन का कहना है कि कोविड-19 की मौजूदा लहर खतरनाक है। लोगों को इसे बहुत गंभीरता से लेना चाहिए। डा. कृष्णन के अनुसार जून 2021 से पहले किसी तरह की सूचना आने की संभावना कम है। इसलिए इस समय सावधानी ही सबसे बड़ा उपाय है। कोविड-19 टास्क फोर्स के प्रमुख नीति आयोग के सदस्य डा. विनोद कुमार पॉल का कहना है कि लोगों को मास्क पहनने, बार-बार हाथ धोने, जहां तक हो सके बहुत जरूरत होने पर ही बाहर निकलने तथा दो गज से अधिक की दूरी का पालन करना चाहिए। यह वैक्सीन लगने की तरह ही कारगर है। वह साफ कहते हैं कि बिना लोगों के सहयोग और एकजुटता के कोविड-19 को नहीं हराया जा सकता।

विदेशी वैक्सीन के लिए मई के अंत तक का इंतजार

यह सूचना भी कुछ लोगों की चिंता बढ़ा सकती है। केन्द्र सरकार ने रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-वी को आपात इस्तेमाल की इजाजत दे दी है। इस वैक्सीन को रेड्डी लैबोरेटरीज के तहत भारत में लाया जाएगा। लेकिन केन्द्र सरकार के रणनीतिकारों की मानें तो इसकी पहली खेप आने में मई का अंतिम सप्ताह तक लग सकता है। इस तरह से किसी भी विदेशी वैक्सीन के जून 2021 के पहले भारत में उपलब्ध हो पाने की संभावना कम है। देश में कोविशील्ड वैक्सीन के उत्पादन को लेकर सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कई स्तर परेशानियों का सामना कर रहा है। इंस्टीट्यूट के सीईओ आदार पूनावाला ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन को टैग करते हुए ट्वीट किया है और उनसे अमेरिका के बाहर वैक्सीन से जुड़े कच्चे माल के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने का आग्रह किया है। इस बारे में केन्द्र सरकार के रणनीतिकारों का कहना है कि फिलहाल वैक्सीन उपलब्ध है। लोगों को अपना टीकाकरण कराना चाहिए। शेष जो भी चुनौतियां आएंगी, सरकार उसके प्रति संवेदनशील है।

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